अगले दिन काव्या और मुक्कु सोचते हैं कि, अब क्या करें? तभी मुक्कू बोलता है, क्यों ना हम सुबोध के पास चलें क्या पता वह हमारी कुछ मदद कर सके? काव्या कहती हैं....... तुम बिल्कुल ठीक बोल रहे हो......मुक्कु...... चलो चलते हैं। दोनों सुबोध के घर जाते हैं और सुबोध को पेन दिखाते हैं। काव्या बोलती हैं...... सुबोध अंकल......हमें पुल के नीचे यह मिला है और यह पेन किसका है यह भी हमें पता चल गया है? यह पापा के ऑफिस में ही काम करने वाले किसी कर्मचारी का है। सुबोध बोलता है...... क्या तुम लोगों को उसका नाम पता है? काव्या कहती हैं...... नाम तो नहीं पता लेकिन हमें उसका घर का पता, पता है। सुबोध पूछता है...... क्या है पता...... काव्या बताती हैं...... सुबोध समझ जाता है कि किसका घर है। सुबोध काव्या से कहता है...... यह पैन मुझे दे दो मैं पता करता हूं, आखिरकार उसने ऐसा क्यों किया? वह तो हमारा बहुत अच्छा दोस्त था। काव्या और मुक्कु वहां से चले जाते हैं। कुछ हफ्ते बीत चुके होते हैं, लेकिन सुबोध का कोई जवाब नहीं आता। काव्या परेशान हो जाती हैं कि, सुबोध अंकल कुछ बोल क्यों नहीं रहे? वह कहां चले गए उनसे मुलाकात भी नहीं हो पा रही है। मुक्कु कहता है...... ऐसा करते हैं, जिसका यह पेन है, हम उसी से जाकर क्यों नहीं बात करते हैं? काव्या कहती हैं...... अगर हम उससे बात करेंगे, तो क्या पता वह खतरनाक हो? हमारे ऊपर हमला कर दे, ऐसा मैं नहीं कर सकती, मुझे कुछ हो गया तो मां किसके सहारे जीए गी। मुक्कु बोलता है...... एक बार जाकर पता तो करते हैं बाकी हम सब देख लेंगे...... काव्या कहती हैं...... चलो चलते हैं, शायद कुछ पता चल सके। काव्या पेन वाले आदमी के घर जाती हैं और दरवाजा खटखटाती हैं, बूढ़ा आदमी बाहर निकलता है बोलता है...... बेटा तुम फिर से आ गइ......काव्या कहती हैं...... हां...... काव्या, बूढ़े आदमी से पूछती हैं...... पहले आप अपना नाम तो बताओ मुझे...... बूढ़ा आदमी बोलता है...... पहले ये बताओ तुम हो कौन? काव्या कहती हैं...... मैं रंजीत की बेटी हूं......बूढ़ा आदमी कहता है...... अच्छा तुम रंजीत की बेटी हो,रंजीत के बारे में सुनकर बहुत बुरा लगा...... मेरा नाम अमरजीत है। काव्य बोलती हैं...... क्या आप मेरे पापा को जानते थे...... अमरजीत कहता है...... हां क्यों नहीं, बहुत अच्छे इंसान थे। काव्या पेन के बारे में अमरजीत से पूछती हैं...... क्या आपके पास कोई डायमंड पेन है...... अमरजीत,हां डायमंड पेन तो था, लेकिन वह खो गया। काव्या चौक जाती,और बोलती है......आप झूठ बोल रहे हो, आप ने हीं मेरे पापा को धक्का दिया, आपने मेरे पापा को पुल पर से धक्का दिया था...... अमरजीत कहता है...... नहीं बेटा...... मैंने पुल पर से रंजीत को धक्का नहीं दिया, मैं तो वहां पर था ही नहीं मेरा पेन तो ऑफिस में ही चोरी हो गया था, मैंने बहुत ढूंढा लेकिन नहीं मिला फिर मैंने पुलिस कंप्लेंट भी की लेकिन मेरा पेन नहीं मिला...... काव्या बोलती है...... वह पेन मेरे पास है...... अमरजीत बोलता है...... बेटा अगर पेन तुम्हारे पास है, तो बेटा वह पेन बहुत कीमती है, इसलिए नहीं की उसपर पर डायमंड लगा है, बल्कि इसलिए, क्युकी वह एक पेन नहीं, एक पेनड्राइव है...... काव्या बोलती है...... क्या बोल रहे हो आप, वह पेनड्राइव है...... अमरजीत बोलता है...... हां बेटा...... बेटा, तुम्हारे पापा और मैं बहुत अच्छे दोस्त थे, हम बहुत ईमानदारी से अपना काम करते, लेकिन हमारा एक तीसरा दोस्त था, जो हमेशा जल्दी तरक्की पाना चाहता था । तुम तो रंजीत की कंपनी में ही काम करती हो, तुम्हें तो पता होगा कि वह केमिकल फैक्ट्री है, हमारा तीसरा दोस्त केमिकल चोरी करता और बेचा करता, इसके बारे में रंजीत को पता चल गया था और रंजीत ने मुझे बताया रंजीत ने हमारे तीसरे दोस्त की चोरी करते हुए, वीडियो बना लिया था और वही वीडियो उस पेनड्राइव में था लेकिन यह बात हमारे दोस्त को पता चल गई और पता नहीं कैसे उसने वह पेनड्राइव चोरी कर लिया और उसी रात रंजीत का एक्सीडेंट भी हो गया, लेकिन मुझे नहीं पता, यह दोनों घटनाएं एक साथ मिलती हैं या नहीं। काव्या कहती है...... अमरजीत अंकल, पापा का एक्सीडेंट नहीं हुआ था, उनको किसी ने पुल से धक्का दिया था ......अमरजीत बोलता है क्या बात कर रही हो बेटा क्या यह सही है? काव्या बोलती है...... हां, यह बिल्कुल सही है, पापा को किसी ने धक्का दिया था, पापा तो बच गए थे लेकिन किसी ने पीछे से आकर धक्का दिया। अमरजीत सोच में पड़ जाता है, तभी अमरजीत को याद आता है कि मेरा पेन तो चोरी हो गया था, तो तुम्हें पेन पुल के नीचे कैसे मिला? इसका मतलब तुम्हारे पापा को उसी ने गिराया है, काव्या पूछती है, किसने...... अमरजीत कहता है पहले तुम पेन दो...... काव्या कहती है...... वह मेरे पास नहीं है, उसको मैंने पापा के दोस्त को दे दिया...... अमरजीत......किस को बेटा......काव्या...... वह आए थे उन्होंने ही बताया था कि तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट नहीं उनको किसी ने धक्का दिया था,तो मैं उस पुल के नीचे गई और वह पेन लेकर आई, तभी मैं उस दिन आई थी,ये पता करने की वो पेन आपका है या किसी और का......अमरजीत,तूमने, क्यों नहीं बताया पेन के बारे में......काव्या......मुझे लगा की अगर मेने आपको बता दिया तो आप कही हमें नुकसान ना पहुचाओ, हम जानना चाहते थे,कि आपने मेरे पापा को क्यों धक्का दिया। अमरजीत मैंने तुम्हारे पापा को धक्का नहीं दिया वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त था, अभी तुम लोग घर जाओ बहुत रात हो गइ है । अगले दिन अमरजीत काव्या के घर आता है । अमरजीत काव्या से पूछता है......तुमने पेन किसको दिया? काव्या बोलती है ......सुबोध अंकल को...... अमरजीत बहुत परेशान हो जाता है और बोलता है कि, बेटा ये तुमने क्या किया, सुबोध ही तो वह आदमी है जो केमिकल की चोरी करता था, हो ना उसी ने तुम्हारे पापा को धक्का दिया होगा, उसे पता था कि उसी पेनड्राइव में उसका पूरा काला चिट्ठा है और तुमने उसे वह पेन दे दिया उसने पेन नष्ट कर दिया तो, वह कभी पकड़ा भी नहीं जाएगा । मुक्कू बोलता है...... नहीं भाग पाएगा...... काव्या बोलती है, क्यों तुम्हें कैसे पता? मुक्कु बोलता है कि, जब तुम पेन लेकर आई थी, तो गलती से पेन मुझसे नीचे गिर गया और उसके दो टुकड़े हो गए, जब मैंने पेन को उठाया तो उसके अंदर पेनड्राइव था, मैंने पेनड्राइव निकाल कर उसके अंदर कागज भरकर पेन उसको दे दिया। काव्या, मुक्कु को गले लगाती है और बोलती है वाह तुम तो बहुत समझदार हो गए हो । मुक्कू पेनड्राइव बाहर निकालता है और अमरजीत को देता है, अमरजीत पूरा वीडियो देखता हैं और पता चल जाता है कि सुबोध ही केमिकल चुरा कर बेचा करता था, रंजीत ने वीडियो सूट किया था , इसलिए तो उसने रंजीत को जान से मार डाला । काव्या, अमरजीत और मुक्कू, तीनों सुबोध के घर गए । सुबोध अमरजीत को देखकर डर गया। अमरजीत ने कहा, तूने काव्या को सब झूठ बताया और कहा कि जिसका यह पेन है, उसने रंजीत को धक्का दिया, रंजीत को धक्का तूने दिया था, मैंने नहीं, तू केमिकल की चोरी करता था । सुबोध बोलता है अब तुम सब मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्यों की पेन मेरे पास है अमरजीत पेन खोल के तो देख सुबोध पेन खोलता है उसमे सिर्फ कागज निकलता है अमरजीत अब तू नहीं बचेगा, तूने ही रंजीत को धक्का दिया था, बोल जल्दी, सुबोध हां हां, हां, मुझे माफ़ करदो, मुझे जाने दो, वो पेन मुझे देदो, अमरजीत अब वो पेन तुझे कभी नहीं मिलेगा क्युकी मेने वो पेन पुलिस को देदिया। काव्या बोलती है...... तुमने अच्छा नहीं किया, तूने बहुत गलत किया मेरे पापा के साथ, हमारे साथ, तभी पुलिस आ जाती है और सुबोध को पकड़ लेती हैं, जाते-जाते सुबोध बोलता है...... जब मेने तुम्हारे पापा को धक्का दिया तो उनके हाथ में एक बैग था, जैसे वे नीचे गिरे तो बोहत तेज बिजली कड़की थी शायद गाड़ी गिरी हो इसलिए, सुबोध को पुलिस लेके चली जाती है सब अपने घर चले जाते है । अगले दिन, काव्या इस सोच में पड़ जाती है कि, बिजली कैसे कड़की? पापा की कार तो नीचे गिरी ही नहीं थी, कार तो अभी भी हमारे पास है, बिजली कैसे कड़की, तभी काव्या को पिकनिक का दिन याद आता है कि, उस दिन भी बिजली की वजह से मेरा मुक्कू मर गया था, इसका मतलब वह बिजली मुक्कु की वजह से कड़की । काव्या मुक्कू के पास जाती है और पूछती है......मुक्कु सच बताओ, उस दिन क्या हुआ था? मुक्कु बोलता है...... जब पापा और मै नीचे गिरे तो बहुत तेज बिजली कड़की, उस बिजली की वजह से पापा की सारी यादें, सारी अच्छाइयां, बाकी हर चीज मुझ में समा गई, इसलिए मैं पापा की तरह सोचता हूं, पापा की तरह काम करता हूं । काव्या मुक्कु को गले लगाती है, बोलती है, मेरा प्यारा मुक्कू, इसका मतलब जो हमारी मदद कर रहा था ,वह पापा थे , मुक्कु बोलता है...... बिल्कुल ठीक कहा, पापा की यादें मेरे अंदर है अब पापा हमारे साथ हमेशा रहेंगे।...... ...... ...... कहानी समाप्त
Wednesday, August 14, 2019
Tuesday, August 13, 2019
मेरा प्यारा टेडी बियर "मुक्कु" (दूसरा भाग)
काव्या अपने कमरे में चली जाती हैं.... रंजीत मुक्कू को अपने ऑफिस बेग में रख देता है और चला जाता है ।काव्या की मम्मी काव्या के पास जाती है...... बेटा चलो खाना खा लो....... काव्या....... गुस्से में....... मुझे नहीं खाना....... काव्या की मम्मी....... बेटा ऐसे नाराज नहीं होते, शाम को पापा आएंगे और तुम्हारा मुक्कु तुम्हें दे देंगे.......काव्या....... नहीं पापा नहीं देंगे अब मैं अच्छे नंबरों से पास होकर दिखाऊंगी और पापा से कभी बात नहीं करूंगी, उन्होंने मेरा मुक्कु, मुझ से छीना है,, मैं उनसे बहुत नाराज हूं। रंजीत अपने ऑफिस पहुंच जाता है, ऑफिस का पूरा काम खत्म करने के बाद वह घर जाने लगता है, रंजीत ऑफिस से बाहर निकलता है और अपनी गाड़ी में बैठ कर जाने लगता है, उसे काव्या की बहुत चिंता थी, काव्या की मां ने फोन करके बताया था कि काव्या ने आज पूरे दिन खाना नहीं खाया । रंजीत को काव्या की बहुत चिंता हो रही थी कि, मेरी बच्ची ने आज पूरे दिन खाना नहीं खाया, वह बहुत तेज गाड़ी चला रहा था और सोच रहा था, मैं जाते ही काव्या को उसका मुक्कु दे दूंगा । रंजीत जिस रास्ते से जा रहा होता है उस रास्ते पर एक पुल पड़ता है, रंजीत इतना ज्यादा सोच में था कि, पुल के बगल में लगा बोर्ड नहीं देखा....... बोर्ड पर लिखा था....... पुल टूटने वाला है....... कोई उसका इस्तेमाल ना करें....... लेकिन रंजीत ने बोर्ड नहीं देखा और वह पुल पर गाड़ी लेकर चला जाता है । पुल जोर जोर से हिलने लगता है....... रंजीत समझ नहीं पाता कि यह क्या हो रहा है? तभी सामने से एक आदमी कहता है....... पीछे जाओ....... तुरंत पीछे जाओ....... पुल टूटा हुआ है....... तुम गाड़ी में से तुरंत निकलो । रंजीत डर जाता है और वह गाड़ी में से निकल कर भागने लगता है, लेकिन इससे पहले वह पुल पार करे, पुल टूट जाता है और रंजीत नीचे गिर जाता है । रंजीत को काफी चोट आई होती है उसे वह, आदमी तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाता है। हॉस्पिटल वाले उसके घर पर फोन करते हैं। काव्या और उसकी मम्मी हॉस्पिटल में पहुंचते हैं....... काव्या की मम्मी डॉक्टर से पूछती हैं....... रंजीत कैसा है? डॉक्टर अफसोस जताते हुए कहते हैं की हम रंजीत को नहीं बचा सके। काव्या की मम्मी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाती.......वह बेहोश हो जाती है....... कुछ घंटों बाद काव्या की मम्मी को होश आता है, वह काव्या को पकड़कर बहुत रोती हैं और बोलती है, भगवान हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? कुछ महीनों बाद....... मुक्कू में कुछ बदलाव थे....... मुक्कू बहुत समझदार हो चुका था....... इतना समझदार की काव्या की पढ़ाई में भी उसकी मदद करता और कठिन से कठिन सवाल भी उसे बता देता, काव्या सोचती कि मुक्कू इतना समझदार कैसे हो गया? यह तो बिल्कुल पापा जैसा है, काव्या पढ़ाई में बहुत तेज होती हैं, वह अपने स्कूल में टॉप करती हैं, काव्या की मम्मी बहुत खुश होती हैं, काव्या अपने पापा की फोटो के पास जाकर बोलती है....... पापा....... देखो मैंने पूरे स्कूल में टॉप किया है....... अब तो आप मुझसे नाराज नहीं होना....... मुक्कु बोलता है....... नहीं नहीं पापा नहीं नाराज है....... काव्या बोलती है.......मै पापा से बात कर रही हु, ना तुम क्यों बोल रहे हो....... मुक्कु....... मुझे पता है, पापा नाराज नहीं है, तुमसे , उन्हें तुम पर गर्व है। कुछ सालों बाद काव्या अब बड़ी हो चुकी थी। काव्या अपने ही पापा के ऑफिस में मैनेजर की पोस्ट पर थी , कामयाब बहुत तेज थी, सभी कर्मचारी काव्या की बहुत तारीफ करते हैं कि, तुम बिल्कुल अपने पापा जैसी हो। एक दिन की बात है.......काव्या ऑफिस से घर जा रही थी तभी एक बूढ़ा आदमी मिलता है....... बूढ़ा आदमी काव्या से बोलता है....... बेटा तुम मुझे नहीं पहचानती, लेकिन मैं तुम्हें जानता हूं....... काव्या बोलती है कि, आप मुझे कैसे जानते हो? बूढ़ा आदमी बोलता है कि, बेटा तुम रंजीत की बेटी होना....... काव्या बोलती है, हां बिल्कुल सही कहा....... आप मेरे पापा को कैसे जानते हो? बूढ़ा आदमी बोलता है कि, मैं तुम्हारे पापा के साथ ही काम करता था.......काव्या कहती हैं....... अच्छा....... तो आप मेरे पापा के दोस्त हो....... बूढ़ा आदमी कहता हैं, हां....... काव्या बूढ़े आदमी का नाम पूछती है....... आपका नाम क्या है अंकल? वह बोलता है....... सुबोध....... काम्या बोलती है कि, मैं तो आपके बारे में नहीं जानती, हो सकता है, मेरी मम्मी जानती हो, आप मेरे घर चलो। सुबोध बोलता है....... नहीं बेटा....... मैं तुम्हारे साथ घर नहीं चल सकता....... मुझे तुम्हें एक बात बतानी है....... काव्या बोलती हैं कैसी बात? बेटा तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट नहीं हुआ था, उन्हें जानबूझकर पुल से गिराया गया था, पुल आधा ही टूटा था, रंजीत पुल के इस बार आ गया था लेकिन उसको किसी ने धक्का दिया। काव्या कहती हैं, अंकल आप यह क्या बोल रहे हो? सुबोध कहता है, मैं बिल्कुल सही बोल रहा हूं....... बेटा....... काव्या पूछती हैं, तो आपने उस आदमी को देखा जिसने मेरे पापा को धक्का दिया था....... सुबोध बोलता है, बेटा बहुत अंधेरा था, जिसकी वजह से मैं उसे देख नहीं पाया, लेकिन अगर तुम उसी जगह पर जाओ तो तुम्हें कुछ ना कुछ तो जरूर मिलेगा....... काव्या बोलती है....... अब वहां क्या मिलेगा, वहां से तो सब कुछ हटा दिया गया होगा....... सुबोध बोलता है, बेटा वहां से कुछ भी नहीं हटाया गया बहुत गहरी खाई थी, इसलिए वहां पर गाड़ी नहीं जा सकी और कर्मचारी भी वहां पर काम करने नहीं गए, इसलिए वहां पर जैसे-का-तैसा पड़ा हुआ है, तुम जाओ तुम्हें कुछ ना कुछ जरूर मिलेगा। अगले दिन ....... काव्या ....... टूटे हुए पुल की जगह पर जाती हैं, मुक्कू को भी साथ में लेकर जाती हैं, वह दोनों ढूंढते हैं कि कुछ मिल जाए, तो हमें शायद पता चल जाए कि किसने पापा को धक्का दिया था? तभी उन्हें एक पेन मिलता है, बहुत चमकीला था और बहुत महंगा भी, उसमें डायमंड लगे हुए थे। काव्या बोलती हैं ....... अब यही पेन उस आदमी की पहचान करवाएगा, क्योंकि ऐसा पेन कोई अमीर आदमी ही अपने पास रख सकता है, कोई आम आदमी नहीं, काव्या और मुक्कू वहां से चले जाते हैं। अगले दिन ....... मुक्कू ....... काव्या से बोलता है कि ....... चलो बड़े-बड़े सुनार के पास जाते हैं और उससे पूछते हैं यह पैन किसने खरीदा था? काव्या कहती हैं ....... मुक्कु .......तुम तो बहुत समझदार हो गए हो .......मुक्कु ....... बिल्कुल सही बोल रहे हो, चलो चलते हैं। काव्या और मुक्कू बहुत सारी दुकानों पर जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिलती, आखिरकार वह एक दुकान में जाते हैं और दुकानदार उस आदमी का पता दे देता है, काव्या उस पते पर जाती हैं और दरवाजा खटखटाती हैं, एक बूढ़ा आदमी बाहर आता है और बोलता है ....... बेटा किस से मिलना है? काव्या सोचती है अगर मैंने पेन दिखाया और यही आदमी हुआ तो, यह तो सतर्क हो जाएगा, काव्या सोचती है अब मैं क्या करूं कैसे पता लगाऊं कि आदमी वही है या नहीं? काव्या बोलती है ....... अंकल ....... मैं रास्ता भूल गई हूं ....... क्या आप मुझे बता सकते हैं, यह पता कहां पर है, बूढ़ा आदमी उसे पता बता देता है, काव्या कहती है ....... अंकल ....... एक गिलास पानी मिलेगा । बूढ़ा आदमी अंदर से पानी लेने जाता है, तभी काव्या घर में चले जाती हैं, तभी उसकी नजर एक फोटो पर पड़ती हैं और फोटो में वही बूढ़ा आदमी था ये उसकी जवानी की तस्वीर जब वह जवान था, उसकी जेब में वही पेन था , काव्या तुरंत उस आदमी की फोटो खींचती हैं, बूढ़ा आदमी आता है, काव्या पानी पीती हैं और वहां से चली जाती हैं। मुक्कु बोलता है ....... अब तो हमें पता चल गया है की, वही आदमी है क्या बोलती है .......काव्या ....... हां यह तो ठीक है लेकिन उसने धक्का क्यों दिया इसके बारे में पता करना होगा?
Monday, August 12, 2019
मेरा प्यारा टेडी बियर "मुक्कु" (पहला भाग)
इस कहानी की जान काव्या और उसका प्यारा टेडी बियर है । काव्या 6 साल की होने वाली थी । अगले ही दिन उसका जन्मदिन था । अगले सुबह काव्या उठती है और अपने माता पिता के पास जाती है और उन्हें गले लगाती हैं । काव्या के पिता रंजीत, काव्या को कहते हैं, बेटा बाहर जाओ तुम्हारे लिए एक तोहफा है, काव्या पूछती है क्या है पापा? रंजीत, बाहर जाओ और खुद ही देख लो, काव्या बाहर जाती है और देखती है कि बाहर एक बड़ा सा बॉक्स रखा हुआ है, वह बॉक्स के पास जाती है और बॉक्स खोलती है और देखती हैं कि उसमें छोटा सा सुंदर सा टेडी बेयर है, काव्या बहुत खुश होती हैं और टेडी बेयर को लेकर अपने पापा के पास जाती है और पापा से कहती हैं , थैंक यू पापा, यह बहुत प्यारा है, यह मेरा सबसे प्यारा गिफ्ट है, मुझे बहुत पसंद आया, थैंक यू, रंजीत बहुत खुश होता है कि उसकी बेटी ने उसका गिफ्ट पसंद किया। काव्या अपना टेडी बेयर हमेशा अपने पास रखती यहां तक कि वह उसे अपने बैग में स्कूल ले जाती उसने अपने टेडी बेयर का नाम भी रखा था मुक्कु, वह अपने दोस्तों को अपना टेडी बेयर दिखाती है, सभी दोस्त बोले कितना प्यारा है ऐसा लग रहा है जैसे अभी बोलेगा, काव्या कहती है, हां, मेरे पापा ने दिया है, बहुत प्यारा है, इसलिए मैं इसे अपने से दूर नहीं करती हमेशा अपने पास रखती हूं, काव्या के दोस्त बोलते हैं वह तो दिख रहा है तु स्कूल भी लेकर आई है। काव्या की कुछ हफ्तों की स्कूल की छुट्टियां पड़ी थी, काव्या ने अपने पापा से कहा कि पापा हम सब पिकनिक पर जाएंगे। रंजीत कहता है, ठीक है, बेटा हम चलेंगे लेकिन अभी नहीं एक-दो दिन बाद काव्या कहती है ठीक है, लेकिन हम चलेंगे, रंजीत बोलता हैं बिल्कुल चलेंगे। दो दिन बाद काव्या अपने पापा और मम्मी के साथ पिकनिक पर जाती हैं, वहां पर वह अपने मुक्कु के साथ खूब मस्ती करती हैं, तभी अचानक तूफान आ जाता है, रंजीत काव्या को लेकर तुरंत वहां से भागने लगता है और एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है काव्या का टेडी बियर बाहर ही छूट जाता है, काव्या, पापा , मेरा मुक्कु, रंजीत बोलता है, बेटा तूफान चला जाएगा तो हम मुक्कु को ले लेंगे, अभी वहां जाना ठीक नहीं है। तूफान आया था, बिजली कड़कती है, बारिश होती है, कई घंटों तक तूफान रहता है, काव्य और उसके माता, पिता तूफान में एक पेड़ के नीचे फस जाते हैं। रंजीत जैसे तैसे करके गाड़ी का इंतजाम करवाता है वहां से तुरंत निकल जाता है। काव्या, पापा, मेरा मुक्कु, रंजीत बोलता है, बेटा मैं आकर ले जाऊंगा तुम्हारा मुक्कु, अभी नहीं, अभी यहां से चलो, मैं तुम्हें दूसरा टेडी बेयर दिला दूंगा, काव्या बोलती है, नहीं मुझे मेरा मुक्कु, ही चाहिए। रंजीत बोलता है, ठीक है, बेटा मैं कल आकर तुम्हारा मुक्कु ले जाऊंगा तुम अभी यहां से निकलो, सभी वहां से निकल जाते हैं और घर पहुंच जाते हैं। दो दिन तक लगातार तूफान चलता रहता है, काव्या घर में बहुत रोती हैं कि मेरा मुक्कु वहां पर मेरे लिए रो रहा होगा। रंजीत, काव्या के पास जाता है और बोलता है, बेटा जैसे ही तूफान बंद होगा मैं तुम्हारे मुक्कु को तुरंत जाकर लेकर आऊंगा । तीसरे दिन तूफान बंद हो जाता है, काव्या कहती है, पापा चलो मेरे मुक्कू को लेने, रंजीत काव्य को लेकर पिकनिक वाली जगह पर जाता है टेडी बेयर बुरी तरह से खराब हो चुका था उस पर बिजली गिरी हुई थी उसका ऊपरी हिस्सा यानी सर का हिस्सा आधा हो चुका था। काव्या बहुत रोती है कि मेरा मुक्कु, मुझे छोड़ कर चला गया, रंजीत कहता है, बेटा मत रो, मैं इसे ठीक कर दूंगा, काव्या कहती है, सही कह रहे हो पापा, आप इसे ठीक कर दोगे, रंजीत, हां बेटा, बिल्कुल ठीक कर दूंगा तुम रोओ मत घर चलो ।काव्या घर जाती हैं , काव्या अपनी मम्मी को पकड कर बहुत रोती है और बोलती है, मेरा मुक्कु बहुत बीमार है। रंजीत जैसे तैसे कर के टेडी बेयर को ठीक कर देता है और काव्या को दे देता है अब टेडी बेयर पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखने लगा है, काव्या बहुत खुश होती हैं और अपने मुक्कु को गले से लगाती है। उसी रात काव्या मुक्कू को लेकर सो जाती हैं, अचानक, काव्या की नींद खुलती है और वह देखती है, मुक्कु उसके पास नहीं है वो कहती है, अरे मेरा मुक्कु, कहां चला गया वह तो मेरे पास ही सोया था, इधर उधर देखने पर मुक्कू पास की कुर्सी पर बैठा होता है, काव्या कहती है, अरे मुक्कू वहां कैसे चला गया, काव्या, मुक्कु के पास जाती है, तो मुक्कू बोलता है, काव्या डर जाती है कि, मुक्कु कैसे बोल सकता है? मुक्कू बोलता है, काव्या डरो मत उस दिन तूफान की वजह से मेरे अंदर जान आ गई है । काव्या बोलती हैं, क्या बात कर रहे हो तुम सही में बोल रहे हो, मुक्कु, हां, मैं बोल रहा हूं, तुम को समझ में नहीं आ रहा है, काव्या मुक्कु को गले लगाती हैं और बोलती हैं, मेरा प्यारा मुक्कू । अगले दिन काव्या मुक्कु को लेकर अपने पापा और मम्मी के पास जाती हैं बोलती है, पापा देखो मुक्कु बात करता है, रंजीत बोलता है क्या बात कर रही हो बेटा, कहीं टेडी बेयर बात करता है, नहीं पापा सही में मुक्कू बात करता है, आप इसे बात करो, ऐसा थोड़ी होता है बेटा, नहीं पापा मैं झूठ नहीं बोल रही हूं, काव्या मुक्कु से कहती है, कुछ बोलो पापा से, मुक्कु बोलता है, हेलो पापा, रंजीत डर जाता है और तुरंत काव्या को अपनी ओर खींच लेता है और मुक्कु को फेंक देता है, तो मुक्कु उठ कर आता है और रंजीत के सामने खड़ा हो जाता है, बोलता है, पापा उस दिन तूफान की वजह से मेरे अंदर जान आ गई, मैं किसी को नुकसान नहीं पहुचाऊंगा, पापा में तो आपक प्यारा टेडी बेयर हूं, आप मुझे लेकर आए थे, आप क्या बोल रहे हो की, में किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाउंगा , ये तो मेरा परिवार है। काव्या, यह मेरा सबसे प्यारा दोस्त है रंजीत बोलता है, ठीक है, रंजीत ने मुक्कु को उठाता है और उससे बातें करने लगता है, अब काव्या अपना सारा वक्त मुक्त को के साथ ही बिताती जिसकी वजह से वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रही थी। एक दिन स्कूल से फोन आता है, काव्या की मम्मी स्कूल जाती है तो काव्या की टीचर बताती हैं कि काव्या पढ़ने में बहुत कमजोर होती जा रही है, उसके मार्क्स भी बहुत गंदे आ रहे हैं, वह पढ़ती नहीं है क्या घर पर? काव्या की मम्मी सोचने लगती हैं, हो ना हो, काव्या पूरा दिन मुक्कू के साथ ही बताती होंगी। काव्या की मम्मी घर जाती हैं और रंजीत को सारी बात बताती है, रंजीत, मुककु को अपने पास रख लेता है और बोलता है जब तक तुम अच्छे नंबर लेकर नहीं आती मैं तुम्हें मुक्कु नहीं दूंगा, काव्या बोलती, नहीं मुझे मेरा मुक्कू चाहिए, रंजीत बोलता है, नहीं मैं तुम्हें मुक्कु नहीं दूंगा, जब तक तुम अच्छे नंबर लेकर नहीं आती, काव्या रोने लगती है, आप बहुत गंदे हो, आप दोनों लोग बहुत गंदे हो, आपने मुझसे मेरा मुक्कु छीना है, मैं अच्छे नंबर लेकर दिखाऊंगी और आप से मुक्कु ले लूंगी और आप से कभी बात भी नहीं करूंगी।
Sunday, August 11, 2019
जादुई दीवार का कोना (तीसरा भाग)
दयाराम, रामधनी हमें आज ही इस गांव को छोड़ कर जाना होगा, क्योंकि धनीराम के आदमी इस गांव में हैं ।अगर हम यहां पर रुके तो वह तुम्हें मार डालेगा और तुम्हारे बच्चे को भी इसलिए हमें यहां से जाना होगा। रामधनी, लेकिन दयाराम, हम यहां से कहां जाएंगे । दयाराम, हम तुम्हारे गांव जाएंगे। रामधनी, मेरे गांव वहां पर गए तो धनीराम हमें नहीं छोड़ेगा और हम सब मारे जाएंगे। दयाराम, नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा हम तुम्हारे गांव जाएंगे और सभी गांव वालों को, जादुई दीवार के कोने के बारे में बताएंगे, तुम्हारे गांव में तुम्हें छोड़कर यह बात सबको पता है इसलिए धनीराम डरा हुआ है, हमें इसी बात का फायदा उठाना है । रामधनी, लेकिन हम मेरे गांव में जाएंगे कैसे? क्योंकि जिस रास्ते से हम जा सकते हैं उस रास्ते पर धनीराम के आदमियों ने पहरा लगा रखा है। दयाराम हम जंगल से नहीं जाएंगे हम ट्रेन से जाएंगे। रामधनी लेकिन ट्रेन से जाने में तो पूरा दिन खत्म हो जाएगा जंगल के रास्ते जाने से हम आधे दिन में ही पहुंच जाएंगे, लेकिन धनीराम के आदमी मिल जाए तो हम में से कोई भी नहीं बचेगा । दयाराम, तभी बोल रहा हूं कि हम लोग ट्रेन से जाएंगे ताकि वह इस बारे में सोचेगा भी नहीं कि हम लोग ट्रेन से जा रहे हैं । रामधनी कहता है, ठीक है । रामधनी, दयाराम और दयाराम की पत्नी किरण तीनों तैयार हो जाते हैं और रेलवे स्टेशन पहुंच जाते हैं । धनीराम का एक आदमी उन लोगों का पीछा कर रहा था लेकिन रामधनी ने उसे देख लिया और पहचान लिया कि यह तो धनीराम का ही आदमी है और रामधनी उसका पीछा करने लगा और वह भाग गया ।आदमी धनीराम के पास गया और कहा कि रामधनी ट्रेन से हमारे गांव आ रहा है, धनीराम ने कहा वह चलाकी दिखा रहा है अब उसकी चलाकी मेरे सामने नहीं चलेगी। धनीराम कहता है कि, जब ट्रेन बीच में रुकेगी तभी हम लोग जाएंगे और रामधनी को मार देंगे धनीराम का आदमी बोलता है कि, मालिक वह अकेला नहीं है उसके साथ एक औरत और एक आदमी भी हैं, धनीराम बोलता है तो वह तीनों ही मरेंगे । ट्रेन आधे रास्ते पहुंच जाती हैं और धनीराम भी । रामधनी, धनीराम को देख लेता है और वह ट्रेन से उतर के छुपने लगता है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसकी वजह से दयाराम और उसके परिवार को कुछ भी हो, रामधनी का बच्चा दयाराम के पास होता है। धनीराम ट्रेन में चढ़ता है जहां पर किरण और दयाराम बैठे होते हैं, ठीक उसके सामने धनीराम बैठ जाता है, धनीराम ने कभी भी दयाराम को नहीं देखा था और उसे पता भी नहीं था कि यह वही आदमी है जो रामधनी के साथ हैं। धनीराम अपने सारे आदमी बदल कर लाया था ताकि रामधनी पहचान ना सके कि यह धनीराम के आदमी हैं। धनीराम अपने आदमियों से कहता है कि, उस आदमी को ढूंढो रामधनी खुद-ब-खुद हमारे सामने आ जाएगा। सब दयाराम, किरण और रामधनी के बच्चे को ढूंढने लगते हैं, लेकिन उन्हें कोई भी नहीं मिलता क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि आखिरकार वे लोग हैं कौन? धनीराम, दयाराम से बात करता है कि तुम कहां जा रहे हो, दयाराम, मेरी पत्नी गर्भवती है मैं उसे उसके घर छोड़ने जा रहा हू, धनीराम, अच्छा, धनीराम ट्रेन से उतर जाता है वहां से जाने लगता है तभी दयाराम के बगल में बैठी एक औरत ने पूछा कि यह तुम्हारा दूसरा बच्चा है तभी किरण बोल देती है नहीं यह मेरा पहला बच्चा है, धनीराम यह बात सुन लेता है और ट्रेन के पीछे भागने लगता है क्योंकि ट्रेन चलने लगती है धनीराम समझ जाता है हो ना हो वह रामधनी का ही बच्चा है क्योंकि उस औरत ने कहा ये उसका पहला बच्चा तो गोद में किसका बच्चा है, इसका मतलब वो रामधनी के ही आदमी थे धनीराम और उसके आदमी ट्रेन के पीछे पीछे भागने लगते है, तभी रामधनी ट्रेन में आ जाता है और वह गेट को बंद करने लगता है धनीराम देख कर समझ जाता है कि हां वही धनीराम के साथी हैं, रामधनी दयाराम से बोलता है हमें अगले स्टेशन पर ही उतरना होगा क्योंकि वह लोग पीछे के डिब्बे में चढ़ गए हैं, इससे पहले हमें इस ट्रेन से उतरना होगा दयाराम रामधनी किरण तीनों जैसे ही स्टेशन आता है उतर के वहां से भाग जाते हैं धनीराम और उसके आदमी आकर ट्रेन में चेक करते हैं लेकिन उन्हें तीनों नहीं मिलते धनीराम बोलता है लगता है तीनों ट्रेन से उतर गए हैं, ढूंढो उन्हें ज्यादा दूर नहीं गए होंगे ।सारे आदमी उन्हें ढूंढने लगते हैं लेकिन उन्हें कोई नहीं मिलता धनीराम कहता है कि अभी तुरंत के तुरंत गांव चलो वह गांव में ही आएगे उसके आने से पहले हमें उसे रोकना है, सभी आदमी और धनीराम गांव की ओर चल पड़ते हैं। रामधनी, दयाराम, किरण गांव में नहीं पहुंचे होते हैं, उनसे पहले धनीराम पहुंच जाता है। अब तीनों सोचते हैं कि हम गांव में कैसे जाएं? यह तो बहुत मुश्किल है, रामधनी, दयाराम, धनीराम ने तो तुम्हें भी देख लिया है, मैं तुम्हें भी नहीं भेज सकता अब क्या करूं? तीनों सोचते हैं कि हम कैसे जाएं तभी वहां से भक्तों की टोली गांव में जा रही थी, दयाराम, रामधनी और किरण भी उसमें शामिल हो गए, भक्तों की टोली के मुंह पर रंग लगा था, इसका फायदा रामधनी, दयाराम और किरण ने उठाया । उन्होंने भी चेहरे पर रंग लगाया और गांव के अंदर पहुंच गए उन्होंने सोचा कि हमें सबसे पहले यहां के जमीदार के घर जाना होगा वही हमारी मदद कर सकते हैं। रामधनी जमीदार के घर पहुंच जाते हैं और जमीदार को जादुई दीवार के कोने के बारे में बताते हैं। जमीदार कहता है कि, यहां एक बार हमारे गांव में बाबा आए थे और उन्होंने हमें इसके बारे में बताया था लेकिन गांव में कोई जादू कोना नहीं मिला । रामधनी, नहीं जमीदार जी जादुई कोना हमारे ही गांव में है। जमीदार कहता है कि ऐसा कैसे हो सकता है? हमने सब के घर के कोने को देखा था लेकिन कहीं भी जादुई किना नहीं मिला । रामधनी बोलता है, जमीदार जी, आप लोगों ने धनीराम के घर में भी चेक किया था, जमीदार बोलता है, हां, तब उसका घर लकड़ी और पत्तों से बना हुआ था उसके घर में भी जादुई कोना नहीं मिला । रामधनी बोलता है कि, जमीदार जी, धनीराम के ही घर में ही जादुई कोना है, क्योंकि उस वक्त उसका घर लकड़ी और पत्तो का बना था, लेकिन अब उसका घर मिट्टी का है उसके घर में ही जादुई कोना है, मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है, उसने मेरे पर हमला करवाया था तभी मैं रात ही रात इस काम को छोड़कर चला गया। जमीदार, हां, हमने भी सोचा कि तुम कहां चले गए और मेरी बीवी सीता भी अब मेरे बीच में नहीं रही इन लोगों की वजह से वह मर गई । जमीदार सभी गांव वालों को लेकर धनीराम के घर की ओर चलता है, धनीराम देखता है कि, रामधनी उन लोगों के साथ हैं वह डर जाता है, सोचता है अब तो मेँ गया ।जमीदार पूछता है, धनीराम, तुम्हारे घर में जादुई कोना है, धनीराम कहता, नहीं नहीं, मेरे घर में कोई जादू कोना नहीं है। जमींदार बोलता है, रामधनी ने खुद अपनी आंखों से देखा था और तुमने रामधनी को मारने के लिए उसके घर आदमी भेजे थे उसकी पत्नी नहीं रही सिर्फ तुम्हारी वजह से । सभी गांव वाले धनीराम के घर में जाते हैं और सारे कोने चेक करते हैं आखिरकार लोगों को जादुई कोना मिल जाता है। जमींदार कोने का एक टुकड़ा लेता है और बोलता है कि, मुझे गेहूं मिल जाए और उसके सामने ढेर सारा गेहू आ जाता है, जमींदार, धनीराम को बंदी बनाने का आदेश देता है और धनीराम से पूछते हैं बोल तेरे साथ क्या किया जाए तूने इतना बड़ा छलावा किया, तूने इसके बारे में बता दिया होता तो क्या हम तेरे साथ धोखा करते, नहीं करते, तूने यह गलत किया तेरी वजह से एक मासूम की जान भी चली गई, तुझे इस गांव में रहने का कोई हक नहीं तुझे इसी वक्त इस गांव को छोड़ कर जाना होगा और इस गांव में कभी कदम मत रखना नहीं तो हम तुझे छोड़ेंगे नहीं ।धनीराम उस गांव को छोड़कर चला जाता है। सभी गांव वाले उस जादुई कोने का मिलकर इस्तेमाल करते हैं।,,,,,,,कहानी समाप्त
Saturday, August 10, 2019
चतुर बालक
यह कहानी एक 10 साल के लड़के की है । जिसका नाम नवीन है, वह बहुत चतुर है । एक दिन की बात है, नवीन स्कूल से घर जा रहा था, तभी उसकी टक्कर उसके पड़ोसी श्यामलाल से हो जाती है । उसने ढेर सारी मिठाइयां ले रखी थी, सारी मिठाईयां मिट्टी में गिर गई और खराब हो गई , उसका पड़ोसी नवीन पर बहुत गुस्सा किया और कहा तुमने मेरा बहुत नुकसान कर दिया अब इसकी भरपाई तुम्हें करनी होगी। नवीन मैंने जानबूझकर नहीं किया और हां, टक्कर आपकी वजह से लगी है आप पता नहीं क्या सोचते आ रहे थे । पड़ोसी बोलता है, कि एक तो गलती करते हो, ऊपर से अपनी गलती मानते भी नहीं । पड़ोसी जानता था, नवीन बहुत चतुर हैं और वह इन सब चीजों से निकलने की पूरी कोशिश करेगा, लेकिन पड़ोसी नवीन को उसके घर लेकर गया और उसके माता-पिता को कहा कि देखो इसने मुझे धक्का दे दिया और मेरी सारी मिठाइयां गिरा दी । नवीन के माता-पिता ने नविन को डाटा और कहा यह तूने क्या किया? नवीन ने कहा पिताजी यह अंकल मुझे नहीं देख रहे थे, मैं तो देख कर चल रहा था, इनकी गलती की वजह से मिठाई गिरी है। पड़ोसी बोलता है,अच्छा सारी गलतियां मेरी है, पड़ोसी बोलता है, मैं इसकी शिकायत पंचायत में करूंगा। नवीन के माता-पिता कहते, छोटी सी बात के लिए आप पंचायत में क्यों जाएंगे? पड़ोसी कहता है, यह छोटी बात नहीं है नवीन आए दिन हमेशा कुछ ना कुछ नुकसान करता रहता है, अब बहुत हुआ। अगले दिन सब लोग पंचायत में गए, पड़ोसी ने अपनी बात पंचों के सामने रखी। पंचों ने कहा कि, हां हमने भी सुना है कि नवीन बहुत शरारत करता है । सारे पंच बोलते हैं कि, यह गलत है, तुम्हें श्यामलाल को मिठाई की भरपाई के पूरे पैसे देने होंगे, नवीन के माता-पिता बोलते हैं की हमें मंजूर है, लेकिन श्यामलाल बोलता है, नहीं मुझे इनके पैसे नहीं चाहिए । सारे पंच बोलते हैं कि फिर तुम क्या चाहते हो? यह छोटा सा बालक है इसको हम सजा नहीं दे सकते, तो श्यामलाल बोलता है की, मेरी मिठाई के पैसे नवीन ही देगा, नविन के माता पिता बोलते है, नविन कहा से देगा वह तो अभी बालक है सारे पंच भी बोलते है, हां, वह अभी बालक है । श्यामलाल बोलता है, मैं नवीन को एक काम देता हूं, उसको एक चीज बेचनी होगी। सारे पंच पूछते है क्या? श्यामलाल एक रुमाल निकालता है और बोलता है कि यह रुमाल नवीन को 1000 में बेचना होगा । सारे पंच बोलते, तुम मूर्ख हो क्या? यह ₹5 का रुमाल कोन 1000 रूपए में खरीदेगा । यह एक बच्चा है, कैसे बेचेगा? श्यामलाल कहता है, अगर इसने यह बेच दिया तो, मैं इससे एक पैसा भी नहीं लूंगा और उसको माफ भी कर दूंगा । सारे पंच बोलते हैं कि ऐसा नहीं हो सकता, तभी नवीन कहता है कि, मैं ऐसा कर सकता हूं और मैं ऐसा जरूर करूंगा। श्यामलाल बोलता है, लेकिन तुम्हारे पास बस कल तक का समय है कल तक तुम्हें यह रुमाल 1000 में बेच देना होगा अगर नहीं बेचा तो मैं तुम्हें सजा दूंगा और तुम को कबूल करनी होगी। नवीन बोलता है जैसा आप कहेंगे वैसा ही करूंगा कल तक में यह रुमाल 1000 रुपए में बेच के दिखाऊगा । नवीन के माता पिता कहते हैं, यह तो कैसी पागलों वाली बातें कर रहा है कोई ₹5 का रुमाल १००० रुपए में क्यों खरीदेगा? श्यामलाल मन ही मन में सोचता है कि अपने आप को बहुत चलाक समझता है अब देखता हूं इसकी चालाकी । अगले दिन नवीन रुमाल लेकर बहुत सारी दुकानों पर जाता है और बोलता है यह रुमाल आप 1000 रुपए में खरीदेंगे, सारे दुकान वाले नवीन पर हंसने लगते हैं कि ₹5 का रुमाल कोई १००० रुपए में खरीदेगा वो मुर्ख ही होगा । नविन थक जाता है अब उसके पास ज्यादा वक्त नहीं था। दिन खत्म होने वाला था नवीन सोच में पड़ जाता है कि मैं क्या करूं? मैं कैसे इस रुमाल को बेचु तभी उसे एक सुनार की दुकान दिखती हैं, सुनार को उसका नौकर चाय लेकर आता है और चाय में मक्खी गिरी होती है, तो नौकर बोलता है, मालिक, चाय में मक्खी गिर गई है, मैं दूसरी चाय लाता हूं, तो सुनार कहता है,मुर्ख कहीं के तू चीनी, चायपत्ती , दूध, पानी इन सब का नुकसान करेगा । सुनार मक्खी निकाल कर चाय पी जाता है और अपने नौकर से कहता है, मक्खी गिरने की वजह से मैं तेरी आधी तनख्वाह काट लूंगा, नौकर बोलता है, इसमें मेरी क्या गलती है? चाय तू ही लेकर आया ना तू ने मक्खी को मना क्यों नहीं किया? नविन सोचता इसे में रुमाल जरूर बेच दूंगा, नविन सुनार के पास जाता है और बोलता है, सुनार जी आप कितने बुद्धिमान हो मैंने देखा कि आपने कैसे चाय व्यर्थ नहीं होने दी, सुनार कहता है, तो हमें हर चीज को संभाल के इस्तेमाल करना चाहिए उसे व्यर्थ ही फेंकना नहीं चाहिए, नवीन बोलता है सोनार जी, मेरे पास एक रुमाल है क्या आप खरीदेंगे? सुनार कहता है, कैसा रुमाल? नवीन रुमाल को निकालता है और बोलता है यह देखो, सुनार कहता है, यह तो एक आम रुमाल है मैं इसे क्यों खरीदु? सुनार पूछता है कितने में बेचोगे? नवीन बोलता है 1000 रुपए में सुनार कहता है, पागल है क्या तु? कोई ₹5 का रुमाल 1000 रुपए में क्यों खरीदेगा? नवीन कहता है, सुनार जी आपने इस रुमाल को ध्यान से नहीं देखा यह कोई आम रुमाल नहीं है, यह चमत्कारी रुमाल है, सुनार कहता है, चमत्कारी, चल मेरे को बेवकूफ मत बना मैं कोई मूर्ख नहीं हूं, नवीन कहता है, ठीक है मेरे पास ऐसे तीन रुमाल थे मैंने अपने नानी के गांव में जाकर एक रुमाल बेचा और उस सुनार ने अपनी आंखों पर जैसे ही इस रुमाल को रखा उसके पूर्वज आए और कहां-कहां खजाना रखा है और कहां उनकी जमीनें हैं सब उसको बता कर गए और वो रात ही रात में बहुत अमीर हो गया। नवीन बोलता है, सुनार जी में चलता हूं आपको तो ये रुमाल खरीदना नहीं है, सुनार सोचने लगता है कि मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रहा, सुनार सोचता है, क्या पता सच भी बोल रहा हो, खरीद के देख लेता हूं क्या जाता 1000 रुपए में, सुनार रुमाल को खरीदने को तैयार हो जाता है और बोलता है कि मैं इसका इस्तेमाल पंचायत में करूंगा ताकि वहां पर साबित हो सके के रुमाल काम करता है या नहीं, नवीन बोलता है बिल्कुल ठीक। नवीन, सुनार को लेकर पंचायत में जाता है और बोलता है कि, मैंने ये रुमाल इन सुनार जी को बेच दिया है। सुनार बोलता है कि, इसने मुझे कहां है यह चमत्कारी रुमाल है, इसको चेहरे पर रखते ही मुझे मेरे पूर्वज दिखेंगे और मैं रुमाल आप लोगों के सामने अपनी आँख पर रखूँगा, अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं इससे 1000 रुपए पर वापस ले लूंगा । पंचायत बोलती है, ठीक है, तभी नवीन बोलता है, लेकिन सुनार जी एक बात का ध्यान रखें कि इस रुमाल को केवल एक ईमानदार और सच्चा इंसान ही अपने चेहरे पर रख सकता है और आप ने कभी भी बेईमानी की हो किसी को दुखी किया हो तो आपको पूर्वज नहीं दिखाई देंगे। सुनार की बहुत इज्जत थी, लेकिन सुनार पापी था बेईमान था और वह अपने से कमजोर लोगों पर अत्याचार करता था। सुनार ने अपने चेहरे पर रुमाल रखा लेकिन उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया, सुनार ने फिर से रुमाल रखा फिर उसे कुछ नहीं दिखाई दिया उसे कोई पूर्वज नहीं दिखाई दीये । पंचायत पूछती है तुम तुम्हारे पूर्वज दिखाए दिए, सोनार सोचने लगता है अगर नहीं कहूंगा तो सबको पता चल जाएगा में बईमान अत्याचारी हु, सुनार ने कहा कि, हां हां मेरे पूर्वज दिख रहे हैं, अरे मेरी दादी जी हैं, मेरे दादाजी हैं, देखो सभी लोग हैं वाह वाह वाह वाह, आज बेटा नवीन तुम्हारी वजह से मुझे मेरे पूर्वज दिखाई दिए । सुनार नवीन को 1000 रुपए देता है और वहां से चला जाता है । श्यामलाल बोलता है, देखा पंच जी कितना चतुर लड़का है किस तरह से सोनार को बेवकूफ बनाया, पंचायत बोलती है कि, वह छोटे से बालक से बेवकूफ बन गया यह उसकी गलती, तुम्हारी सरत पूरी हुई, अब तो तुमे मिठाई की भरपाई भी नहीं मिलेगी, श्यामलला बोलता है, मुझे मंजूर है, मेरी सरत पूरी हुइ ।
Friday, August 9, 2019
जादुई दीवार का कोना (दूसरा भाग)
उसी रात धनीराम ने अपने कुछ आदमियों को रामधनी के घर उसे और उसके परिवार को मारने को भेजा यह बात रामधनी को पता चल चुकी थी । वह उसी रात अपना सब कुछ छोड़कर वहां से भाग निकला । धनीराम के आदमियों ने उसे देख लिया और रामधनी को बहुत मारा रामधनी जैसे तैसे अपने आपको उनसे बचाया और भाग गया । धनि राम के आदमी उसका पीछा करने लगे, रामधनी जैसे तैसे करके अपनी बीवी और बच्चों को लेकर भागता रहा भागते भागते वह दूसरे गांव में पहुंच गया, रामधनी को काफी चोट आई थी। धनीराम के आदमी वहां से वापस चले जाते हैं। वह उस गांव में नहीं जा सकते थे क्योंकि उन्हें वहां पकड़ लिया जाता । वह वापस धनीराम के पास जाते हैं और बोलते हैं वह दूसरे गांव में चला गया। वहां रामधनी भागता रहता है, भागते भागते उसकी टक्कर एक आदमी से होती हैं रामधनी वहीं पर बेहोश हो जाता है, आदमी उसे उठाकर अपने घर ले कर जाता है। रामधनी की पत्नी बहुत रोती है, आदमी पूछता है क्या हुआ क्यों रो रही "हो बहन" और आपके पति को क्या हुआ है? इतनी चोट कैसे लगी हैं? रामधनी की पत्नी सीता बोलती है, कि मुझे कुछ नहीं पता जो भी पता है इन्हें पता है इन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया बस कुछ लोग आए और हमारा पीछा करने लगे और उन्हें काफी पीटा भी लेकिन हम वह से भाग निकले और इस गांव में आ गए और आप से मुलाकात हो गई भैया। आपका नाम क्या है? आदमी बोलता है, मेरा नाम दयाराम है । सीता बोलती है, भैया आप मेरे पति को बचा लेंगे ना, बहुत घायल हैं , दयाराम बोलता है तुम फिकर मत करो। दयाराम, रामधनी का इलाज करवाता है, 2 हफ्ते बाद रामधनी बिल्कुल ठीक हो जाता है। दयाराम, रामधनी से पूछता है यह सब कैसे हुआ? रामधनी, दयाराम का धन्यवाद करता और बोलता है कि, भाई मत पूछो नहीं तो तुम भी मुसीबत में पड़ जाओगे । दयाराम बोलता है, क्या पता हम उस मुसीबत का मिलकर सामना कर पाए है, रामधनी, ठीक है। रामधनी, दयाराम को पूरी बात बताता है, दयाराम, ऐसा थोड़ी न होता है, कही जादुई दिवार का नाम तो मेने आज तक नहीं सुना । रामधनी, है पता है इसपर विस्वाश करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन मेने अपनी आखो से देखा है, तभी तो वह लोग मुझे मारना चाहते है । दयाराम, तो धनीराम चाहता क्या है? रामधनी, वह चाहता है की उस जादुई दीवार का इस्तमाल केवल वही करे और किसी को पता भी न चले, जब मेने कहा आप गलत कर रहे हो तो उसने मुझे मारने की धमकी दी । दयाराम, ऐसा करते है की तुम्हारे गांव चलते है और सारी बात गांव वालो को बता देते है । रामधनी , क्या ऐसा करना ठीक होगा, ऐसा न हो की हमें से कोई भी ना बचे, दयाराम, डरो मत में हु तुम्हारे साथ। अगले दिन दयाराम और रामधनी बाजार चले जाते है । रामधनी अपने बेटे को भी साथ में लेकर जाता है । घर में सिर्फ सीता और दयाराम की पत्नी किरण है वह दोनों आपस में बाते कर रही थी, तभी घर का दरवाजे की खटखटाने की आवाज आए, सीता बोली अरे इतनी जल्दी बाजार से वह लोग आगए, सीता दरवाजा खोलती है तो कुछ आदमी घर में घुश जाते है, वह धनिराम के आदमी थे, सीता डर जाती है और बोलती तूम घर में क्यों घुश रहे हो बहार निकलो, किरण गुस्से में बोलती है अभी मेरे घर से बहार निकलो, हो कोन तुम लोग? सारे आदमी पूछते है, रामधनी कहा है, किरण बोलती है कोन रामधनी? ये दयाराम का घर है, तूम यहाँ चले जाओ, सारे आदमी बोलते, हमें पता है, ये सीता है रामधनी की पत्नी वह सारे सीता से पूछने लगते है ,लेकिन सीता कुछ भी नहीं बताती सारे उने बहुत डरते धमकाते है जिसकी वजह से सीता को दिल का दौरा पड जाता है और उसकी जान चली जाती है और किरण बेहोश हो जाती । सारे आदमी वह से चले जाते है । कुछ देर बाद रामधनी और दयाराम घर पर आते है और पूरा घर बिखरा हुवा देख कर दंग रह जाते, की यह क्या हुवा है> रामधनी अपनी पत्नी को उठाता है लेकिन वह कोई जवाब नहीं देती, दयाराम किरण को उठाता है, किरण बेहोश थी उसके ऊपर पानी डालता है तो किरण होश में आती है और रोने लगती है, दयाराम, क्या हुआ है ये सब? किरण पूरी बात बताती है, रामधनी, दयाराम से, मेरी सीता तो कुछ बोल नहीं रही है, दयाराम तुरंत डॉक्टर को बुलाता है और डॉक्टर बोलता है, रामधनी को, तुम्हारी बीबी को दिल का दोरा पड़ा था, इसलिए वह मार गइ है । रामधनी बहुत गुस्से में बोलता है, धनीराम तूने यह ठीक नहीं किया, अब में तुझे नहीं छोडूंगा ।
Thursday, August 8, 2019
जूठी थाली
यह कहानी 6 साल के अमित की है । अमित अपने माता (सरोज) पिता (अरविंद) और दादी (गीता) के साथ रहता है। अमित अपनी दादी से बहुत प्यार करता है, वह अपनी दादी का बहुत ख्याल रखता, अमित की दादी ने चार गाय पाल रक्खी थी। वह उनका बहुत ख्याल रखती अमित भी अपनी दादी के साथ उनका ख्याल रखता ।अमित की दादी रोज रात को गाय को चारा डालने जाती और उनके साथ थोड़ा वक्त बिताती । अमित, सरोज और अरविंद खाना खा रहे होते हैं, तभी अमित पूछता है, मां, दादी हमारे साथ क्यों नहीं खाना खा रहे? सरोज बोलती है बेटा वह अपनी गाय को खाना खिला रही है अभी आएंगे तो खा लेंगे। थोड़ी देर में सब खाना खा लेते है. अमित की दादी आती है और बैठती है, सरोज उन्हें एक टूटी फूटी थाली में सबका जूठा खाना गीता की थाली में परोस देती है. अमित यह सब देख रहा होता है. वह पूछता है, मां, आपने दादी को हमारा छोड़ा हुआ खाना क्यों दिया? सरोज बोलती है, बेटा इसलिए क्योंकि जूठा खाने से प्यार बढ़ता है और हम सब दादी से बहुत प्यार करते हैं और वह हम सब का जूठा खाएंगे तो और प्यार बढ़ेगा ।अमित तो 6 साल का नादान बच्चा था उसे क्या पता कि उसकी मां क्या कर रही है? अमित बोलता हूं, तो अच्छी बात है मां अब दादी मुझे बहुत प्यार करेगी क्योंकि वह मेरा, पापा का और आपका जूठा खा रही है। रात को अमित दादी से बोलता है अब आप मुझे बहुत ज्यादा प्यार करोगी, गीता बोलती हां बेटा अमित को अपनी मां की बात पर पूरा विश्वास हो जाता है। अगले दिन अमित का जन्मदिन था । घर पर दावत थी । सभी खास रिश्तेदार आए थे मामा, मौसी, चाचा, बुआ बस यही लोग। जब रात को सब खाना खा के अपनी अपनी थाली छोड़ दिए तो अमित अपनी दादी की थाली लेकर गया और सब का जूठा अपनी दादी की थाली में डालने लगा सब ने पूछा बेटा यह तुम क्या कर रहे हो? तो अमित बोला मैं आप सबका जूठा दादी को दे रहा हूं दादी अगर आप सबका जूठा खाएगी तो दादी सब से बहुत प्यार करेगी सब लोग यह बात सुनकर चौक चाहते हैं कि यह 6 साल का बच्चा कह कह रहा है अरविंद पूछता है बेटा यह तुमसे किसने कहा। अमित बोलता है, मां, ने कहा मां दादी को रोज आपका, मेरा और अपना जूठा खाना खाने को देती थी और बोलती थी कि इससे बहुत प्यार बढ़ेगा ।यह सब सुनते सभी लोग बहुत दुखी होते हैं कि सरोज गीता के साथ कितना बुरा व्यवहार करती है ।अरविंद और सब ने मिलकर सरोज को बहुत सुनाया तुम्हें 6 साल के बच्चे को इतनी गलत बात कैसे सिखा ।सकती हो ।तुम मां को सब का जूठा खाना कैसे दे सकती हो? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? सरोज को बहुत डांट सरोज को बहुत गुस्सा आया उसने मन ही मन में सोचा यह सब बुढ़िया की वजह से हुआ है इसने ही सबके कान भरे होंगे। एक दिन गीता की तबीयत बहुत खराब हो जाती है और वह अपने आप उठ बैठ नहीं पा रही थी ।रोज रोज सरोज उसे उठाती, लेकिन वह भी ऊपरी मन से। सरोज मन ही मन में सोचती बुढ़िया मर क्यों नहीं जाती? मुझे परेशान करके रखा है । रात को डॉक्टर आते हैं और बोलते हैं माताजी को चीनी से बनी कोई चीज है मत देना इनको चीनी से बहुत खतरा है, अगर चीनी खाएंगे तो बहुत ज्यादा बीमार हो जाएंगे, इसलिए इन्हें चीनी बिल्कुल भी मत देना। सरोज इसी बात का फायदा उठाती हैं और रोज एक गिलास दूध गीता को देती हैं यह देख कर अरविन्द बहुत खुश होता है कि सरोज मेरी मां का कितना ख्याल रखती है। लेकिन सरोज तो उस दूध में बहुत अधिक मात्रा में चीनी मिलाकर गीता को देती । गीता उसको पी लेती और कुछ नहीं बोलती । वह रोज ऐसा करती, गीता की तबीयत दिन-ब-दिन बहुत ख़राब होती जा रही थी । कुछ हफ़्ते बाद गीता की तबीयत बहुत खराब हो गई घर पर डॉक्टर आए ।डॉक्टर ने गीता को चेक किया और कहा कि अब इनका बचना नामुमकिन है किसी ने इनको चीनी तो नहीं खिलाई, सरोज बोली नहीं नहीं हम में से किसने इनको चीनी का एक दाना भी नहीं दिया हमें पता है चीनी की वजह से तबीयत खराब हो जाएगी, गीता कुछ भी नहीं बोली उसने मन में सोच में तो चली जाउंगी, सब बता कर क्यों अपने बेटे की जिंदगी ख़राब करू । कुछ ही घंटों बाद गीता अपना दम तोड़ देती हैं ।अमित बर्दाश्त नहीं कर पाता वह बहुत रोता है । सब लोग बहुत रोते हैं, सरोज भी बहुत होती है लेकिन सिर्फ ऊपरी मन से । 15 साल बाद अब अमित बड़ा हो चुका था उसकी शादी भी हो गई। एक दिन अमित अपनी दादी के कमरे में गया उसे उसकी दादी की रिपोर्ट मिली, रिपोर्ट में लिखा था कि ज्यादा चीनी खाने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन अमित सोचने लगा की दादी ने तो चीनी कभी खाई नहीं, माँ ने तो कभी चीनी नहीं दी तो दादी को चीनी किसने दी? अमित सोचने लगा, डॉक्टर से जाकर बात करता हु, वही मुझे सब बताएंगे। तभी रास्ते में उसे उसके चाचा मिलते हैं और अमित की मां, सरोज के बारे में उसको बताते हैं कि किस तरह से वह तुम सब का जूठा तुम्हारी दादी को देती और तुम को कहती इसे से प्यार बढ़ेगा ।अमित यह बात सुनकर बहुत दुखी होता है कि माँ ऐसा कैसे कर सकती है? अमित समझ जाता है की हो ना हो, मां ने हीं दादी को चीनी खिलाई होगी, मां इस बात को नहीं कबुल करेगी, मुझे उसे कबूल करवाना होगा और वह घर चला जाता है। अमित घर पर जाता है है और अपनी पत्नी को दादी की थाली देते हुए कहता है की अब से इसी में माँ को खाना देना है लेकिन अमित की पत्नी मीरा बोलती है की इतनी गंदी थाली में में माँ को कैसे कहना दे सकती हु? माँ क्या सोचेगी मेरे बारे में? अमित बोलता है जोभी सोचे तूमे इसी में खाना देना है और है सबका जूठा देना है। मीरा बोलती है यह गलत है,अमित बोलता है में जो कह रहा हु बस उतना करो बाकि सब तुमे बाद में पता चल जाएग, मीरा बोलती है ठीक है। अगले दिन जब सब खाना खा लेते हैं तो अमित अपनी मां को खाने के लिए बुलाता है। मीरा टूटी फूटी थाली में सबका जूठा उसे देती है, सरोज बोलती हैं, तु, मुझे सबका जूठा दे रही है, तुझे शर्म नहीं आती, अभी मैं अपने बेटे से बोलती हूं, सरोज अमित को बुलाती है और बोलती है देख तेरी पत्नी मुझे सब का जूठा खाना खिला रही है । अमित बोलता है, मां आप ने तो कहा था कि सब का जूठा खाने से प्यार बढ़ता है, तो मैं चाहता हूं आप सबका जूठा खाएं इससे आप हम सब को बहुत प्यार करोगी। यह सब सुनकर सरोज चुप हो जाती है उसके पास कोई जवाब नहीं होता और वह खाना छोड़ कर वहां से चली जाती हैं । अब रोज यही होता कितने दिन तक सरोज खाना नहीं खाएगी उसको मजबूरी में वही खाना खाना पड़ता है ।सरोज बहुत रोती सरोज ने अमित को अपने कमरे में बुलाया और कहा मैं जूठा खाना नहीं खा सकती मुझे दिक्कत होती है अपनी पत्नी को मना कर दे। तू तो मेरा अपना बेटा है वह तो पराई है, तु तो समझ अमित कहता है नहीं मां हम चाहते हैं कि तुम हमें बहुत प्यार करो । सरोज बोलती है मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, अमित ने कहा , तुमने अभी कहा ना मीरा को पराई है, तो तुम मीरा को प्यार नहीं करती इसलिए तुम्हें मीरा का जूठा तो खाना ही पड़ेगा । ऐसा रोज होता । एक दिन सरोज की तबीयत बहुत खराब हो गई डॉक्टर घर पर आए, डॉक्टर ने कहा ज्यादा कुछ नहीं हुआ है बस थोड़ी कमजोरी हो गई है । थोड़ा आराम करेंगे तो ठीक हो जाएंगे । इन्हे रोज एक गिलास दूध दिया करो । अमित मीरा से बोलता है की तुम रोज माँ को एक गिलाश दूध दिया करो, मीरा बोलती है ठीक है। अमित रोज दूध में थोड़ा ताकत का पाउडर मिलाता है ।मीरा सरोज को दूध दे देती । एक दिन अमित सरोज के पास गया और कहा मां मीरा जो तुमे दूध देती है, उसमें थोड़ा थोड़ा जहर मिला कर देती है, अब तुम कुछ ही दिनों की मेहमान हो ।यह सुनकर सरोज के होश उड़ जाते हैं और वह चिल्लाने लगती है मीरा, मीरा आती है, सरोज बोलती है तूने मुझे जहर दिया, तु मुझे मरना चाहती हैं । मीरा बोलती नहीं माँ मैंने अपको जहर नहीं दिया मैं तो सिर्फ आपको दूध देती थी । मीरा रोने लगती है। अमित बोलता है नहीं माँ मीरा ने जहर नहीं मिलाया, अमित बोलता है मां कैसा लग रहा है? जब आपको पता चला कि दूध में जहर है तो आपको बहुत तकलीफ हो रही है ना । आपने दादी के दूध में चीनी मिलाई थी ना इसीलिए दादी हमारे बिच नहीं है । सरोज अपनी गलती कबूल करती हैं और सब से माफी मांगती है और बोलती हैं मुझे आप हॉस्पिटल ले चलो नही तो मैं मर जाऊंगी ।अमित बोलता है, माँ तुम्हें कुछ नहीं होगा मैंने उसमें ताकत का पाउडर मिलाया मीरा ने कुछ नहीं मिलाया था मैंने ही पाउडर मिलाकर आपको भेज देता ।सरोज को थोड़ी राहत हुई सरोज ने अपनी गलती की माफी मांगी लेकिन अरविंद, सरोज को माफ नहीं किया और ना ही अमित ने । अब सरोज अकेले ही रहती है उसे कोई मतलब नहीं रखता।
Wednesday, August 7, 2019
जादुई दीवार का कोना (पहला भाग)
यह कहानी एक छोटे से गांव की है । यह गांव इतना गरीब है कि यहां के लोगों के पास खाने के लिए भी पैसे नहीं है । पूरे दिन मेहनत करने पर भरपेट खाना भी नहीं मिलता। सभी गांव वाले बहुत दुखी हो चुके थे । कुछ गांव वालों ने तो भूख के मारे अपना दम तोड़ दिया था । सभी गांव वाले यह देखकर डर गए कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम सब भी एक दिन मर जाएंगे । एक दिन की बात है, गांव में एक बाबा आता है और सभी गांव वालों से वह कुछ खाने को मागता है। गांव वाले बोलते हैं कि बाबा हमारे पास तो खुद खाने को नहीं है हम आपको कहां से दे, बाबा बोलते हैं, बेटा जो भी हो एक टुकड़ा भी होगा तो भी मुझे संतुष्टि होगी। जैसे तैसे करके गांव वालों ने बाबा को खाना खिलाया अगले दिन जब बाबा वापस जाने लगे तो उन्होंने कहा गांव वालो से कहा कि इस गांव में एक ऐसी दीवार है जिसका कोना जादुई है उस दीवार का एक छोटा सा भी टुकड़ा तुम्हारी एक इच्छा पूरी कर सकता हैं, यह सब कह कर बाबा वहां से चले जाते हैं। अगले दिन सभी गांव वाले मिलकर सब के घर के कोने चेक करने लगते हैं, लेकिन कोई जादुई कोना नहीं मिलता । गांव में सब के घर मिट्टी के बने थे, लेकिन एक घर लकड़ी, सूखी पत्तियों से बना था, वह घर धनीराम का था । गांव वालों ने कहा कि चलो धनीराम का घर भी देख लेते हैं । तभी गांव के एक आदमी ने कहा कि धनीराम का घर क्या देखना? उसका घर कहां मिट्टी का बना है, लकड़ी और सूखी पत्तियों से बना है तो उसमें कोना कहां से आएगा यह कहकर सभी गांव वाले हंसने लगे, धनीराम को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी कि वह उसकी गरीबी का मजाक उड़ा रहे हैं। गांव वाले धनीराम के घर मैं जाते हैं और कोने से एक सूखा पत्ता उठाकर अपनी इच्छा प्रकट करते हैं लेकिन कुछ नहीं होता गांव वाले कहते हैं कि मैंने कहा था ना उसके घर में कोना ही नहीं है,तो इच्छा कैसे पूरी होगी धनीराम को यह बात बहुत बुरी लगी क्युकी धनीराम गांव में सबसे गरीब था। कुछ महीनों बाद, कुछ गांव वाले शहर कमाने के लिए चले जाते हैं, धनीराम भी चला जाता है अब गांव की स्थिति काफी बेहतर थी अब सब को पेट भर खाना मिलता क्योंकि सब शहर कमाने चले गए थे इसलिए अब सब के पास पैसा है । धनीराम भी बहुत अच्छा पैसा कमा कर अपने गांव वापस आया और अपना घर बनवाया । गांव वाले जादुई कोने के बारे में भूल चुके थे। एक दिन की बात है धनीराम ने सोचा कि अब तो मेरा घर मिट्टी का बन गया है, तो क्यों ना मैं अपने घर का एक कोने का टुकड़ा लेकर इच्छा पूरी करके देखता हूं । धनीराम ने अपने घर का एक टुकड़ा थोड़ा और इच्छा प्रकट की मुझे ढेर सारा चावल मिल जाए, तभी उसके सामने ढेर सारा चावल आ जाता है, धनीराम यह देख कर बहुत खुश होता है कि सब ने मेरा मजाक उड़ाया था और मेरे घर में ही जादुई कोना है। धनीराम सोचता है कि अब मैं सभी गांव वालों को यह बात बताऊंगा लेकिन फिर वह सोचता है कि मैं क्यों बताऊं सब ने मेरा मजाक उड़ाया था, मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया था तो मैं क्यों बताऊं । अब में इसका पूरा इस्तेमाल करूंगा और इसके बारे में किसी को भी नहीं बताऊंगा । धीरे धीरे धनीराम बहुत अमीर हो गया था गांव वाले उसकी तरक्की को देख कर हैरान थे, की कितनी जल्दी इसने तरक्की करली । गांव में एक छोटा सा परिवार था रामधनी उसकी बीवी और उसका 4 महीने का बेटा, रामधनी बहुत गरीब था और उसे कुछ ही साल हुए थे गांव में आए हुए । एक दिन रामधनी, धनीराम के घर गया और कहा कि मालिक मुझे छोटा-मोटा काम देदो, मैं कुछ भी कर लूंगा धनीराम को अब अपने पैसे पर बहुत घमंड था, उसने कहा कि मैं तुम्हें कोई काम नहीं दूंगा तभी धनीराम की पत्नी बाहर आई और उसने कहा क्यों नहीं इतना सारा काम मुझे अकेले ही करना पड़ता है, अगर यह साथ में करवाएगा तो मुझे आसानी होंगी। धनीराम ने कहा कि जैसे तुम्हारी इच्छा रामधनी को काम पर रख लिया, धनीराम ने सोचा यह तो बेवकूफ है, इसे क्या पता चलेगा कि मेरे घर में जादुई कोना है और यह तो अभी गांव में आया है, तो उसे तो इस बारे में पता भी नहीं है कि गांव में कोई जादुई कोना है । धनीराम उसे काम पर रख लेता है, रामधनी बहुत लगन से सारा काम करता और धनीराम उसे उसकी मेहनत का भी पूरा पैसा नहीं देता लेकिन फिर भी रामधनी खुश था कि वह अपनी बीवी और अपने बच्चे का पेट भर पाता है । कुछ सालों बाद, एक दिन धनीराम अपनी जादुई दीवार का एक कोना लेकर अपनी इच्छा प्रकट करता है, सोने के सिक्के चाहिए और उसके सामने ढेर सारे सोने के सिक्के आ जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिय रामधनी देख लेता है और वह दंग रह जाता है कि यह कैसे हो सकता है? कोई दीवार के टुकड़े से अपनी इच्छा कैसे पूरी कर सकता है। रामधनी समझ नहीं पाता कि यह हो क्या रहा है? तभी धनीराम की नजर रामधनी पर पड़ जाती हैं और वह रामधनी को चिल्लाने लगता है कि तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे कमरे में झाकने की । रामधनी बोलता है, मालिक मैं तो आप को पानी देने आया था, धनीराम पूछता है क्या देखा तूने? रामधनी बोलता है जो जो आपने किया सारा देखा। धनीराम परेशान हो जाता है कि रामधनी अब यह सारी बात गांव में जाकर बता देगा, धनीराम, रामधनी से बोलता है कि यह बात तु गांव में किसी को नहीं बताएगा । रामधनी कहता है लेकिन मालिक अगर हम इस टुकड़े का इस्तेमाल पूरे गांव के लिए करें तो हमारा गांव बहुत आगे बढ़ेगा, धनीराम कहता है, नहीं गांव वालों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया है मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया है उनकी कोई मदद नहीं करूंगा, रामधनी बोलता है आप बहुत गलत कर रहे हैं, मेँ गांव वालों को बताऊंगा और जरूर बताऊंगा, धनीराम बोलता है अगर तूने गांव वालों को बताया तो मैं तेरे बीवी और बच्चों को मार डालूंगा, रामधनी डर जाता ह लेकिन रामधनी बहुत इमानदार होता है वह कहता है मैं तुम्हारी धमकियों से डरने वाला नहीं में जरूर बताऊंगा, रामधनी वहां से चला जाता है, धनीराम को चिंता हो रही थी कि रामधनी ने अगर सबको बता दिया तो गांव वाले तो मेरी जान ही ले लेंगे अब क्या करूं? तभी धनीराम ने सोचा कि इससे पहले रामधनी गांव वालों को पूरी बात बताए, मैं उसके पूरे परिवार को खत्म करवा देता हूं।
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