Tuesday, August 13, 2019

मेरा प्यारा टेडी बियर "मुक्कु" (दूसरा भाग)

काव्या अपने कमरे में चली जाती हैं....  रंजीत मुक्कू को अपने ऑफिस बेग में रख देता है और चला जाता है ।काव्या की मम्मी काव्या के पास जाती है......  बेटा चलो खाना खा लो.......  काव्या....... गुस्से में.......  मुझे नहीं खाना....... काव्या की मम्मी....... बेटा ऐसे नाराज नहीं होते,  शाम को पापा आएंगे और तुम्हारा मुक्कु तुम्हें दे देंगे.......काव्या....... नहीं पापा नहीं देंगे अब मैं अच्छे नंबरों से पास होकर दिखाऊंगी और पापा से कभी बात नहीं करूंगी, उन्होंने मेरा मुक्कु,  मुझ से छीना है,,  मैं उनसे बहुत नाराज हूं। रंजीत अपने ऑफिस पहुंच जाता है,  ऑफिस का पूरा काम खत्म करने के बाद वह घर जाने लगता है,  रंजीत ऑफिस से बाहर निकलता है और अपनी गाड़ी में बैठ कर जाने लगता है, उसे काव्या की बहुत चिंता थी, काव्या की मां ने फोन करके बताया था कि काव्या ने आज पूरे दिन खाना नहीं खाया । रंजीत को काव्या की बहुत चिंता हो रही थी कि,  मेरी बच्ची ने आज पूरे दिन खाना नहीं खाया, वह बहुत तेज  गाड़ी चला रहा था और सोच रहा था,  मैं जाते ही काव्या को उसका मुक्कु दे दूंगा । रंजीत जिस रास्ते से जा रहा होता है उस रास्ते पर एक पुल पड़ता है,  रंजीत इतना  ज्यादा सोच में था कि,  पुल के बगल में लगा बोर्ड नहीं देखा....... बोर्ड पर लिखा था....... पुल टूटने वाला है....... कोई उसका इस्तेमाल ना करें....... लेकिन रंजीत ने बोर्ड नहीं देखा और वह पुल पर गाड़ी लेकर चला जाता है । पुल जोर जोर से हिलने लगता है....... रंजीत समझ नहीं पाता कि यह क्या हो रहा है?  तभी सामने से एक आदमी कहता है....... पीछे जाओ....... तुरंत पीछे जाओ....... पुल टूटा हुआ है....... तुम गाड़ी में से तुरंत निकलो । रंजीत डर जाता है और वह गाड़ी में से निकल कर भागने लगता है, लेकिन इससे पहले वह पुल पार करे,  पुल टूट जाता है और रंजीत नीचे गिर जाता है । रंजीत को काफी चोट आई होती है उसे वह,  आदमी तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाता है। हॉस्पिटल वाले उसके घर पर फोन करते हैं। काव्या और उसकी मम्मी हॉस्पिटल में पहुंचते हैं....... काव्या की मम्मी डॉक्टर से पूछती हैं....... रंजीत कैसा है?  डॉक्टर अफसोस जताते हुए कहते हैं की हम रंजीत को नहीं बचा सके। काव्या की मम्मी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाती.......वह  बेहोश हो जाती है....... कुछ घंटों बाद काव्या की मम्मी को होश आता है,  वह काव्या को पकड़कर बहुत रोती  हैं और बोलती है,  भगवान हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?                                                                                                                                                                                                              कुछ महीनों बाद....... मुक्कू में कुछ बदलाव थे....... मुक्कू बहुत समझदार हो चुका था....... इतना समझदार की काव्या की पढ़ाई में भी उसकी मदद करता और कठिन से कठिन सवाल भी उसे बता देता,  काव्या सोचती कि मुक्कू इतना समझदार कैसे हो गया?  यह तो बिल्कुल पापा जैसा है,  काव्या पढ़ाई में  बहुत तेज होती हैं,  वह अपने स्कूल में टॉप करती हैं,  काव्या की मम्मी बहुत खुश होती हैं,  काव्या अपने पापा की फोटो के पास जाकर बोलती है....... पापा....... देखो मैंने पूरे स्कूल में टॉप किया है....... अब तो आप मुझसे नाराज नहीं होना....... मुक्कु  बोलता है....... नहीं नहीं पापा  नहीं नाराज है....... काव्या बोलती है.......मै  पापा से बात कर रही हु, ना तुम क्यों  बोल रहे हो....... मुक्कु.......  मुझे पता है,  पापा नाराज नहीं है, तुमसे  ,  उन्हें तुम पर गर्व है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      कुछ सालों बाद काव्या अब बड़ी हो चुकी थी। काव्या अपने ही पापा के ऑफिस में मैनेजर की पोस्ट पर थी ,  कामयाब बहुत तेज थी,  सभी कर्मचारी काव्या  की बहुत तारीफ करते हैं कि,  तुम बिल्कुल अपने पापा जैसी हो।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                               एक  दिन की बात है.......काव्या ऑफिस से घर जा रही थी तभी एक बूढ़ा आदमी मिलता है....... बूढ़ा आदमी काव्या से बोलता है....... बेटा तुम मुझे नहीं पहचानती, लेकिन मैं तुम्हें जानता हूं....... काव्या बोलती है कि, आप मुझे कैसे जानते हो?  बूढ़ा आदमी बोलता है कि,  बेटा तुम रंजीत की बेटी होना....... काव्या बोलती है,  हां बिल्कुल सही कहा....... आप मेरे पापा को कैसे जानते हो?  बूढ़ा आदमी बोलता है कि,  मैं तुम्हारे पापा के साथ ही काम करता था.......काव्या कहती  हैं....... अच्छा....... तो आप मेरे पापा के दोस्त हो....... बूढ़ा आदमी कहता  हैं, हां....... काव्या बूढ़े आदमी का नाम पूछती है....... आपका नाम क्या है  अंकल?  वह बोलता है....... सुबोध....... काम्या बोलती है कि, मैं तो आपके बारे में नहीं जानती,  हो सकता है,  मेरी मम्मी जानती हो,  आप मेरे घर चलो। सुबोध बोलता है....... नहीं बेटा....... मैं तुम्हारे साथ घर नहीं चल सकता....... मुझे तुम्हें एक बात बतानी है....... काव्या बोलती हैं कैसी बात?  बेटा तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट नहीं हुआ था, उन्हें जानबूझकर पुल से गिराया गया था,  पुल आधा ही टूटा था, रंजीत पुल के इस बार आ गया था लेकिन उसको किसी ने धक्का दिया। काव्या कहती हैं, अंकल आप यह क्या बोल रहे हो?  सुबोध कहता है,  मैं बिल्कुल सही बोल रहा हूं....... बेटा....... काव्या पूछती हैं, तो आपने उस आदमी को देखा जिसने मेरे पापा को धक्का दिया था....... सुबोध बोलता है, बेटा बहुत अंधेरा था, जिसकी वजह से मैं उसे देख नहीं पाया, लेकिन अगर तुम उसी जगह पर जाओ तो तुम्हें कुछ ना कुछ तो जरूर मिलेगा....... काव्या बोलती है....... अब वहां क्या मिलेगा, वहां से तो सब कुछ हटा दिया गया होगा....... सुबोध बोलता है, बेटा वहां से कुछ भी नहीं हटाया  गया बहुत गहरी खाई थी, इसलिए वहां पर गाड़ी नहीं जा सकी और कर्मचारी भी वहां पर काम करने नहीं गए, इसलिए वहां पर जैसे-का-तैसा पड़ा हुआ है, तुम जाओ तुम्हें कुछ ना कुछ जरूर मिलेगा।                                                                                                                                                                                                                                         अगले दिन ....... काव्या ....... टूटे हुए पुल की जगह पर जाती हैं, मुक्कू को भी साथ में लेकर जाती हैं, वह दोनों ढूंढते हैं कि कुछ मिल जाए, तो हमें शायद पता चल जाए कि किसने पापा को धक्का दिया था?  तभी उन्हें एक पेन मिलता है, बहुत चमकीला था और बहुत महंगा भी, उसमें डायमंड लगे हुए थे। काव्या बोलती हैं ....... अब यही पेन उस आदमी की पहचान करवाएगा, क्योंकि ऐसा पेन कोई अमीर आदमी ही अपने पास रख सकता है,  कोई आम आदमी नहीं, काव्या और मुक्कू वहां से चले जाते हैं।                                                                                                                                                                                                                                                                            अगले दिन ....... मुक्कू ....... काव्या से बोलता है कि ....... चलो बड़े-बड़े सुनार के पास जाते  हैं और उससे पूछते हैं यह पैन किसने खरीदा था?  काव्या कहती हैं ....... मुक्कु .......तुम तो बहुत समझदार हो गए हो .......मुक्कु ....... बिल्कुल सही बोल रहे हो, चलो चलते हैं। काव्या और  मुक्कू बहुत सारी दुकानों पर जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिलती, आखिरकार वह एक दुकान में जाते हैं और दुकानदार उस आदमी का पता दे देता है, काव्या उस पते पर जाती हैं और दरवाजा खटखटाती  हैं, एक बूढ़ा आदमी बाहर आता है और बोलता है ....... बेटा किस से मिलना है?  काव्या सोचती है अगर मैंने पेन दिखाया और यही आदमी हुआ तो, यह तो सतर्क हो जाएगा, काव्या सोचती है अब मैं क्या करूं कैसे पता लगाऊं कि आदमी वही है या नहीं?  काव्या बोलती है ....... अंकल ....... मैं रास्ता भूल गई हूं ....... क्या आप मुझे बता सकते हैं, यह पता कहां पर है,  बूढ़ा आदमी उसे पता बता देता है,  काव्या कहती है ....... अंकल ....... एक गिलास पानी मिलेगा । बूढ़ा आदमी अंदर से पानी लेने जाता है, तभी काव्या घर में चले जाती  हैं, तभी उसकी नजर एक फोटो पर पड़ती हैं और फोटो में वही बूढ़ा आदमी था ये उसकी जवानी की तस्वीर  जब वह जवान था,  उसकी जेब में वही पेन था , काव्या तुरंत उस आदमी की फोटो खींचती हैं, बूढ़ा आदमी आता है, काव्या पानी पीती हैं और वहां से चली जाती हैं। मुक्कु बोलता है ....... अब तो हमें पता चल गया है की, वही आदमी है क्या बोलती है .......काव्या  ....... हां यह तो ठीक है लेकिन उसने धक्का क्यों दिया इसके बारे में पता करना होगा?

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