रेनू और गोपाल ट्रेन का इंतजार करते हैं। शाम होने वाली थी । रेनू, गोपाल से बोलती है............ गोपाल, कुछ ही घंटों में ट्रेन आ जाएगी, लेकिन हम ट्रेन में सभी लोगों को समझा तो लेंगे, लेकिन जो छोटे बच्चे हैं वह थोड़ी समझेंगे उनकी नींद अगर खुल गई तो उन्होंने राक्षस को देख लिया तो । गोपाल बोलता है............ तुम फिकर मत करो, मेरे पास कुछ जड़ी बूटियां है जो मैं सभी बच्चों को दे दूंगा वह थोड़ी-थोड़ी खा लेगे । रेनू पूछती है............ कैसी जड़ी बूटी? गोपाल कहता है............ यह जड़ी बूटी खाने से नींद आती है और इससे किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। रेनू पूछती हैं............ तुमको कहां से मिली यह जड़ी-बूटी? गोपाल ने कहा............ मैंने जंगल में ढूंढा तो मुझे यह जड़ी बूटी मिल गई। रेनू बोलती है............ यह तुमने अच्छा किया। आधी रात हो चुकी थी। ट्रेन आकर जंगल में रुक गई, जैसे ही ट्रेन रुकी, रेनू और गोपाल ट्रेन में चढ़ गए और सभी पैसेंजर को सारी बात बताने लगे, सारे पैसेंजर बहुत डरे हुए थे। गोपाल ने कहा............ डरो मत, यह जड़ी-बूटी अपने बच्चो को थोड़ी थोड़ी खिला दो ताकि उन्हें नींद आ जाए। कुछ ही देर में वह राक्षस ट्रेन में आएगा, कोई भी मत उठना, सभी लोग सोए रहना चाहे, कुछ भी हो जाए, सभी पैसेंजर बोलते हैं............ ठीक है, हम तुम्हारी बात जरूर मानेंगे। रेनू, गोपाल ट्रेन से उतर जाते हैं तभी वह देखते हैं कि राक्षस ट्रेन के पास खड़ा है। राक्षस इंतजार कर रहा था कि कोई बच्चा उसे देखें लेकिन कोई भी बच्चा उसे नहीं देख रहा था। वह ट्रेन के अंदर गया लेकिन ट्रेन में सभी लोग सो रहे थे, कोई हलचल नहीं थी। राक्षस ध्यान से हर जगह देखने लगा, सभी बच्चों ने तो नींद की जड़ी-बूटी खाई थी तो वह कहां जगने वाले थे। राक्षस ने थोड़ा इंतजार किया लेकिन कोई नहीं जगा, राक्षस वहां से चला गया और ट्रेन भी चालू हो गई, जैसे ही ट्रेन गई राक्षस जाने लगा। रेनू और गोपाल राक्षस का पीछा करने लगे, थोड़ी दूर जाकर एक छोटी सी कुटिया थी, उस कुटिया में राक्षस चला गया। रेनू और गोपाल कुटिया के बाहर खड़े होकर अंदर देखने लगे, अंदर सभी बच्चे थे, रवि भी लेकिन रेनू बहुत दंग थी कि कोई भी बच्चा उस राक्षस से डर क्यों नहीं रहा? सभी उसे देखकर खुश क्यों हैं? वह समझ नहीं पाती। गोपाल कहता है............ अभी राक्षस बाहर जाएगा तो हम अंदर जा के सभी बच्चों को बचा लेंगे। रेनू बोली............ ठीक है। थोड़ी ही देर में राक्षस बच्चों के लिए खाना लेने बाहर गया, तभी रेनू और गोपाल कुटिया के अंदर गए, रवि भाग कर आया और रेनू को गले लगा लिया। रेनू............ मेरे भाई, तू ठीक है ना, मुझे तेरी बहुत चिंता हो रही थी, राक्षस ने तेरे साथ कुछ किया तो नहीं। रवि बोलता है............ नहीं दीदी, वह तो बहुत अच्छा है। रेनू बोलतीहै............ क्या? अच्छा है, तू कैसी पागलों वाली बातें कर रहा है? रवि............नहीं दीदी मैं सही कह रहा हूं, वह सच में बहुत अच्छा है, वह सभी बच्चों से बहुत प्यार करता है और सबका बहुत ख्याल रखता है । सभी बच्चे बोलते हैं............ हां दीदी, वह राक्षस वह हमारा बहुत ख्याल रखता है । रेनू और गोपाल समझ नहीं पाते की यह हो क्या रहा है? बच्चे बोल क्या रहे हैं? लगता है राक्षस ने इन्हें मोहित कर लिया है। रेनू, रवि से कहती हैं............ मेरे भाई, राक्षस ने तुम लोगों को सम्मोहन में ले रखा है इसलिए तुम लोग ऐसी बातें कर रहे हो । रवि............ नहीं दीदी, ऐसा कुछ भी नहीं है, हमें राक्षस ने कोई सम्मोहन में नहीं किया है। वहां पर सभी बच्चे 4 साल से लेकर 15 साल तक की उम्र के थे। थोड़ी ही देर में राक्षस कुटिया में वापस आ जाता है। राक्षस रेनू और गोपाल को देखकर बहुत गुस्सा करता है। तुम लोग कौन हो ? तुम यहां पर क्या कर रहे हो ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी कुटिया में आने की? तुम लोग अभी और इसी वक्त यहां से चले जाओ, नहीं तो बहुत बुरा होगा, तुम्हारे साथ, तभी रवि बोलता है............ नहीं राक्षस भैया, यह मेरी दीदी है, आप इन्हे कुछ मत करना, मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। राक्षस बोलता है............ ठीक है, लेकिन इन्हें बोलो यह अभी यहां से चले जाए । रेनू बोलती हैं............ नहीं, मैं नहीं जाऊंगी, मैं अपने भाइ को और इन बच्चों को अपने साथ लेकर जाऊंगाी । राक्षस बहुत गुस्से में आ जाता है............ तुम इन्हें नहीं ले जा सकती। रेनू, राक्षस को कहती है कि............ तुमने इन बच्चों को क्यों पकड़ के रखा है? इन मासूम बच्चों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? रेनू बोलती हैं............ मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं, तुम मेरे भाई और इन बच्चों को यहां से जाने दो, उनके मम्मी पापा बहुत दुखी हैं। राक्षस बोलता है............ तो फिर मेरा क्या होगा? मैं फिर से अकेला हो जाऊंगा। रेनू बोलती है............ मतलब, तुम कहना क्या चाहते हो? राक्षस कहता है कि............ हम नो भाई थे । ट्रेन का डिब्बा पलटने से मेरे 8 भाई मर गए लेकिन मैं दुर्भाग्यवश बच गया और एक गड्ढे में जा गिरा। मैं 4 दिनों तक उस गड्ढे में रहा। मैं तो उस गड्ढे से निकल भी नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं सिर्फ 6 साल का था, तभी एक बाबा आए और उन्होंने मुझे वहां से निकाला ।वह बहुत चमत्कारी बाबा थे । उन्होंने मुझे अपनी सारी शक्तियां सिखाई, उन्होंने मुझे कहा था कि अगर तुम अपने भाई की उम्र के लोगों को मेरे पास लेकर आओगे तो मैं उनके अंदर तुम्हारे भाइयों की आत्मा डाल दूंगा, तब तुम उनके साथ खुशी-खुशी रहना। लेकिन, कुछ दिनों में ही चमत्कारी बाबा की मृत्यु हो गई, मैं बहुत रोया कि मैं फिर से अकेला हो गया, लेकिन मेरे पास बाबा की शक्तियां थी, इसलिए जब भी कोई ट्रेन आती और जब भी कोई बच्चा मुझे देखता तो मैं उसे उठा लेता। मेरे भाइयों की आत्मा तो उनमें नहीं आ सकती लेकिन मैं उन्हें अपने भाइयों की तरह ही प्यार करता हूं । रेनू कहती हैं............ मैं तुम्हारी भावनाओं को समझ सकती हूं लेकिन उनके भी माता-पिता -भाई बहन है, वह भी बहुत दुखी होंगे, तुमने क्या यह सब नहीं सोचा? राक्षस बहुत दुखी होता है............ मैंने बहुत गलत किया। रेनू पूछती हैं............ तुम कितने साल के हो। राक्षस कहता हैं............ मैं 14 साल का हूं। रेनू कहती है............ तुम तो मेरे रवि की उम्र के हो, तो तुम भी मेरे भाई हुए। राक्षस ने कहा............ तुमने मुझे अपना भाई कहा। रेनू कहती हैं............ हां, तुम भी मेरे भाई हो, अब तुम्हें किसी भी बच्चे को उठाने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें अपना भाई बनाती हूं, मैं तुम्हें अपने साथ रखूंगी, अब तुम मेरे साथ रहोगे । राक्षस, रेनू को पकड़ के रोने लगता है। राक्षस कहता है............ दीदी लेकिन क्या समाज मुझे अपना पाएगा। रेनू कहती है............ क्यों नहीं? तूने क्या गलत किया है? तुम तो खो गए थे, तुम्हें तो इस दुनिया के बारे में पता भी नहीं है। मैं तुम्हें इंसान बनाऊंगी और बहुत अच्छा इंसान बनाऊंगी और मेरी नानी भी तुम्हें बहुत प्यार करेगी । रवि कहता है........... हां, राक्षस भैया, मेरी नानी भी आपसे बहुत प्यार करेगी। रेनू, राक्षस और सभी बच्चों को लेकर वहां से चले जाती हैं और अपनी नानी के घर पहुंच जाती हैं। रेनू, नानी को पूरी बात के बारे में बताती है। नानी ने राक्षस को गले लगाया हैं। नानी कहती है............ बेटा तुम कोई राक्षस नहीं हो, तुमने अपने आप को राक्षस क्यों समझा? तुम एक बच्चे हो, मेरे रवि की तरह, नानी राक्षस को नहलाती हैं, अच्छे से तैयार करती हैं और वह बिल्कुल एक आम लड़के की तरह दिखने लगता है । नानी कहती है............ देखा अब कोई पहचाने गा भी नहीं तुम्हें कि, तुम कभी राक्षस के रूप में थे, तुम तो इंसान हो । अब तुम मेरे परिवार का एक हिस्सा हो । रेनू नानी से कहती हैं............ नानी इन सभी बच्चों का क्या करें? नानी ने कहा............ हमें इन्हें पुलिस को सौंप देना चाहिए, वह उन्हें उनके घर पहुंचा देंगे नानी और रेनू पुलिस स्टेशन जाते हैं और पुलिस को पूरी घटना के बारे में बताते हैं । नानी राक्षस के बारे में कुछ नहीं बताती। पुलिस सभी बच्चों को उनको उनके मां-बाप को देते हैं। अब रेनू, रवि और राक्षस जिसका नाम नकुल रखा गया सभी लोग नानी के साथ रहते हैं और बहुत खुश रहते हैं । बचपन में ही खो जाने की वजह से नकुल अपने आप को राक्षस समझता था । उसे नहीं पता था कि वह इंसान है और एक छोटा सा बच्चा है।
Wednesday, September 4, 2019
साहसी रेनू और राक्षस (तीसरा भाग)
रेनू और गोपाल ट्रेन का इंतजार करते हैं। शाम होने वाली थी । रेनू, गोपाल से बोलती है............ गोपाल, कुछ ही घंटों में ट्रेन आ जाएगी, लेकिन हम ट्रेन में सभी लोगों को समझा तो लेंगे, लेकिन जो छोटे बच्चे हैं वह थोड़ी समझेंगे उनकी नींद अगर खुल गई तो उन्होंने राक्षस को देख लिया तो । गोपाल बोलता है............ तुम फिकर मत करो, मेरे पास कुछ जड़ी बूटियां है जो मैं सभी बच्चों को दे दूंगा वह थोड़ी-थोड़ी खा लेगे । रेनू पूछती है............ कैसी जड़ी बूटी? गोपाल कहता है............ यह जड़ी बूटी खाने से नींद आती है और इससे किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। रेनू पूछती हैं............ तुमको कहां से मिली यह जड़ी-बूटी? गोपाल ने कहा............ मैंने जंगल में ढूंढा तो मुझे यह जड़ी बूटी मिल गई। रेनू बोलती है............ यह तुमने अच्छा किया। आधी रात हो चुकी थी। ट्रेन आकर जंगल में रुक गई, जैसे ही ट्रेन रुकी, रेनू और गोपाल ट्रेन में चढ़ गए और सभी पैसेंजर को सारी बात बताने लगे, सारे पैसेंजर बहुत डरे हुए थे। गोपाल ने कहा............ डरो मत, यह जड़ी-बूटी अपने बच्चो को थोड़ी थोड़ी खिला दो ताकि उन्हें नींद आ जाए। कुछ ही देर में वह राक्षस ट्रेन में आएगा, कोई भी मत उठना, सभी लोग सोए रहना चाहे, कुछ भी हो जाए, सभी पैसेंजर बोलते हैं............ ठीक है, हम तुम्हारी बात जरूर मानेंगे। रेनू, गोपाल ट्रेन से उतर जाते हैं तभी वह देखते हैं कि राक्षस ट्रेन के पास खड़ा है। राक्षस इंतजार कर रहा था कि कोई बच्चा उसे देखें लेकिन कोई भी बच्चा उसे नहीं देख रहा था। वह ट्रेन के अंदर गया लेकिन ट्रेन में सभी लोग सो रहे थे, कोई हलचल नहीं थी। राक्षस ध्यान से हर जगह देखने लगा, सभी बच्चों ने तो नींद की जड़ी-बूटी खाई थी तो वह कहां जगने वाले थे। राक्षस ने थोड़ा इंतजार किया लेकिन कोई नहीं जगा, राक्षस वहां से चला गया और ट्रेन भी चालू हो गई, जैसे ही ट्रेन गई राक्षस जाने लगा। रेनू और गोपाल राक्षस का पीछा करने लगे, थोड़ी दूर जाकर एक छोटी सी कुटिया थी, उस कुटिया में राक्षस चला गया। रेनू और गोपाल कुटिया के बाहर खड़े होकर अंदर देखने लगे, अंदर सभी बच्चे थे, रवि भी लेकिन रेनू बहुत दंग थी कि कोई भी बच्चा उस राक्षस से डर क्यों नहीं रहा? सभी उसे देखकर खुश क्यों हैं? वह समझ नहीं पाती। गोपाल कहता है............ अभी राक्षस बाहर जाएगा तो हम अंदर जा के सभी बच्चों को बचा लेंगे। रेनू बोली............ ठीक है। थोड़ी ही देर में राक्षस बच्चों के लिए खाना लेने बाहर गया, तभी रेनू और गोपाल कुटिया के अंदर गए, रवि भाग कर आया और रेनू को गले लगा लिया। रेनू............ मेरे भाई, तू ठीक है ना, मुझे तेरी बहुत चिंता हो रही थी, राक्षस ने तेरे साथ कुछ किया तो नहीं। रवि बोलता है............ नहीं दीदी, वह तो बहुत अच्छा है। रेनू बोलतीहै............ क्या? अच्छा है, तू कैसी पागलों वाली बातें कर रहा है? रवि............नहीं दीदी मैं सही कह रहा हूं, वह सच में बहुत अच्छा है, वह सभी बच्चों से बहुत प्यार करता है और सबका बहुत ख्याल रखता है । सभी बच्चे बोलते हैं............ हां दीदी, वह राक्षस वह हमारा बहुत ख्याल रखता है । रेनू और गोपाल समझ नहीं पाते की यह हो क्या रहा है? बच्चे बोल क्या रहे हैं? लगता है राक्षस ने इन्हें मोहित कर लिया है। रेनू, रवि से कहती हैं............ मेरे भाई, राक्षस ने तुम लोगों को सम्मोहन में ले रखा है इसलिए तुम लोग ऐसी बातें कर रहे हो । रवि............ नहीं दीदी, ऐसा कुछ भी नहीं है, हमें राक्षस ने कोई सम्मोहन में नहीं किया है। वहां पर सभी बच्चे 4 साल से लेकर 15 साल तक की उम्र के थे। थोड़ी ही देर में राक्षस कुटिया में वापस आ जाता है। राक्षस रेनू और गोपाल को देखकर बहुत गुस्सा करता है। तुम लोग कौन हो ? तुम यहां पर क्या कर रहे हो ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी कुटिया में आने की? तुम लोग अभी और इसी वक्त यहां से चले जाओ, नहीं तो बहुत बुरा होगा, तुम्हारे साथ, तभी रवि बोलता है............ नहीं राक्षस भैया, यह मेरी दीदी है, आप इन्हे कुछ मत करना, मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। राक्षस बोलता है............ ठीक है, लेकिन इन्हें बोलो यह अभी यहां से चले जाए । रेनू बोलती हैं............ नहीं, मैं नहीं जाऊंगी, मैं अपने भाइ को और इन बच्चों को अपने साथ लेकर जाऊंगाी । राक्षस बहुत गुस्से में आ जाता है............ तुम इन्हें नहीं ले जा सकती। रेनू, राक्षस को कहती है कि............ तुमने इन बच्चों को क्यों पकड़ के रखा है? इन मासूम बच्चों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? रेनू बोलती हैं............ मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं, तुम मेरे भाई और इन बच्चों को यहां से जाने दो, उनके मम्मी पापा बहुत दुखी हैं। राक्षस बोलता है............ तो फिर मेरा क्या होगा? मैं फिर से अकेला हो जाऊंगा। रेनू बोलती है............ मतलब, तुम कहना क्या चाहते हो? राक्षस कहता है कि............ हम नो भाई थे । ट्रेन का डिब्बा पलटने से मेरे 8 भाई मर गए लेकिन मैं दुर्भाग्यवश बच गया और एक गड्ढे में जा गिरा। मैं 4 दिनों तक उस गड्ढे में रहा। मैं तो उस गड्ढे से निकल भी नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं सिर्फ 6 साल का था, तभी एक बाबा आए और उन्होंने मुझे वहां से निकाला ।वह बहुत चमत्कारी बाबा थे । उन्होंने मुझे अपनी सारी शक्तियां सिखाई, उन्होंने मुझे कहा था कि अगर तुम अपने भाई की उम्र के लोगों को मेरे पास लेकर आओगे तो मैं उनके अंदर तुम्हारे भाइयों की आत्मा डाल दूंगा, तब तुम उनके साथ खुशी-खुशी रहना। लेकिन, कुछ दिनों में ही चमत्कारी बाबा की मृत्यु हो गई, मैं बहुत रोया कि मैं फिर से अकेला हो गया, लेकिन मेरे पास बाबा की शक्तियां थी, इसलिए जब भी कोई ट्रेन आती और जब भी कोई बच्चा मुझे देखता तो मैं उसे उठा लेता। मेरे भाइयों की आत्मा तो उनमें नहीं आ सकती लेकिन मैं उन्हें अपने भाइयों की तरह ही प्यार करता हूं । रेनू कहती हैं............ मैं तुम्हारी भावनाओं को समझ सकती हूं लेकिन उनके भी माता-पिता -भाई बहन है, वह भी बहुत दुखी होंगे, तुमने क्या यह सब नहीं सोचा? राक्षस बहुत दुखी होता है............ मैंने बहुत गलत किया। रेनू पूछती हैं............ तुम कितने साल के हो। राक्षस कहता हैं............ मैं 14 साल का हूं। रेनू कहती है............ तुम तो मेरे रवि की उम्र के हो, तो तुम भी मेरे भाई हुए। राक्षस ने कहा............ तुमने मुझे अपना भाई कहा। रेनू कहती हैं............ हां, तुम भी मेरे भाई हो, अब तुम्हें किसी भी बच्चे को उठाने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें अपना भाई बनाती हूं, मैं तुम्हें अपने साथ रखूंगी, अब तुम मेरे साथ रहोगे । राक्षस, रेनू को पकड़ के रोने लगता है। राक्षस कहता है............ दीदी लेकिन क्या समाज मुझे अपना पाएगा। रेनू कहती है............ क्यों नहीं? तूने क्या गलत किया है? तुम तो खो गए थे, तुम्हें तो इस दुनिया के बारे में पता भी नहीं है। मैं तुम्हें इंसान बनाऊंगी और बहुत अच्छा इंसान बनाऊंगी और मेरी नानी भी तुम्हें बहुत प्यार करेगी । रवि कहता है........... हां, राक्षस भैया, मेरी नानी भी आपसे बहुत प्यार करेगी। रेनू, राक्षस और सभी बच्चों को लेकर वहां से चले जाती हैं और अपनी नानी के घर पहुंच जाती हैं। रेनू, नानी को पूरी बात के बारे में बताती है। नानी ने राक्षस को गले लगाया हैं। नानी कहती है............ बेटा तुम कोई राक्षस नहीं हो, तुमने अपने आप को राक्षस क्यों समझा? तुम एक बच्चे हो, मेरे रवि की तरह, नानी राक्षस को नहलाती हैं, अच्छे से तैयार करती हैं और वह बिल्कुल एक आम लड़के की तरह दिखने लगता है । नानी कहती है............ देखा अब कोई पहचाने गा भी नहीं तुम्हें कि, तुम कभी राक्षस के रूप में थे, तुम तो इंसान हो । अब तुम मेरे परिवार का एक हिस्सा हो । रेनू नानी से कहती हैं............ नानी इन सभी बच्चों का क्या करें? नानी ने कहा............ हमें इन्हें पुलिस को सौंप देना चाहिए, वह उन्हें उनके घर पहुंचा देंगे नानी और रेनू पुलिस स्टेशन जाते हैं और पुलिस को पूरी घटना के बारे में बताते हैं । नानी राक्षस के बारे में कुछ नहीं बताती। पुलिस सभी बच्चों को उनको उनके मां-बाप को देते हैं। अब रेनू, रवि और राक्षस जिसका नाम नकुल रखा गया सभी लोग नानी के साथ रहते हैं और बहुत खुश रहते हैं । बचपन में ही खो जाने की वजह से नकुल अपने आप को राक्षस समझता था । उसे नहीं पता था कि वह इंसान है और एक छोटा सा बच्चा है।
Tuesday, September 3, 2019
साहसी रेनू और राक्षस (दूसरा भाग)
रेनू अपनी नानी के पास पहुंच जाती है। नानी दरवाजे पर ही खड़ी थी। वह रेनू को देखकर बहुत खुश हुई। नानी ने रेनू को गले लगाया, नानी इधर-उधर देखने लगी। नानी ने रेनू से पूछा............ रवि कहां है? वह क्यों नहीं दिख रहा? क्या वह तुम्हारे साथ नहीं आया? रेनू जोर-जोर से रोने लगती है। नानी कहती है क्या हुआ? क्यों रो रही हो?क्या बात है? रेनू कल रात की पूरी घटना नानी को बताती है। नानी ने रेनू से कहा कि, जब तुम गांव आने वाले ही थे, तो मुझे फोन क्यों नहीं किया? रेनू ने कहा............ हम आपको बहुत खुश देखना चाहते थे, हमारे आने पर, लेकिन मुझे नहीं पता था कि, ऐसा हो जाएगा। नानी ने कहा............अगर तुमने मुझे फोन किया होता तो ऐसा कुछ भी नहीं होता। रेनू सोच में पड़ जाती है, क्यों नानी आप ऐसा क्यों बोल रहे हो? नानी ने कहा कि............ मुझे पता है कि जिस रास्ते पर ट्रेन रुकी थी, वह रास्ता बहुत खराब है, उस रास्ते पर ट्रेन रूकती ही है, सिग्नल हो, चाहे, ना हो। रेनू कहती है............ ऐसा क्यों नानी? नानी बोलती है............ वहां पर कुछ अजीब है, जो ट्रेन को रोक देता है। रेनू नहीं समझ पाती है, नानी बोलती है............ मैं समझ सकती हूं बेटा, तुम्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा, चलो मैं तुम्हें किसी से मिलाती हूं। रेनू पूछती है ............किससे नानी? नानी, अपने बगल के घर में रेनू को ले जाती है। वहां पर एक औरत थी, जिसका नाम सुशीला था। रेनू, सुशीला को देखती है और नानी से पूछती है............ नानी क्या हुआ है? नानी, रेनू को बताती है कि............ 4 साल पहले यह भी उसी ट्रेन से अपने गांव आ रही थी, अचानक ट्रेन जंगल में रुकी, सुशीला का 4 साल का बेटा था, वह खुशी-खुशी अपने गांव आ रही थी, लगभग रात के 1:00 या 2 :00 बजे होंगे, अचानक एक अजीबो गरीब आदमी आया और उसने सुशीला के बेटे को ले जाने को कहा सुशीला ने बहुत मना किया लेकिन वो नहीं माना और वह सुशीला के बेटे को ले गया, तब से सुशीला की यह हालत है। रेनू पूछती है कि............ नानी वह ऐसा क्यों कर रहा है? उसे इस से क्या मिलेगा? नानी कहती है कि............ जिस बच्चे की नजर उस पर पड़ जाती हैं, वह उसे लेकर ही जाता है और हां वह सिर्फ 1 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चों को ही ले जाता है। रेनू पूछती है............ ऐसा क्यों नानी? नानी ने कहा............ लगभग 10 साल पहले उसी रास्ते से एक ट्रेन जा रही थी । दुर्भाग्यवश ट्रेन का एक डिब्बा पलट गया और उसमें 9 भाई थे, नो के नो भाइयों की उसी वक्त मौत हो गई लेकिन ट्रेन में बैठे किसी भी आदमी को एक खरोच तक नहीं आई। बस अब नो भाइयों की वहीं पर मौत हो गई लेकिन जब उन्हें निकाला गया तो सिर्फ 8 भाई ही मिले नोवा भाई नहीं मिला, वह सभी भाई 4 साल से 15 साल तक की उम्र के थे, वह अपने माता-पिता के साथ अपने घर जा रहे थे । जब से यह घटना घटी हैं तब से ही यह सिलसिला चालू है । अब तक उस सुनसान जगह से 8 बच्चे गायब हो चुके हैं, सब कहते हैं कि वह उन बच्चों को उठाता है जो उन 9 बच्चों की उम्र के थे, अब तक 8 बच्चे उठा चूका है, जैसे ही नोवा बच्चा उठा लेगा, वह वहां से गायब हो जाएगा और हां, रेनू बेटा, हमारा रवि आठवां था। रेनू कहती है............ इसका मतलब, नानी, अब वह नोवा बच्चा उठाएगा, तो वहां से गायब हो जाएगा । रेनू कहती है............मैं ऐसा नहीं होने दूंगी, मैंने रवि से वादा किया है कि, मैं उसे जरूर बचाने आऊंगी। नानी बोलती है............लेकिन बेटा तुम अकेले यह कैसे करोगी? रेनू ने कहा............ नानी मैं अपने भाई को जरूर बचाने जाऊंगी, मैं उसे नहीं खो सकती। नानी ने कहा............ ठीक है, बेटा, तुम जाओ लेकिन तुम्हें आज ही जाना होगा क्योंकि कल ट्रेन आने वाली हैं और तुम्हें वह सब रात को ही मिलेंगे। दिन में वहां कोई जंगल नहीं मिलेगा । वह एक मायावी जगह है इसलिए तुम्हें रात को ही जाना होगा। रेनू ने कहा............ठीक है नानी, मैं रात को ही जाऊंगी। उसी दिन आधी रात को रेनू उसी जगह पर गई और अपने भाई को ढूंढने लगी । रवि कहां हो तुम? मुझे जवाब दो, रवि कुछ बोलो, लेकिन कोई आवाज नहीं आती। अचानक उसे एक आदमी दिखाई पड़ता है, रेनू डर जाती हैं, कहीं यह राक्षस तो नहीं, वह आदमी रेनू की तरफ बढ़ने लगता है, रेनू बहुत घबराई हुई थी। रेनू ने कहा............तुम कौन हो? मैं तुम से नहीं डरती, तुम यहां से चले जाओ, तुम मेरे भाई को मुझे वापस कर दो, तुम यहां से चले जाओ, तभी वह आदमी रेनू के पास आता है, रेनू , उसे देख कर चौक जाती है, वह आदमी कोई और नहीं, गोपाल था। रेनू बोलती हैं............ गोपाल, तुम, तुम यहां पर क्या कर रहे हो? तुमको किसने बताया कि मैं यहां पर हूं? गोपाल बोलता है............ मैं तुम्हारी नानी के घर गया था, तो उन्होंने बताया तुम यहां पर हो, इसलिए मैं तुम्हारी मदद करने आया हूं। रेनू कहती है............ नहीं, तुम यहां से चले जाओ मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से किसी की जान जाए ।गोपाल बोलता है............ नहीं मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगा हम दोनों मिलकर रवि को ढूढेंगे । रेनू जोर-जोर से रोने लगती है, पता नहीं मेरा भाई कहां होगा? रेनू और गोपाल, रवि को ढूंढने लगते हैं, लेकिन उन्हें रवि कहीं नहीं मिलता, दोनों थक जाते हैं और अब तो सुबह भी होने वाली थी । रेनू बहुत परेशान होती हैं कि अब तो सुबह हो चुकी है, वह तो अब बिल्कुल नहीं मिलेंगे, हमें आधी रात का इंतजार करना होगा। लेकिन आज तो ट्रेन भी आने वाली हैं, आज वह राक्षस नोवे बच्चे को उठाएगा। गोपाल कहता है............ नोवा बच्चा, मतलब। रेनू कहती है............ यह बहुत बड़ी कहानी है, मैं तुम्हें बाद में बताऊंगी । रेनू कहती है............अगर राक्षस आज नोवा बच्चा ले गया तो, वह हमेशा के लिए गायब हो जाएगा और मेरा रवि मुझे कभी नहीं मिलेगा। गोपाल कहता है............ हम ऐसा कुछ नहीं होने देंगे, हम इंतजार करेंगे, उस राक्षस का। गोपाल कहता है............ ऐसा करते हैं, जैसे ही ट्रेन आएगी हमें सभी ट्रेन वालों को चौकन्ना करना होगा कि, कोई भी जागे नहीं जितने भी 1 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चे हैं, सभी को छुपा ले अगर कोई बच्चा उसे नहीं देखेगा तो वह किसी को नहीं ले जा पाएगा और हमें और टाइम मिल जाएगा। रेनू कहती है............ तुम बिल्कुल ठीक बोल रहे हो।
Monday, September 2, 2019
साहसी रेनू और राक्षस (पहला भाग)
यह कहानी दो 👬 भाई बहनों की है। रेनू और रवि......दोनों भाई बहन अपनी नानी के साथ रहते हैं क्योंकि, जब वह छोटे थे, तभी उनके माता-पिता गुजर गए, तो उनकी नानी ने उन्हें पाला पोसा। रवि और रेनू अपनी नानी के साथ उनके गांव में रहते हैं। नानी ने रेनू और रवि को बड़े शहर पढ़ने को भेजा हुआ था । कई वर्षों बाद दोनों अपनी नानी से मिलने गांव जाने वाले थे। रेनू बड़ी थी रवि छोटा............आज शाम 6:00 बजे, दोनों की ट्रेन थी, दोनों समय पर रेलवे स्टेशन पहुंच गए और ट्रेन में बैठ गए । नानी के गांव जाने में पूरे 20 घंटे लगते थे । ट्रेन चालू हो चुकी थी, दोनों भाई बहन बहुत खुश थे कि वह नानी के पास जा रहे हैं, इतने सालों बाद, नानी बहुत खुश होगी। सभी ट्रेन में सो जाते हैं। रेनू भी रवि को बोलती है कि तुम भी सो जाओ । रात के लगभग 1:00 बज रहे थे और ट्रेन एक सुनसान रास्ते पर रुक गइ , जहां पर सिर्फ जंगल ही जंगल था। अचानक रवि की नींद खुलती हैं, वह रेनू से कहता है............दीदी ट्रेन जंगल में रुकी है............रेनू बोलती हैं, तू सो जा सिग्नल नहीं होगा इसलिए ट्रेन रुकी होगी अभी ट्रेन थोड़ी देर में चलेगी। लगभग 1 घंटे हो जाते हैं लेकिन ट्रेन नहीं चलती, रवि बोर हो जाता है उसे नींद ही नहीं आ रही थी, वह अपना फोन चलाने लगता है, बाहर इतना अंधेरा था कि कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। रवि ने अपने फोन की टॉर्च जलाइ और बाहर का नजारा देखने लगा, तभी उसे अचानक दो चमकती हुई आंखें दिखी, रवि डर गया । रवि बोलता है............ दीदी उठो बाहर कोई है? रेनू बोली............ तू अभी तक सोया नहीं मैंने तुझे कहा ना तू सो जा तू टॉर्च क्यों जला रहा है? तू सोता क्यों नहीं? रवि बोलता है............नहीं दीदी बाहर कोई था, उसकी आंखें चमक रही थी । रेनू बोलती है............तेरा वेहम होगा, वह जुगनू होंगे, गांव में जुगनू भी होते हैं सो जा, अब सिर्फ 5 घंटे बाकी हैं, नानी का गांव आने में............रवि रेनू सो जाते हैं, लेकिन रवि को बार-बार वही नजर आ रह था । रवि फिर उठता है और उसे फिर से वह दोनों आंखें नजर आती हैं, वह डर जाता है और चिल्लाने लगता है, ट्रेन में लगभग सभी लोग उठ जाते हैं। क्यों चिल्लाया क्या हुआ, सभी लोग रवि से पूछते हैं? रवि बोलता है............बाहर कोई है, ट्रेन में सभी लोग बाहर देखने लगते हैं लेकिन कुछ नहीं होता है। रवि कहता है............नहीं कुछ तो था। सभी रवि को डांटने लगते हैं कि इतनी रात को तुम मोबाइल क्यों चला रहा है, तूने मोबाइल में ही कुछ देखा होगा, तू चुपचाप सो जा । थोड़ी देर में ही ट्रेन चालू हो जाती हैं। ट्रेन में बहुत अंधेरा होता है। रवि को बहुत डर लग रहा था । उसने सोचा क्यों ना मैं लाइटजलालु उसने जैसे ही लाइट जलाई ऊपर कि सीट पर एक अजीबो गरीब आदमी बैठा हुआ था। रवि डर गया और चिल्लाने लगा, सभी ट्रेन वाले फिर से उठ गए। अब क्या हुआ, फिर क्यों चिल्लाया ? रवि बोला............ऊपर कोई बैठा है, बहुत अजीब है और उसकी आंखें बहुत चमक रही हैं। ट्रेन में एक आदमी बोला............तू फिर से चालू हो गया अब तू चिल्लाया तो तुझे में ट्रेन से उतार दूंगा । रेनू बोलती है............नहीं भाई, बच्चा है, डर गया है, माफी मांगती हूं मैं आपसे, रेनू रवि को डाटती है और बोलती है............तू अब सोएगा, मुझे अपना मोबाइल दे, दिन भर मोबाइल चलाता है। रेनू, रवि का मोबाइल ले लेती हैं। रवि को कहां नींद आने वाली थी। वह बहुत डरा हुआ था, उसकी बात पर कोई विश्वास नहीं कर रहा था । रवि ने सोचा, फिर से एक बार बाहर देखूं कोई है तो नहीं, वह देखने लगा तभी नीचे की सीट पर फिर से वही आदमी बैठा था, रवि फिर चिल्लाया। रेनू उठी और बोली............तू फिर चिल्लाने लगा, नहीं दीदी, वहां देखो कोई बैठा है। रेनू ने देखा तो वहां पर सच में कोई बैठा था, रेनू भी डर गई, यह क्या चीज है, यह तो बहुत अजीब है, दिख भी नहीं रहा है, सिर्फ आंखें ही चमक रही है। जिस सीट पर बैठा था, उस पर एक आदमी सोया था। रवि उसे बुलाता है............अंकल उठो, अंकल उठो, आदमी बोलता है............क्या रे तूने तो सबको परेशान कर दिया, क्या हुआ क्यों उठा रहा है, मुझे? अंकल आपके पैर के पास कोई बैठा है............कौन बैठा है मेरे पैर के पास, जैसे ही आदमी ने उठकर देखा एक अजीबो गरीब आदमी उसके पास बैठा था, वह डर गया और चिल्लाने लगा । सभी ट्रेन वाले उठ गए, तभी वह आदमी भी गायब हो गया सभी पूछने लगे क्या हुआ, फिर से लड़का, चिल्लाया क्या? रवि, रेनू और वह आदमी बहुत डरे हुए थे ।आदमी बोला............नहीं नहीं यहां पर सच में कोई था, यह लड़का झूठ नहीं बोल रहा है, सभी ट्रेन वाले डर जाते हैं, बोलते हैं क्या था? रवि कहता है............पता नहीं क्या था? कुछ समझ में नहीं आया बहुत अजीब था उसके पैर नहीं थे। सभी ट्रेन वाले बहुत डरे हुए होते हैं। वह कहते हैं कि चलो पुलिस को फोन करें क्या पता कोई चोर घुस आया हो? रेनू फोन लगाती हैं, लेकिन नेटवर्क नहीं था । सभी लोग फोन लगाने की कोशिश करते हैं लेकिन किसी के भी फोन में नेटवर्क नहीं था। सभी बोलते हैं............एक साथ सब का नेटवर्क कैसे जा सकता है? कुछ तो गड़बड़ है हमें ड्राइवर को यह बात बतानी पड़ेगी, तभी एक आदमी ड्राइवर की ओर जाने लगता है, तभी वह अजीबो गरीब आदमी उसके सामने आ जाता है। इस बार सबने उसे देखा वह एक राक्षस था। सब डर जाते हैं, सब चिल्लाने लगते हैं तुम कौन हो तुम्हें क्या चाहिए? वह रवि की तरफ इशारा करता है। रेनू, रवि को अपनी तरफ खींच लेती हैं, बोलती है............मेरा भाई क्यों? फिर से राक्षस रवि की तरफ इशारा करता है और बोलता है............यह चाहिए, यह लड़का चाहिए............रेनू बोलती है............नहीं मैं अपना भाई तुम्हें नहीं दूंगी। ट्रेन में सभी लोग डरे होते हैं कोई भी ड्राइवर के पास पहुंच नहीं पाता, जो भी कोशिश करता, राक्षस उसे चोट पहुचाता , सभी ट्रेन में थे, कुछ लोग रेनू और रवि की तरफ से थे, तो कुछ लोग यह बोल रहे थे कि क्यों ना तुम इस लड़के को उस राक्षस को दे दो कम से कम हम सबकी जान तो बचेगी? रेनू बोलती है............ तुम लोग क्या कह रहे हो? तुम चाहते हो मैं अपने भाई को इस राक्षस कर दे दूं, मैं ऐसा नहीं करूंगी। सभी ट्रेन वाले बोलते हैं............तो तुम क्या चाहती हो कि एक जान के बदले हजारों जाने चली जाए? रवि बहुत रोता है............दीदी मैं नहीं जाऊंगा इस राक्षस के साथ............रेनू कहती है............मैं तुझे नहीं जाने दूंगी तू डर मत । उसी ट्रैन में एक लड़का था ।गोपाल। गोपाल बोलता है............तुम डरो मत, मैं तुम लोगों के साथ हूं, यह राक्षस तुम्हारा कुछ नहीं करेगा हम रवि को इसे नहीं देंगे। ट्रेन वाले चिल्लाने लगते हैं कि, नहीं इस लड़के को राक्षस को सौंप दो तभी हम लोग बचेंगे। जो भी रवि को बचाने की कोशिश करता, राक्षस उसे घायल करदेता, राक्षस ने किसी को जान से नहीं मारा था, लेकिन कई लोग बहुत गंभीर रूप से घायल थे । ट्रेन में सभी लोग बोलने लगे कि, तुम्हें रवि को राक्षस को देना होगा, नहीं तो इन सब की जान चली जाएगी, इन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत है। रेनू बहुत परेशान हो जाती हैं कि, अब मैं क्या करूं कैसे अपने भाई को बचाऊ । रेनू, रवि से कहती हैं............भाई तुझे अब इस राक्षस के साथ जाना होगा............रवि कहता है............ नहीं दीदी, मैं नहीं जाऊंगा, मुझे बहुत डर लगता है। रेनू रवि को समझाती हैं कि, अगर तुम इसके साथ नहीं गया तो यह सब को मारेगा और अभी तो सब लोग घायल हैं लेकिन क्या पता इनमें से कई लोगों की जान चली जाए, क्या तू यही चाहता है कि, तेरी वजह से हजारों लोगों की जान चली जाए । रवि बोलता है............नहीं दीदी............रेनू कहती है............मेरे भाई, तू इस राक्षस के साथ चला जा, मैं मुझे जरूर बचाने आऊंगी, यह मेरा वादा है············· रवि कहता है............लेकिन यह मुझे खा गया तो............रेनू कहती है............नहीं यह तुम्हें नहीं खाएगा क्योंकि अगर इसे तुम्हें खाना होता तो यह किसी को भी खा सकता था, यह बस तुम्हें अपने साथ ले जाना चाहता है इसने किसी को जान से भी नहीं मारा सिर्फ सब को घायल किया है, तुम इसके साथ जाओ मेरे भाई, मैं तुम्हें जरूर बचाने आऊंगी। रवि, रेनू की बात मान जाता है और उस राक्षस के साथ चला जाता है, रेनू बहुत रोती है और कुछ ही घंटों में नानी का गांव भी आ जाता है।
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