Tuesday, September 3, 2019

साहसी रेनू और राक्षस (दूसरा भाग)


                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 रेनू अपनी  नानी के पास पहुंच जाती है। नानी दरवाजे पर ही खड़ी थी। वह रेनू को देखकर बहुत खुश हुई। नानी ने रेनू को गले लगाया, नानी इधर-उधर देखने लगी। नानी ने रेनू से पूछा............ रवि कहां है? वह क्यों नहीं दिख रहा? क्या वह तुम्हारे साथ नहीं आया?  रेनू जोर-जोर से रोने लगती है। नानी कहती है क्या हुआ? क्यों रो रही हो?क्या बात है?  रेनू कल रात की पूरी घटना नानी को बताती है। नानी ने रेनू से कहा कि, जब तुम गांव आने वाले ही थे, तो मुझे फोन क्यों नहीं किया? रेनू ने कहा............ हम आपको बहुत खुश देखना चाहते थे, हमारे आने पर, लेकिन मुझे नहीं पता था कि, ऐसा हो जाएगा। नानी ने कहा............अगर तुमने मुझे फोन किया होता तो ऐसा कुछ भी नहीं होता। रेनू सोच में पड़ जाती है,  क्यों नानी आप ऐसा क्यों बोल रहे हो?  नानी ने कहा कि............ मुझे पता है कि जिस रास्ते पर ट्रेन रुकी थी, वह रास्ता बहुत खराब है, उस रास्ते पर ट्रेन रूकती ही है, सिग्नल हो,  चाहे,  ना हो। रेनू कहती है............ ऐसा क्यों नानी? नानी  बोलती है............ वहां पर कुछ अजीब है, जो ट्रेन को रोक देता है। रेनू नहीं समझ पाती है, नानी बोलती है............ मैं समझ सकती हूं बेटा,  तुम्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा,  चलो मैं तुम्हें किसी से मिलाती हूं। रेनू पूछती है ............किससे नानी? नानी,  अपने बगल के घर में रेनू को ले जाती है। वहां पर एक औरत थी,  जिसका नाम सुशीला था। रेनू, सुशीला को देखती है और नानी से पूछती है............ नानी क्या हुआ है? नानी,  रेनू को बताती है कि............ 4 साल पहले यह भी उसी ट्रेन से अपने गांव आ रही थी, अचानक ट्रेन जंगल में रुकी, सुशीला का 4 साल का बेटा था, वह खुशी-खुशी अपने  गांव आ रही थी, लगभग रात के 1:00 या 2 :00 बजे होंगे,  अचानक एक अजीबो गरीब आदमी आया और उसने सुशीला के बेटे को ले जाने को कहा सुशीला ने बहुत मना किया लेकिन वो नहीं माना और वह सुशीला के बेटे को ले गया,  तब से सुशीला की यह हालत है। रेनू पूछती है कि............ नानी वह ऐसा क्यों कर रहा है?  उसे इस से क्या मिलेगा?  नानी कहती है कि............ जिस बच्चे की नजर उस पर पड़ जाती हैं, वह उसे लेकर ही जाता है और हां वह सिर्फ 1 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चों को ही ले जाता है। रेनू  पूछती है............ ऐसा क्यों नानी?                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          नानी  ने कहा............ लगभग 10 साल पहले उसी रास्ते से एक ट्रेन जा रही थी । दुर्भाग्यवश ट्रेन का एक डिब्बा पलट गया और उसमें 9 भाई थे, नो के नो भाइयों की उसी वक्त मौत हो गई लेकिन ट्रेन में बैठे किसी भी आदमी को एक खरोच तक नहीं आई। बस अब नो  भाइयों की वहीं पर मौत हो गई लेकिन जब उन्हें निकाला गया तो सिर्फ 8 भाई ही मिले नोवा भाई नहीं मिला,  वह सभी भाई 4 साल से 15 साल तक की उम्र के थे,  वह अपने माता-पिता के साथ अपने घर जा रहे थे । जब से यह घटना घटी हैं तब से ही यह सिलसिला चालू है । अब तक उस सुनसान जगह से 8 बच्चे गायब हो चुके हैं,  सब कहते हैं कि वह उन बच्चों को उठाता है जो उन 9 बच्चों की उम्र के थे, अब तक 8 बच्चे उठा चूका है,  जैसे ही नोवा बच्चा उठा लेगा, वह वहां से गायब हो जाएगा और हां,  रेनू बेटा,  हमारा रवि आठवां था। रेनू कहती है............ इसका मतलब,  नानी,  अब वह नोवा बच्चा उठाएगा, तो वहां से गायब हो जाएगा । रेनू कहती है............मैं ऐसा नहीं होने दूंगी,  मैंने रवि से वादा किया है कि,  मैं उसे जरूर बचाने आऊंगी। नानी बोलती है............लेकिन बेटा तुम अकेले यह कैसे करोगी?  रेनू ने कहा............ नानी मैं अपने भाई को जरूर बचाने जाऊंगी, मैं उसे नहीं खो सकती। नानी ने कहा............ ठीक है,  बेटा,  तुम जाओ लेकिन तुम्हें आज ही जाना होगा क्योंकि कल ट्रेन आने वाली  हैं और तुम्हें वह सब रात को ही मिलेंगे। दिन में वहां कोई जंगल नहीं मिलेगा । वह एक मायावी जगह है इसलिए तुम्हें रात को ही जाना होगा। रेनू ने कहा............ठीक है नानी,  मैं रात को ही जाऊंगी।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                  उसी दिन आधी रात को  रेनू उसी जगह पर गई और अपने भाई को ढूंढने लगी । रवि कहां हो तुम?  मुझे जवाब दो,  रवि कुछ बोलो,  लेकिन कोई आवाज नहीं आती। अचानक उसे एक आदमी दिखाई पड़ता है,  रेनू डर जाती  हैं,  कहीं यह राक्षस तो नहीं,  वह आदमी रेनू की तरफ बढ़ने लगता है,  रेनू बहुत घबराई हुई थी। रेनू ने कहा............तुम कौन हो? मैं तुम से नहीं डरती, तुम यहां से चले जाओ, तुम मेरे भाई को मुझे वापस कर दो,  तुम यहां से चले जाओ,  तभी वह आदमी रेनू के पास आता है, रेनू , उसे देख कर चौक जाती है, वह आदमी कोई और नहीं, गोपाल था।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        रेनू बोलती हैं............ गोपाल,  तुम,  तुम यहां पर क्या कर रहे  हो?  तुमको किसने बताया कि मैं यहां पर हूं?  गोपाल बोलता है............ मैं तुम्हारी नानी के घर गया था, तो उन्होंने बताया तुम  यहां पर हो, इसलिए मैं तुम्हारी मदद करने आया  हूं। रेनू कहती है............ नहीं,  तुम यहां से चले जाओ मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से किसी की जान जाए ।गोपाल बोलता है............ नहीं मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगा हम दोनों मिलकर रवि को ढूढेंगे । रेनू जोर-जोर से रोने लगती है,  पता नहीं मेरा भाई कहां होगा?  रेनू और गोपाल,  रवि को ढूंढने लगते हैं,  लेकिन उन्हें रवि कहीं नहीं मिलता,  दोनों थक जाते हैं और अब तो सुबह भी होने वाली थी । रेनू बहुत परेशान होती हैं कि अब तो सुबह हो चुकी है, वह तो अब बिल्कुल नहीं मिलेंगे, हमें आधी रात का इंतजार करना होगा। लेकिन आज तो ट्रेन भी आने वाली  हैं,  आज वह राक्षस नोवे बच्चे को उठाएगा।  गोपाल कहता है............ नोवा बच्चा,  मतलब। रेनू कहती है............ यह बहुत बड़ी कहानी है, मैं तुम्हें बाद में बताऊंगी । रेनू कहती है............अगर राक्षस आज नोवा बच्चा  ले गया तो,  वह हमेशा के लिए गायब हो जाएगा और मेरा रवि मुझे कभी नहीं मिलेगा। गोपाल कहता है............ हम ऐसा कुछ नहीं होने देंगे, हम इंतजार करेंगे,  उस राक्षस का। गोपाल कहता है............ ऐसा करते हैं, जैसे ही ट्रेन आएगी हमें सभी ट्रेन वालों को चौकन्ना करना होगा कि, कोई भी जागे नहीं जितने भी 1 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चे हैं,  सभी को छुपा ले अगर कोई बच्चा उसे नहीं देखेगा तो वह किसी को नहीं ले जा पाएगा और हमें और टाइम मिल जाएगा। रेनू कहती है............ तुम बिल्कुल  ठीक बोल रहे हो।

1 comment: