Monday, August 12, 2019

मेरा प्यारा टेडी बियर "मुक्कु" (पहला भाग)

इस कहानी की जान काव्या और उसका प्यारा टेडी बियर है । काव्या 6 साल की होने वाली थी । अगले ही दिन उसका जन्मदिन था ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      अगले सुबह काव्या उठती है और अपने माता पिता के पास जाती है और उन्हें गले लगाती हैं । काव्या के पिता रंजीत,  काव्या को कहते हैं,  बेटा बाहर जाओ तुम्हारे लिए एक तोहफा है,  काव्या पूछती है क्या है पापा?  रंजीत,  बाहर जाओ और खुद ही देख लो,  काव्या बाहर जाती है और देखती है कि बाहर एक बड़ा सा बॉक्स रखा हुआ है,  वह बॉक्स के पास जाती है और बॉक्स खोलती है और देखती  हैं कि उसमें छोटा सा सुंदर सा टेडी बेयर है,  काव्या बहुत खुश होती हैं और टेडी बेयर को लेकर अपने पापा के पास जाती है और पापा से कहती हैं , थैंक यू पापा,  यह बहुत प्यारा है, यह मेरा सबसे प्यारा गिफ्ट है, मुझे बहुत पसंद आया,  थैंक यू,  रंजीत बहुत खुश होता है कि उसकी बेटी ने  उसका गिफ्ट पसंद किया। काव्या अपना टेडी बेयर हमेशा अपने पास रखती यहां तक कि वह  उसे अपने बैग में स्कूल ले जाती उसने अपने  टेडी बेयर का नाम भी रखा था मुक्कु, वह  अपने दोस्तों को अपना टेडी बेयर दिखाती है,  सभी दोस्त बोले कितना प्यारा है ऐसा लग रहा है जैसे अभी बोलेगा,  काव्या कहती है,  हां,  मेरे पापा ने दिया है,  बहुत प्यारा है,  इसलिए मैं इसे अपने से दूर नहीं करती हमेशा अपने पास रखती हूं,  काव्या के दोस्त बोलते हैं वह तो दिख रहा है तु  स्कूल भी लेकर आई है।                                                                                                                                                                                                                                                                    काव्या की कुछ हफ्तों की स्कूल की छुट्टियां पड़ी थी,  काव्या ने  अपने पापा से कहा कि पापा हम सब पिकनिक पर जाएंगे। रंजीत कहता है,  ठीक है,  बेटा हम चलेंगे लेकिन अभी नहीं एक-दो दिन बाद काव्या कहती है ठीक है,  लेकिन हम चलेंगे,  रंजीत बोलता हैं बिल्कुल चलेंगे।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        दो  दिन बाद  काव्या अपने पापा और मम्मी के साथ पिकनिक पर जाती  हैं,  वहां पर वह अपने मुक्कु  के साथ खूब मस्ती करती हैं,  तभी अचानक तूफान आ जाता है,  रंजीत काव्या को लेकर तुरंत वहां से भागने लगता है और एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है काव्या का टेडी बियर बाहर ही छूट जाता है, काव्या,  पापा ,  मेरा मुक्कु,   रंजीत बोलता है,  बेटा तूफान चला जाएगा तो हम मुक्कु  को ले लेंगे,  अभी वहां जाना ठीक नहीं है।  तूफान आया था,  बिजली कड़कती है,  बारिश होती है,  कई घंटों तक तूफान रहता है,  काव्य और उसके माता,  पिता तूफान में एक पेड़ के नीचे फस जाते हैं। रंजीत जैसे तैसे करके गाड़ी का इंतजाम करवाता है वहां से तुरंत निकल जाता है। काव्या,   पापा,  मेरा मुक्कु,   रंजीत बोलता है,  बेटा मैं आकर ले जाऊंगा तुम्हारा मुक्कु, अभी  नहीं,  अभी यहां से चलो,  मैं तुम्हें दूसरा टेडी बेयर दिला दूंगा,  काव्या बोलती है,  नहीं मुझे मेरा मुक्कु, ही  चाहिए। रंजीत बोलता है,  ठीक है,  बेटा मैं कल आकर तुम्हारा मुक्कु  ले जाऊंगा तुम अभी यहां से निकलो, सभी वहां से निकल जाते हैं और घर पहुंच जाते हैं।  दो दिन तक लगातार तूफान चलता रहता है, काव्या घर में बहुत रोती हैं कि मेरा मुक्कु  वहां पर मेरे लिए रो रहा होगा। रंजीत,  काव्या के पास जाता है और बोलता है,  बेटा जैसे ही तूफान बंद होगा मैं तुम्हारे  मुक्कु  को  तुरंत जाकर लेकर आऊंगा ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  तीसरे दिन तूफान बंद हो जाता है, काव्या कहती है,  पापा चलो मेरे मुक्कू को लेने, रंजीत काव्य को लेकर पिकनिक वाली जगह पर जाता है टेडी बेयर बुरी तरह से खराब हो चुका था उस पर बिजली गिरी हुई थी उसका ऊपरी हिस्सा यानी सर का हिस्सा आधा हो चुका था। काव्या बहुत रोती है कि मेरा  मुक्कु, मुझे छोड़ कर चला गया,  रंजीत कहता है,  बेटा मत रो, मैं इसे ठीक कर दूंगा,  काव्या कहती है,  सही कह रहे हो पापा,  आप इसे ठीक कर दोगे,  रंजीत,  हां बेटा,  बिल्कुल ठीक कर दूंगा तुम रोओ मत घर चलो ।काव्या घर जाती  हैं , काव्या अपनी मम्मी को पकड कर  बहुत रोती है और बोलती है,  मेरा मुक्कु  बहुत बीमार है। रंजीत जैसे तैसे कर  के टेडी बेयर को ठीक कर देता है और काव्या को दे देता है अब टेडी बेयर पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखने लगा है, काव्या बहुत खुश होती हैं और अपने मुक्कु को  गले से लगाती है। उसी रात काव्या मुक्कू को लेकर सो जाती हैं,  अचानक,  काव्या की नींद खुलती है और वह  देखती है,  मुक्कु उसके पास नहीं है वो कहती है, अरे मेरा मुक्कु, कहां चला गया वह तो मेरे पास ही सोया था,  इधर उधर देखने पर  मुक्कू पास की कुर्सी पर बैठा होता है,  काव्या  कहती है, अरे मुक्कू वहां कैसे चला गया, काव्या,  मुक्कु के पास जाती है,  तो मुक्कू बोलता है,  काव्या डर  जाती है कि,  मुक्कु कैसे बोल सकता है?  मुक्कू बोलता है, काव्या डरो मत उस दिन तूफान की वजह से मेरे अंदर जान आ गई है ।  काव्या बोलती हैं, क्या बात कर रहे हो तुम सही में बोल रहे हो,  मुक्कु, हां, मैं बोल रहा हूं,  तुम को समझ में नहीं आ रहा है,  काव्या मुक्कु को गले लगाती  हैं और बोलती  हैं,  मेरा प्यारा मुक्कू ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             अगले दिन काव्या मुक्कु को लेकर अपने पापा और मम्मी के पास जाती हैं बोलती है,  पापा देखो मुक्कु बात करता है,  रंजीत बोलता है क्या बात कर रही हो बेटा,  कहीं टेडी बेयर बात करता है,  नहीं पापा सही में मुक्कू बात करता है, आप इसे बात करो,  ऐसा थोड़ी होता है बेटा,  नहीं पापा मैं झूठ नहीं बोल रही हूं,  काव्या मुक्कु से कहती है,  कुछ बोलो पापा से, मुक्कु बोलता है,  हेलो पापा,  रंजीत डर जाता है और तुरंत काव्या को अपनी ओर खींच लेता है और मुक्कु को फेंक देता है,  तो मुक्कु  उठ कर आता है और रंजीत के सामने खड़ा हो जाता है,  बोलता है,  पापा  उस दिन तूफान की वजह से मेरे अंदर जान आ  गई, मैं किसी को नुकसान नहीं पहुचाऊंगा,  पापा में  तो आपक प्यारा टेडी बेयर हूं, आप मुझे लेकर आए थे,  आप क्या बोल रहे हो की, में किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाउंगा ,  ये तो मेरा परिवार है। काव्या, यह मेरा सबसे प्यारा दोस्त है रंजीत बोलता है,  ठीक है,  रंजीत ने मुक्कु  को  उठाता है और उससे बातें करने लगता है,  अब काव्या अपना सारा वक्त मुक्त को के साथ ही बिताती जिसकी वजह से वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रही थी।                                                                                                                                                                                                                       एक दिन स्कूल से फोन आता है,  काव्या की मम्मी स्कूल जाती है तो काव्या की टीचर बताती हैं कि काव्या पढ़ने में बहुत कमजोर होती जा रही है,  उसके मार्क्स भी बहुत गंदे आ रहे हैं,  वह पढ़ती नहीं है क्या घर पर?   काव्या की मम्मी सोचने लगती हैं,  हो ना हो,  काव्या पूरा दिन मुक्कू के साथ ही बताती होंगी। काव्या की मम्मी घर जाती हैं और रंजीत को सारी बात बताती है,  रंजीत, मुककु को अपने पास रख लेता है और बोलता है जब तक तुम अच्छे नंबर लेकर नहीं आती मैं तुम्हें मुक्कु नहीं दूंगा,  काव्या बोलती,  नहीं मुझे मेरा मुक्कू चाहिए,  रंजीत बोलता है,  नहीं मैं तुम्हें मुक्कु  नहीं दूंगा,  जब तक तुम अच्छे नंबर लेकर नहीं आती,  काव्या रोने लगती है,  आप बहुत गंदे हो,  आप दोनों लोग बहुत गंदे हो, आपने मुझसे मेरा मुक्कु छीना है, मैं अच्छे नंबर लेकर दिखाऊंगी और आप से मुक्कु ले लूंगी और आप से कभी बात भी नहीं करूंगी।

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