Sunday, June 30, 2019

बकरी और बंदरिया की कहानी

एक गांव में एक बकरी और एक बंदरिया रहते थे। दोनों ही बहुत अच्छे दोस्त थे। बंदरिया और बकरी दोनों ही मां बनने वाली थी।दोनों बहुत ही खुश थी। कुछ दिनों बाद बकरी ने 2 बच्चों को जन्म दिया बकरी बहुत खुश हुई और बंदरिया भी बहुत खुश हुई। बंदरिया बकरी से मिलने उसके घर आई और बकरी को बधाई दी बकरी बहुत खुश थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रही।                                                                                                                           कुछ दिनों बाद ठंड की वजह से बकरी के दोनों बच्चे मर गए बकरी बहुत दुखी हुई वह बहुत रोई यह खबर सुनकर बंदरिया बकरी से मिलने को आई लेकिन बकरी किसी से भी नहीं मिलना चाहती थी। बंदरिया चुपचाप वहां से चली गई क्योंकि बंदरिया को पता था कि बकरी बहुत दुखी है। बकरी अब घर से बाहर नहीं निकलती थी। वह हमेशा घर में ही रहती ।                                                                                                                            एक दिन उसे खबर मिली कि बंदरिया को दो बच्चे हुए हैं ।बकरी ने अपना दुख भूल कर बंदरिया से मिलने गई जैसे ही वह बंदरिया के घर में घुसी उसने देखा कि बंदरिया अब नहीं रही वह बहुत रोई वह बोली, भगवान यह तुमने क्या किया ? पहले मेरे बच्चों को ले लिया अब मेरी सबसे अच्छी दोस्त को अब मैं क्या करूं ? अकेले कैसे रहूंगी ? वह बहुत ज्यादा रोने लगी बहुत देर तक वह रोती रही उसका रोना सुनकर गांव के लोग आए उसको चुप कराने लगे और कहा कि अब तुमको इन बच्चों को पालना होगा बकरी बोली लेकिन मैं कैसे सब ने कहा यह तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त के बच्चे हैं इन्हें तुम्ही  पाल सकती हो ।बकरी ने हां बोल दिया और बच्चों को लेकर अपने घर चली गई बकरी  को दूध होता था । इसलिए वह  अपना दूध बच्चों को पिला दिया करती और बंदरिया  के बच्चे बकरी  का दूध पी के बहुत खुश होते और उसे ही अपनी मां समझने लगे। बकरी भी उन बच्चों के साथ बहुत खुश थी । बकरी अपने छोटे से परिवार में बहुत खुश थी । 

एक दिन की बात है बकरी से मिलने एक शेर आया और शेर ने कहा कि चलो हम दोनों मिलकर खेती करते हैं बकरी मान गई और दोनों ने मिलकर गेहूं की खेती की लेकिन बकरी के मन में यह सवाल था, कि आखिरकार शेर गेहूं का क्या करेगा ?  
उसने शेर से पूछा कि शेर भाई तुम तो गेहू  खाते नहीं हो तो तुम गेहू  की खेती क्यों करना चाहते हो ? 
                                शेर बोला, मैं इसको बाजार में बेच दूंगा और फिर अपने लिए अच्छा अच्छा खाना खरीदूंगा। बकरी बोली अच्छा ठीक है। कुछ दिनों बाद बकरी और शेर फसल को देखने आए फसल अभी बड़ी नहीं हुई थी इसलिए गुस्से में आकर शेर ने  फसलों से कहा कि जल्दी जल्दी बड़े हो जाओ नहीं तो मैं तुम्हें उखाड़ दूंगा फसल डर गई और जल्दी जल्दी बढ़ने लगी।                                                                                                                                                                                                                                                                                                 कुछ ही महीनों में फसल तैयार हो गए तब शेर और बकरी दोनों ने मिलकर गेहूं काटने को खेत में गए । उन्होंने गेहूं काटा  और उसमें से गेहूं अलग किया और भूसा अलग किया । बकरी ने कहा कि चलो शेर भाई हम दोनों यह दोनों चीजें आधा-आधा बांट ले शेर बोला नहीं नहीं ऐसा करते हैं कि गेहूं में रख लेता हूं और भूसा तुम, तो बकरी बोलती है नहीं नहीं आधा-आधा तो शेर बोला अच्छा चलो ठीक है, भूसा तुम ही रख लो और गेहूं में ही बकरी बोलती है, शेर भाई तुम तो एक ही बात को बार-बार बोल रहे हो । भूसा मुझे ही पकड़ा रहे हो। शेर बोला चुपचाप भूसा लेकर अपने घर जा नहीं तो तेरी खैर नहीं, बकरी बोली मैं तुम से डरती नहीं हूं हमने जो भी बोला है हम आधा आधा लेंगे शेर बोला तू नहीं मानेगी, चल कल मैं अपने मामा को बुलाता हूं वह बहुत बड़े शेर हैं ।वह तुझे बताएंगे तू मेरी बात नहीं मानेगी ना कल तू नहीं बचेगी ना तुझे भूसा मिलेगा और ना ही गेहूं, में अच्छा खासा तुझे भूसा दे रहा हूं तो मान ही नहीं रही है। अब तुझे कुछ भी नहीं मिलेगा और तू जान से भी जाएगी , तेरे पास कल तक का समय है तो सोच ले भूसा लेना है तो चुपचाप आकर सुबह ले जाना अगर नहीं तो तू गई काम से। बकरी यह सब सुनकर बहुत दुखी हुई और वह घर चली गई और घर पर जाकर रोने लगी तभी उसके दोनों बच्चे आए और बोले मां आप क्यों रो रही हो बकरी ने बच्चों को गले से लगाया और बोला बेटा आज तुम मुझे जी भर कर प्यार कर लो कल तो शेर आएगा और मुझे खा जाएगा तो दोनों बच्चे बोले क्यों मां ? तो बकरी ने पूरी बात बताई बच्चे सोचने लगे कि ऐसे कैसे वह कर सकता है? तब दोनों बच्चों ने कहा  मां कल तुम जाना और भूसा  गेहूं दोनों ही आधा-आधा लेना तब वह बोली ऐसा नहीं हो सकता। उसने मुझे सिर्फ भूसा लेने को कहा है । बच्चे बोले मां आप जाना , बकरी बोली ठीक है  बेटा कल मैं जाऊंगी लेकिन फिर मैं लौट के नहीं आऊंगी वह दोनों मुझे खा जाएंगे। बच्चे बोले मां आप जाना जैसे वह  आपकी तरफ बढ़ेगा तो आप बोलना शेर सिंह , दहाड़ सिंह जब मेरी जान चली जाएगी तब आओगे क्या बकरी बोली ठीक है बेटा मैं ऐसा ही करूंगी ?                                                                                                                                                                                                                         अगले दिन बकरी खेत को गई और शेर ने अपने मामा को बुलाया हुआ था। शेर मामा बोला ,बोल बकरी तुझे भूसा लेना है तो बता  नहीं तो आज का नाश्ता तो लाजवाब होगा , हम तुझे ही खाएंगे बकरी बोली नहीं नहीं मुझे दोनों ही आधा-आधा चाहिए हम दोनों ने मिलकर मेहनत की है इसलिए दोनों आधा-आधा ही होना चाहिए। शेर बोला तू नहीं मानेगी और उसने अपने मामा को कहा मामा आप इसे खा जाओ उसका मामा जैसे ही बकरी  की तरफ बढ़ने लगा बकरी जोर जोर से शेर सिंह , दहाड़  सिंह जब जान चली जाएगी तब आओगे क्या ? दोनों बंदर भाग कर आए सबसे पहले उन्होंने शेर की आंख में ढेर सारी मिट्टी डालने लगे शेर को नहीं दिखाई दिया फिर एक ने  उसकी पूछ पकड़ी और एक ने उसके कान और खींचातानी करने लगे और बोलने लगे बोल हमारी मां को तू खाएगा ,शेर बोला तू कौन ? उसने कहा  में बब्बर शेर तेरी  पीठ पर बैठा हु । शेर जोर जोर से बोला मुझे बचाओ मुझे बचाओ लेकिन उसका दूसरा साथी वहां से भाग निकला उसे लगा कि यह बब्बर से मुझे खा जाएगा क्योंकि उसने दोनों बंदरों को नहीं देखा। उसका मामा चिल्लाता रहा बचाओ बचाओ और बंदरों ने उसके कान काटी उसकी पूंछ काटी और उसको खूब मारकर वहां से भगा दिया और आखिर में बकरी को उसके मेहनत का फल मिला उसने दोनों आधा-आधा ले कर चली गई और शेर का हिस्सा वही  छोड़ दिया।

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