Friday, August 9, 2019

जादुई दीवार का कोना (दूसरा भाग)

उसी रात धनीराम ने अपने कुछ आदमियों को रामधनी के घर उसे और उसके परिवार को मारने को भेजा  यह बात रामधनी को पता चल चुकी थी । वह उसी रात अपना सब कुछ  छोड़कर वहां से भाग निकला । धनीराम के आदमियों ने उसे देख लिया और रामधनी को बहुत मारा रामधनी जैसे तैसे अपने आपको उनसे बचाया और भाग गया । धनि राम के आदमी उसका पीछा करने लगे,  रामधनी जैसे तैसे करके अपनी बीवी और बच्चों को लेकर भागता रहा भागते भागते वह दूसरे गांव में पहुंच गया,  रामधनी को काफी चोट आई थी। धनीराम के आदमी वहां से वापस चले जाते हैं।  वह उस गांव  में नहीं जा सकते थे क्योंकि उन्हें वहां पकड़ लिया जाता । वह वापस धनीराम के पास जाते हैं और बोलते हैं वह दूसरे गांव में चला गया।                                                                                                                                                                                                                                                                         वहां रामधनी भागता रहता है,  भागते भागते उसकी टक्कर एक आदमी से होती हैं रामधनी वहीं पर बेहोश हो जाता है, आदमी उसे उठाकर अपने घर ले कर जाता है। रामधनी की पत्नी बहुत रोती है, आदमी पूछता है क्या हुआ क्यों रो रही  "हो बहन"  और आपके पति को क्या हुआ है?  इतनी चोट कैसे लगी हैं? रामधनी  की पत्नी सीता बोलती है, कि मुझे कुछ नहीं पता जो भी पता है इन्हें पता है इन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया बस कुछ लोग आए और हमारा पीछा करने लगे और उन्हें काफी पीटा भी लेकिन हम वह  से भाग निकले और इस गांव  में आ गए और आप से मुलाकात हो गई भैया। आपका नाम क्या है?  आदमी बोलता है, मेरा नाम दयाराम है । सीता बोलती है,  भैया आप मेरे पति को बचा लेंगे ना,  बहुत घायल हैं , दयाराम बोलता है तुम फिकर मत करो।                                                                                                                                                                                                        दयाराम, रामधनी का इलाज करवाता है,  2 हफ्ते बाद रामधनी बिल्कुल ठीक हो जाता है। दयाराम,  रामधनी से पूछता है यह सब कैसे हुआ?  रामधनी,  दयाराम का धन्यवाद करता और  बोलता है कि,  भाई मत पूछो नहीं तो तुम भी  मुसीबत में पड़ जाओगे । दयाराम बोलता है,  क्या पता हम उस मुसीबत का मिलकर सामना कर पाए  है, रामधनी,  ठीक है। रामधनी, दयाराम को पूरी बात बताता है, दयाराम, ऐसा  थोड़ी न होता है, कही जादुई दिवार का नाम तो मेने आज  तक नहीं सुना । रामधनी, है पता है इसपर विस्वाश करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन मेने अपनी आखो से देखा है, तभी तो वह लोग मुझे मारना  चाहते है । दयाराम, तो धनीराम चाहता क्या है? रामधनी, वह चाहता है की उस जादुई दीवार का इस्तमाल केवल वही करे और किसी को पता भी न चले,  जब मेने कहा आप गलत कर रहे हो तो उसने मुझे मारने की धमकी दी । दयाराम, ऐसा करते है की तुम्हारे गांव चलते है और सारी  बात गांव वालो को बता देते है । रामधनी , क्या ऐसा करना ठीक होगा,  ऐसा न हो की हमें से कोई भी ना बचे,  दयाराम,  डरो मत में हु तुम्हारे साथ।                                                                                                                                                                                                                                                                       अगले दिन दयाराम और रामधनी बाजार चले जाते है । रामधनी अपने बेटे को भी साथ में लेकर जाता है । घर में सिर्फ सीता और दयाराम की पत्नी किरण है वह दोनों आपस  में बाते कर रही थी,  तभी घर का दरवाजे की खटखटाने की आवाज आए,   सीता बोली अरे इतनी जल्दी बाजार से वह लोग आगए,   सीता दरवाजा खोलती है तो कुछ आदमी घर में घुश जाते है,  वह धनिराम के आदमी थे,  सीता डर  जाती है और बोलती तूम  घर में क्यों घुश रहे हो बहार निकलो,  किरण गुस्से में बोलती है अभी मेरे घर से बहार निकलो,  हो कोन  तुम लोग?  सारे आदमी पूछते है,  रामधनी कहा है,  किरण बोलती है कोन  रामधनी?  ये दयाराम का घर है,  तूम यहाँ चले जाओ,  सारे आदमी बोलते,  हमें पता है,  ये सीता है रामधनी की पत्नी वह सारे सीता से पूछने लगते है ,लेकिन सीता कुछ  भी नहीं बताती सारे उने  बहुत डरते धमकाते है जिसकी वजह से सीता को दिल का दौरा पड  जाता है और उसकी  जान चली जाती है और  किरण बेहोश हो जाती । सारे आदमी वह से चले जाते है ।                                                                                                                                                                                                             कुछ देर बाद रामधनी और दयाराम घर पर आते है और पूरा घर बिखरा हुवा देख कर दंग रह जाते,  की यह क्या हुवा है>   रामधनी अपनी पत्नी को उठाता है लेकिन वह कोई जवाब नहीं देती,  दयाराम किरण को उठाता है,  किरण बेहोश थी उसके ऊपर पानी डालता है तो किरण होश में आती है और रोने लगती है,  दयाराम,  क्या हुआ  है ये सब?  किरण पूरी बात बताती है,  रामधनी, दयाराम से, मेरी सीता तो कुछ बोल नहीं रही है,  दयाराम तुरंत डॉक्टर को बुलाता है और डॉक्टर बोलता है,  रामधनी को,  तुम्हारी बीबी को दिल का दोरा पड़ा था,  इसलिए वह मार गइ है  ।  रामधनी बहुत गुस्से में बोलता है,  धनीराम  तूने  यह  ठीक नहीं किया,  अब में तुझे नहीं छोडूंगा ।

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