Wednesday, August 7, 2019

जादुई दीवार का कोना (पहला भाग)

यह कहानी एक छोटे से गांव की है । यह गांव  इतना गरीब है कि यहां के लोगों के पास खाने के लिए भी पैसे नहीं है । पूरे दिन मेहनत करने पर भरपेट खाना भी नहीं मिलता। सभी गांव वाले बहुत दुखी हो चुके  थे । कुछ गांव वालों ने तो भूख के मारे अपना दम तोड़ दिया था । सभी गांव वाले यह देखकर डर गए कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम सब भी एक दिन मर जाएंगे ।                                                                                                                                                                             एक दिन की बात है, गांव में एक बाबा आता है और सभी गांव वालों से वह कुछ खाने को मागता है। गांव वाले बोलते हैं कि बाबा हमारे पास तो खुद खाने को नहीं है हम आपको कहां से दे, बाबा बोलते हैं, बेटा जो भी हो एक टुकड़ा भी होगा तो भी मुझे संतुष्टि होगी। जैसे तैसे करके गांव वालों ने बाबा को खाना खिलाया अगले दिन जब बाबा वापस जाने लगे तो उन्होंने कहा गांव वालो से कहा कि इस गांव में एक ऐसी दीवार है जिसका कोना जादुई है उस दीवार का एक छोटा सा भी टुकड़ा तुम्हारी एक इच्छा  पूरी कर सकता  हैं, यह सब कह कर बाबा वहां से चले जाते हैं।                                                                                                                                                                           अगले दिन सभी गांव वाले मिलकर सब के घर के कोने चेक करने लगते हैं, लेकिन कोई जादुई कोना  नहीं  मिलता । गांव में सब के घर  मिट्टी के बने थे, लेकिन एक घर लकड़ी, सूखी पत्तियों से बना था, वह घर धनीराम का था । गांव वालों ने कहा कि चलो धनीराम का घर भी देख लेते हैं । तभी गांव के एक आदमी ने कहा कि धनीराम का घर क्या देखना? उसका घर कहां मिट्टी का बना है, लकड़ी और सूखी पत्तियों से बना है तो उसमें कोना कहां से आएगा यह कहकर सभी गांव वाले हंसने लगे, धनीराम को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी कि वह  उसकी गरीबी का मजाक उड़ा रहे हैं। गांव  वाले  धनीराम के  घर मैं जाते हैं और कोने  से एक सूखा पत्ता उठाकर अपनी इच्छा प्रकट करते हैं लेकिन कुछ नहीं होता गांव वाले कहते हैं कि मैंने कहा था ना उसके घर में कोना ही नहीं है,तो इच्छा कैसे पूरी होगी धनीराम को यह बात बहुत बुरी लगी क्युकी धनीराम गांव में सबसे गरीब था।                                                                                                                                                                                  कुछ महीनों बाद, कुछ गांव वाले शहर कमाने के लिए चले जाते हैं, धनीराम भी चला जाता है अब गांव की स्थिति काफी बेहतर थी अब  सब को पेट भर खाना मिलता क्योंकि सब शहर कमाने चले गए थे इसलिए अब सब  के पास पैसा है । धनीराम भी बहुत अच्छा पैसा कमा कर अपने गांव वापस आया और अपना घर बनवाया । गांव वाले जादुई कोने के बारे में भूल चुके थे।                                                                                                                                                                                           एक  दिन की बात है धनीराम ने सोचा कि अब तो मेरा घर मिट्टी का बन गया है, तो क्यों ना मैं अपने घर का एक कोने का टुकड़ा लेकर इच्छा पूरी करके देखता हूं । धनीराम ने  अपने घर का एक टुकड़ा थोड़ा और इच्छा प्रकट की  मुझे ढेर सारा चावल मिल जाए,  तभी उसके सामने ढेर सारा चावल आ जाता है, धनीराम यह देख कर बहुत खुश होता है कि सब ने मेरा मजाक उड़ाया था और मेरे घर में ही जादुई कोना है। धनीराम सोचता है कि अब मैं सभी गांव वालों को यह बात बताऊंगा लेकिन फिर वह सोचता है कि मैं क्यों बताऊं सब ने मेरा मजाक उड़ाया था, मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया था तो मैं क्यों बताऊं । अब में इसका पूरा इस्तेमाल करूंगा और इसके बारे में किसी को भी नहीं बताऊंगा । धीरे धीरे धनीराम बहुत अमीर हो गया था गांव वाले उसकी तरक्की को देख कर हैरान थे, की कितनी जल्दी इसने तरक्की करली । गांव में एक छोटा सा परिवार था रामधनी उसकी बीवी और उसका 4 महीने का बेटा, रामधनी बहुत गरीब था और उसे कुछ ही साल हुए थे गांव में आए हुए ।                                                                                                                                                                                                एक  दिन रामधनी, धनीराम के घर गया और कहा कि मालिक मुझे छोटा-मोटा काम देदो, मैं कुछ भी कर लूंगा धनीराम को अब अपने पैसे पर बहुत घमंड था, उसने कहा कि मैं तुम्हें कोई काम नहीं दूंगा तभी धनीराम की पत्नी बाहर आई और उसने कहा क्यों नहीं इतना सारा काम मुझे अकेले ही करना पड़ता है, अगर यह साथ में करवाएगा तो मुझे आसानी होंगी। धनीराम ने कहा कि जैसे तुम्हारी इच्छा रामधनी को काम पर रख लिया, धनीराम ने सोचा यह तो बेवकूफ है, इसे क्या पता चलेगा कि मेरे घर में जादुई कोना है और यह तो अभी गांव में आया है, तो उसे तो इस बारे में पता भी नहीं है कि गांव में कोई जादुई कोना है । धनीराम उसे काम पर रख लेता है, रामधनी बहुत लगन से सारा काम करता और धनीराम उसे उसकी मेहनत का भी पूरा पैसा नहीं देता लेकिन फिर भी रामधनी खुश था कि वह अपनी बीवी और अपने बच्चे का पेट भर पाता है ।                                                                                                                                                                                                           कुछ सालों बाद,  एक दिन धनीराम अपनी जादुई दीवार का एक कोना लेकर अपनी इच्छा प्रकट करता है,  सोने के सिक्के चाहिए और उसके सामने ढेर सारे सोने के सिक्के आ जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिय रामधनी देख लेता है और वह दंग रह जाता है कि यह कैसे हो सकता है? कोई दीवार के टुकड़े से अपनी इच्छा कैसे पूरी कर सकता है। रामधनी समझ नहीं पाता कि यह हो क्या रहा है? तभी  धनीराम की नजर रामधनी पर पड़ जाती हैं और वह रामधनी को चिल्लाने लगता है कि तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे कमरे में झाकने की । रामधनी बोलता  है, मालिक मैं तो आप को पानी देने आया था, धनीराम पूछता है क्या देखा तूने? रामधनी बोलता है जो जो आपने किया सारा देखा। धनीराम परेशान हो जाता है कि रामधनी अब  यह सारी बात गांव में जाकर बता देगा,  धनीराम,  रामधनी से बोलता है कि यह बात तु  गांव में किसी को नहीं बताएगा । रामधनी कहता है लेकिन मालिक अगर हम इस टुकड़े का इस्तेमाल पूरे गांव के लिए करें तो हमारा गांव बहुत आगे बढ़ेगा, धनीराम कहता है,  नहीं गांव वालों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया है मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया है उनकी कोई मदद नहीं करूंगा,  रामधनी बोलता है आप बहुत गलत कर रहे हैं,  मेँ गांव वालों को बताऊंगा और जरूर बताऊंगा,  धनीराम बोलता है अगर तूने गांव वालों को बताया तो मैं तेरे बीवी और बच्चों को मार डालूंगा,  रामधनी डर जाता ह लेकिन रामधनी बहुत इमानदार होता है वह कहता है मैं तुम्हारी  धमकियों से डरने वाला नहीं में जरूर बताऊंगा,  रामधनी वहां से चला जाता है, धनीराम को चिंता हो रही थी कि रामधनी ने अगर सबको बता दिया तो गांव वाले तो मेरी जान ही ले लेंगे अब क्या करूं? तभी धनीराम  ने सोचा कि इससे पहले रामधनी गांव वालों को पूरी बात बताए,  मैं उसके पूरे परिवार को खत्म करवा देता हूं।

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