Sunday, July 28, 2019

रोशनी (दूसरा भाग)

घर में से एक 7 साल की लड़की निकलती है,  जिसका नाम किरन  है। किरन  बाहर आती हैं, वह  रोशनी को अपने घर के सामने बेहोश  देखती हैं,  किरण अपनी मां को जोर जोर से बुलाने लगती है, मां घर के सामने कोई आंटी सोई हुई है,  उसकी मां तुरंत बाहर आती  हैं और देखती  हैं कि एक औरत घर के सामने बेहोश पड़ी हैं ।वह रोशनी को अंदर लेकर जाती हैं,  उसे पानी पिलाती हैं और पूछती हैं तुम कहां से आई हो और तुम्हें क्या हुआ?  तुम बेहोश कैसे हो गई?  रोशनी बोली,  मैं रास्ता भूल गई हूं मैंने कई दिनों से खाना भी नहीं खाया है। गायत्री  ने तुरंत रोशनी को खाना खिलाया और फिर डॉक्टर को बुलाया, डॉक्टर ने रोशनी का चेकअप किया और कहा,  यह बिल्कुल ठीक है,  खाना ना खाने की वजह से  बहुत कमजोरी आ गई थी ।                                                                                                                                                                               कुछ देर के बाद रोशनी वहां से जाने लगी । गायत्री ने कहा कि, बहन तुम कहां जाओगे? तुम तो रास्ता भूल गई हो,  तुम बताओ तो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूं। रोशनी ने कहा कि मेरा कोई घर नहीं है जहां ठिकाना मिल जाए मैं वहीं रह लूंगी । गायत्री  बोलती है कि नहीं बहन तुम हमारे साथ रहोगी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। रोशनी बोलती हैं कि तुम्हारे घर में किसी को दिक्कत तो नहीं होगी मेरे यहां रहने से। गायत्री  बोलती है,  घर में सिर्फ मैं और मेरी बेटी ही है मेरे पति को गुजरे हुए काफी साल हो गए। रोशनी कहती है, ठीक है मैं यहीं पर रुकूंगी , लेकिन मैं कुछ काम करूंगी । गायत्री  कहती है कि,  मेरे पास तो कुछ ऐसा नहीं है जो मैं तुम्हें काम करने को  दु,  मैं तो दूसरों के घर काम करके अपनी बेटी को पढ़ाती हूं खिलाती हूं। रोशनी  कहती है क्यों क्या तुम पढ़े-लिखे नहींहो । गायत्री ने कहा नहीं मैंने पढ़ाई नहीं की है, गायत्री सबके घर घर जाकर काम करती और कुछ पैसे लेकर आती  हु,  जिससे वह रोशनी और अपनी बेटी का पेट भर पाती  थी। रोशनी से यह सब देखा नहीं जा रहा था।                                                                                                                                                                                                                                                                एक दिन  किरन,  रोशनी को अपने घर के पीछे एक बगीचे में ले गई और कहा कि,  मासी यह  हमारा आम का बगीचा है,  किरन ने  कहा,  अच्छा हां लेकिन यह आम बहुत खराब है बहुत ज्यादा खट्टे हैं इनका कोई काम नहीं। दोनों घर जाते हैं रोशनी, गायत्री  से पूछती हैं कि.  बहन तुम्हारे पास तो इतने सारे आम के पेड़ हैं तो तुम आम क्यों नहीं बेचती  क्यों दूसरों के घर जाकर काम करती हो। गायत्री  बोलती है कि,  बहन वह सभी आम बहुत ज्यादा खट्टे हैं उन्हें कोई नहीं खरीदा एक दो लोग खरीद के लिए जाते हैं तो वह भी वापस  कर जाते हैं कि, तुम्हारे पेड़ के हम बहुत ज्यादा खट्टे हैं उनसे वह कुछ भी नहीं बना पाते इन आमो  का मुझे कोई फायदा नहीं है। रोशनी कहती है जैसा मैं कहूंगी तुम वैसा करोगी। गायत्री बोलती है क्यों नहीं बहन क्या करना है, रोशनी और किरण बगीचे में जाकर दस आम तोड़कर लाती है,  रोशनी उन्हें हल्के गुनगुने नमक वाले पानी में पूरी रात रख देती हैं। गायत्री पूछती है, आप ऐसा क्यों कर रही हो? रोशनी कहती है सुबह पता चल जाएगा ।                                                                                                                                                                                                     अगली सुबह रोशनी ने आमो को देखा, आम तैयार हो चुके थे । गायत्री  ने पूछा कि, बहन ऐसा करने से क्या होगा? तो रौशनी  ने कहा कि अगर हम रात भर आम को नमक के पानी में रखेंगे  तो उसका खट्टापन कम हो जाता है और हम उसका इस्तेमाल आचार, मुरब्बा, खटाई इन सब में कर सकते हैं । गायत्री  ने कहा, यह तो मुझे पता ही नहीं था ।रोशनी ने आम का अचार बनाया और गायत्री से कहा कि तुम इन्हें अपनी जान पहचान के लोगों को बेच के देखो और अगरयह अचार   उन्हें पसंद आएगा तो हम और बनाएंगे इससे हमें पैसे मिलेंगे । गायत्री ने कहा, ठीक है बहन।                                                                                                                                                                       अगले दिन गायत्री  जहां जहां काम करती थी वहां सब को अचार का डिब्बा देकर आई सबको अचार बहुत पसंद आया सब ने गायत्री से कहा कि तुम हमारे लिए और अचार ला सकती हो । गायत्री ने कहा क्यों नहीं? सबने  पूछा कौन से बाजार से लाई हो? गायत्री ने कहा कि यह अचार,  मेरी बहन और मेने मिलकर बनाए हैं। गायत्री घर पर जाती हैं और रोशनी से बोलती है बहन हमारे अचार सब को बहुत पसंद आए उनको और चाहिए।                                                                                                                                                                         अगले दिन रोशनी ने 20 किलो आम तोड़े और उसका अचार बनाया ऐसे करते करते रोशनी का बनाया हुआ अचार मशहूर  हो गया।अब  गायत्री किसी के घर काम नहीं करने जाती ।एक दिन रौशनी ने कहा कि,  क्यों ना हम एक छोटी सी दुकान खोले  जिसमें हम आम का अचार बनाने के लिए लोगों को रखें जिससे हम ज्यादा अचार बना सकेंगे  और हम ज्यादा बेच  पाएंगे इससे हमारी कमाई भी अच्छी होगी। गायत्री ने कहा जैसा आप समझो बहन रोशनी नए कर्मचारियों को रखा और अचार बनाने का काम चालू कर दिया,  रोशनी को यहाँ रहते हुए 5 साल हो चुके थे। किरन  अब 12 साल की हो गई थी, किरन  भी सबके साथ मिलकर मदद कर ती  और अपनी पढ़ाई भी। गायत्री ने रौशनी से कहा कि यह सब आप की देन है, अगर आप उस दिन हमारे घर के सामने नहीं मिलती तो आज भी में लोगों के घरों में काम करती। रौशनी  ने कहा यह तुम्हारे नसीब में था इसलिए तुम्हें मिला मैं नहीं तो भी तुम्हें मिलता ।गायत्री ने कहा यह तो आपका बडकप्पन  है । गायत्री अब बहुत बड़ी कंपनी की मालकिन बन चुकी थी । गायत्री,  रोशनी की बहुत इज्जत करती और किरन  रोशनी से बहुत प्यार।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           एक दिन रोशनी ने कहा,  गायत्री क्यों ना हम और कर्मचारियों को भर्ती करें जो लोग बेरोजगार हैं,  हम उन्हें काम देंगे तो हमें दुआएं मिलेंगी ।गायत्री ने कहा बिल्कुल सही कहा आपने हम कल ही गांव के आसपास  अपनी कंपनी का पोस्टर लगवा देते हैं ताकि लोगों को पता चले और लोग हमारे पास काम लेने आए हैं।                                                                                                                                                                                    वहां रोशनी के घर पर उसके भाई बहनों ने अपना सब कुछ गंवा दिया था उन्होंने कोई काम नहीं किया जितना भी पैसा था उन्होंने ऐसो आराम में उड़ा दिया ।अब राधा और रानी की नौकरी भी नहीं रही क्योंकि वह लोग घर पर बैठी थी अब उन्हें कोई नौकरी नहीं देना चाहता था ।कमल और रवि को भी कोई नौकरी नहीं देना चाहता था क्योंकि उन्होंने कहीं पर भी काम नहीं किया था इसलिए उन्हें कोई काम पर नहीं रखना चाहता था। चारों भाई बहन बहुत परेशान थे राधा और रानी  के पति वैसे भी काम नहीं करते थे ।सब ने सब कुछ खत्म कर दिया था सभी पैसे खत्म हो चुके थे। बस घर था वह भी गिरवी ।                                                                                                                                                                                                                  एक दिन की बात है कमल कहीं से आ रहा था और उसकी नजर उस पोस्टर पर पड़ी उसने सोचा क्यों ना मैं यहां पर जाकर काम करूं। वह घर पर गया और उसने यह बात सबको बताएं सभी भाई-बहनों ने  कहा क्यों नहीं? हम सब मिलकर   काम करेंगे तो,  कम से कम हमें खाने पीने  की दिक्कत तो नहीं होगी। चारों भाई बहन और राधा रानी के पति उस पोस्टर के  लिखे हुए पते पर पहुंच गए ।कमल ने वहां के कर्मचारी से पूछा कि तुम्हारी मालकिन कहां है, उसने कहा हमारी मालकिन वहां खड़ी  हैं। कमल ने गायत्री  से हाथ जोड़कर कहा कि हमें नौकरी चाहिए हम बहुत परेशान हैं हम लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं है मेरा बहुत बड़ा परिवार है। गायत्री,  हमने यह पोस्टर इसलिए लगाया था कि सभी लोगों को काम मिल सके सभी लोग अपना और अपने परिवार का पेट भर सके,  कमल ने  गायत्री के पैर पकड़े और कहा कि बहन आप जैसे लोग दुनिया में कहां मिलते हैं। गायत्री ने कहा यह सब मैंने नहीं किया यह मेरी बहन ने किया है ।अगर शुक्रिया करना है तो उसका जाकर करो ।कमल ने कहा कि वह कहां मिलेंगी ।  गायत्री बोली वहां देखो वहां पर खड़ी है मेरी बहन,  कमल और सारे भाई बहन जाकर रोशनी का पैर पकड़ कर उसका धन्यवाद करने लगे कि आपकी वजह से हमें यह काम मिला नहीं तो  हम लोग तो भूखे ही मर रहे थे,  हमारे पास कुछ भी नहीं है हम बहुत दूर से आए हैं। रोशनी को  आवाजे जानी पहचानी लग रही थी उसने सोचा आखिर यह लोग हैं कौन?  कमल जैसे खड़ा हुआ और उसने रोशनी को देखा, वह  दंग रह गया उसने कहा,   दीदी आप हमें छोड़ कर कहां चले गए थे।                                                                                                                                                                                                                                                      किरन ने  सब बातें सुन ली उसने जाकर तुरंत अपनी मां से कहा कि मां वह सब तो रोशनी मौसी को जानते हैं ।गायत्री आई और गायत्री ने रोशनी से पूछा बहन, आप इन सब को जानती हो उसने कहा कि हां यह सारे मेरे भाई बहन हैं,  गायत्री ने कहा लेकिन आपने तो कहा था आपका कोई नहीं, रोशनी ने कहा इन लोगों के लिए मैं मर चुकी थी। गायत्री को यह  बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और उसने उन सब को वहां से निकलने को कहा सारे भाई बहन रोशनी से अपनी गलतियों की माफी मांगने लगे रोशनी को अपने साथ ले जाने को कहा। गायत्री ने कहा कि कहीं नहीं जाएंगे यह हमारे साथ ही रहेंगे तब तुम कहां थे जब तुमने उनको दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया था और ढूंढने की कोशिश भी नहीं की । जब तुम्हारे पास पैसा नहीं बचा तब तुम आए और फिर ले जाकर फिर इनको धक्का मार के घर से निकालना चाहोगे। मैं अपनी रोशनी को कहीं नहीं जाने दूंगी तुम लोग यहां से जा सकते हो ।   आखिरकार वह सब रोशनी के भाई बहन थे रोशनी ने उन्हें माफ कर दिया,  लेकिन रोशनी उनके साथ नहीं गई सभी भाई-बहन निराश होकर चले गए । सभी भाई बहनो को अपनी गलती का एहसास हुआ।,,,,,,,,कहानी समाप्त 

Saturday, July 27, 2019

रोशनी पहला भाग)

एक छोटे से गांव में एक सुखी परिवार रहता था । रतन सुखियां और उनके पांच  बच्चे, रोशनी(15 वर्ष ),रानी(12 वर्ष ) और राधा(10 वर्ष )  तीन बेटियां, कमल(8 वर्ष ), रवि(6 वर्ष ) दो  बेटे। रतन गांव में एक पोस्टमैन था। एक दिन की बात है रतन को उसके ऑफिस से लेटर आता है, उसमें लिखा था कि रतन की पोस्टिंग बड़े शहर में हो गई है और सैलरी भी ज्यादा मिलेगी यह बात सुनकर सब बहुत खुश हैं लेकिन रतन अपने परिवार को छोड़कर नहीं जाना चाहता था।                                                                                                                                                                                                                                           रतन:-  मैं खुश तो हूं लेकिन मैं तुम सबको छोड़कर नहीं जाना चाहता,  मैं क्या करूं नहीं समझ में आ रहा?                                                                                                                                                                          सुखियां:-  आप इतना क्यों सोच रहे हो? इतना अच्छा मौका मिला है आपको जाना चाहिए, मैं यहां पर                                     ख्याल रख लूंगी, आप अगर बड़े शहर में जाएंगे तो हमारे बच्चों का भविष्य बहुत अच्छा होगा।                                                                                                                                                                           रतन :-    तुम ठीक कह रही हो सुखिया,  मैं जाऊंगा अपने बच्चों के लिए।                                                                                                                                                                                                                               कुछ दिन बाद रतन बड़े शहर जाने के लिए तैयार हो गया सबकी आंखों में आंसू थे। रतन  ने अपने बच्चों को गले लगाया और कहा मां का ख्याल रखना सभी बोले, हां पापा, हम माँ का ख्याल रखेंगे।   रतन अपने नए ऑफिस पहुंच जाता है। वहां पर उसे रहने को घर,खाना सब कुछ था । रतन इमानदारी से अपना काम करता, सभी बड़े साहेब रतन से बहुत खुश रहते। रतन हर महीने अपने गांव चिट्ठी भेजता वह बहुत खुश था कि वह अपने परिवार की हर जरूरत पूरी कर पा रहा है। रतन को 2 साल हो गए थे यहां पर आए हुए आज रतन अपने गांव जाने वाला है।   सुखिया और सभी बच्चे बहुत खुश थे कि आज पापा आने वाले हैं। कुछ ही देर में रतन अपने घर पर आ जाता है और सबके लिए बहुत अच्छे तोफे भी लेकर आया ।सब बहुत खुश हैं लेकिन रतन को कुछ ही हफ्तों में अपने काम पर वापस जाना था ।                                                                                                                                                                                  रवि :- पापा कुछ दिन और रुक जाओ ।                                                                                                                                                                                                                                                                       रतन :-  नहीं बेटा काम पर जाना जरूरी है।                                                                                                                                                                                                                                                                       रोशनी:-  कुछ दिन और रुक जाते "पापा" तो बहुत अच्छा होता ।                                                                                                                                                                                                                               रतन :-   मैं भी रुकना चाहता हूं लेकिन काम पर भी जाना बहुत जरूरी है, मुझे सिर्फ 3 हफ्तों की छुट्टी मिली थी अब मुझे जाना होगा ।                                                                                                                                                                                                अगले दिन रतन अपने ऑफिस को निकल गया। सबने रतन को खुशी खुशी विदा किया। रतन अपने शहर पहुंच चुका था ।अगले दिन से वह अपने काम पर पहुंच गया और मन लगाकर काम करने लगा। 3 साल हो चुके थे रतन अपने गांव नहीं गया वह रोज चिट्ठी भेजता। सभी पूछते कि गांव कब आओगे? रतन बोला छुट्टी नहीं मिल रही है । एक  साल बाद रतन के ऑफिस से खत आया खत में लिखा था रतन बहुत बीमार है यह बात सुनकर सुखिया और उसका परिवार बहुत परेशान हो गए और अगले ही दिन सुखिया रतन से मिलने शहर चली गई सुखिया शहर पहुंच गई थी रतन हॉस्पिटल में भर्ती था सुखिया रतन से मिलने हॉस्पिटल गए  ।                                                                                                                                                                                                                                  रतन :-  तुम बच्चों को छोड़कर क्यों आए?  मैं तो ठीक था मुझे ज्यादा कुछ नहीं हुआ है।                                                                                                                                                                                                        सुखिया:-  हम सबको तुम्हारी चिंता हो रही थी इसलिए मैं तुम्हें देखने आ गए,  तुम जब तक ठीक नहीं हो जाते                       मैं यही रहूंगी ।                                                                                                                             रतन :-  नहीं,,,,,,,नहीं,,,,,, नहीं,,,,, तुम्हें बच्चों के पास रहना चाहिए।                                                                                                                                                                                                                               सुखियां :-   रोशनी सब का ख्याल रख लेगी अब रोशनी बड़ी हो गई है।                                                                                                                                                                                                                                रतन:-   हां पता है लेकिन फिर भी।                                                                                                              सुखिया :-   मैं अभी नहीं जाऊंगी जब तक आप ठीक नहीं हो जाओगे, आप कितना भी बोलो,  रतन,  ठीक है ।                                                                                                                                                                          कुछ दिनों में रतन हॉस्पिटल से घर आ गया अब वह ठीक था। सुखिया उस  का बहुत ख्याल रखती ।अगले दिन से ही रतन अपने ऑफिस जाने लगा सुखिया ने मना किया लेकिन वह बोला मैं अब ठीक हूं तुम घर जाओ। सुखिया कुछ दिन और रुकी और फिर अपने गांव चली गई ।  सुखियां अपने गांव पहुंच गए। रोशनी, राधा, रानी, मां पापा कैसे हैं? सुखिया ठीक है तुम्हारे पापा,  अब तो वे काम पर भी जाने लगे हैं, इसलिए मैं आ गई ।                                                                                                                                                                         6 महीने बाद रतन के ऑफिस से खत आया । सुखिया ने जैसे ही खत खोलकर पड़ा वह बेहोश हो गई सभी बच्चे चिल्लाने लगे मां क्या हुआ?  बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी वहां पर आ गए लोगों ने पूछा क्या हुआ? रोशनी ने चिट्ठी को पढ़ा और रोने लगी उसने ने कहा कि अब पापा नहीं रहे, सभी बहुत दुखी हुए सुखिया को थोड़ी देर में होश आ गया सब बेहाल थे ।इतना बड़ा सदमा झेल नहीं पा रहे थे। यह कैसे हो गया पापा तो ठीक थे? फिर कैसे हो गया? अगले दिन सुखिया और रोशनी रतन के शहर गए । रतन का अंतिम संस्कार हो चुका था। सुखियां और रोशनी रतन से आखरी बार मिल भी नहीं पाए वह दोनों एक दूसरे को पकड़कर बहुत रोए और रतन का सारा सामान लेकर गांव को चले गए। सुखिया बहुत परेशान रहती कि अब मैं क्या करूं? मैं तो ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हूं कि मुझे कोई अच्छा काम मिल जाए। रतन  कुछ पैसे छोड़ कर गया था उन पैसों से कुछ महीने तो घर चला लेकिन उसके बाद सुखिया को खेतों में जाकर काम करना पड़ा ।                                                                                                                                                                                                                      रोशनी:-   मां मैं भी तुम्हारे साथ कल से खेत में चलूंगी आप अकेले ही घर को संभालती हैं मैं भी अब से साथ में चलूंगी।                                                                                                                                                     सुखिया:-   नहीं तुम नहीं चलोगी तुम्हें घर देखना है और अपनी पढ़ाई पूरी करनी है ।तुम्हारे पापा कभी भी अपने बच्चों से काम नहीं करवाते तो मैं कैसे करवा लूं?                                                                                                                                                                                                                                                 रोशनी :- मां मैं पढ़ाई भी करूंगी और आपके साथ काम भी मैं दोनों कर सकती हूं आप बस मुझे साथ में चलने को कहो  हम दोनों मिलकर करेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा ।कुछ महीनों में मेरी पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी।                                                                                                                                                                           सुखियां :- ठीक है बेटा,  चलो लेकिन तुम्हें अच्छे नंबरों से भी पास होना है। ठीक है मां  ।                                                                                                                                                                                                                                              एक दिन  की बात है रतन के ऑफिस से एक खत आया ।खत में लिखा था कि रतन की जगह उसके घर के किसी एक सदस्य को नौकरी मिल जाएगी। खत पढ़कर सुखिया बहुत खुश हूंइ । अगले दिन वह रोशनी को लेकर रतन के शहर उसके ऑफिस गए। वहां पर उसने बड़े साहब को खत दिखाया और कहा कि साहब आपने कहा था कि किसी एक को नौकरी मिलेगी । मेरी बेटी पढ़ी लिखी है यह नौकरी इसे ही मिलनी चाहिए । बड़े साहब बोले नहीं यहां पर औरतें काम नहीं कर सकती ।                                                                                                                                                                                                                          सुखिया:-  क्यों नहीं? मेरी बेटी बहुत अच्छी है बहुत समझदार है और अच्छे नंबरों से  पास भी हुई है तो उसे क्यों नहीं मिल सकती नौकरी?                                                                                                                                                                 बड़े साहब ने कहा कि यहां पर औरतें काम नहीं करती है।  सुखियां बोली यह तो गलत बात है। मेरा बेटा बहुत छोटा है जब तक वह बड़ा नहीं हो जाता तब तक तो रोशनी को काम पर रख लो लेकिन बड़े साहब नहीं माने ।रोशनी और सुखिया गांव वापस चले जाते हैं। सुखिया बहुत दुखी थी कि वह ऐसा कैसे कर सकते हैं?  रोशनी ने कहा कि मां हमें फिर से वहां जाना चाहिए और वहां के कर्मचारियों से बात करनी चाहिए क्या पता वह हमारा साथ दें?  सुखिया ने कहा हां बेटा तुम्हारे पिताजी को सब बहुत अच्छे से जानते थे शायद हमें कुछ मदद मिल जाए।                                                                                                                                                                          अगले दिन रोशनी और सुखियां शहर को जाते हैं और सभी कर्मचारियों से बात करते हैं सारे कर्मचारी बोलते हैं कि,  बड़े साहब ऐसा कैसे कर सकते हैं?  जब उनका बड़ा बेटा नहीं है तो बड़ी बेटी ही यह नौकरी करेगी हम बड़े साहब से बात करेंगे,  सभी कर्मचारी बड़े साहब के पास जाते हैं और बोलते हैं कि, आप को रोशनी को नौकरी देनी ही पड़ेगी ।हमें कोई आपत्ति नहीं है कि हमारे बीच में कोई महिला काम करें ।बड़े साहब बोले कि,  नहीं ऐसा नहीं हो सकता। सभी कर्मचारियों ने बड़े साहब से कहा कि अगर आपने ऐसा नहीं किया तो हम लोग हड़ताल पर बैठ जाएंगे ।बड़े साहब डर गए और उन्होंने रोशनी को नौकरी दे दी । सुखिया ने बोला साहब क्या रोशनी मेरे गांव में यह नौकरी कर सकती है। बड़े साहब ने कहा नहीं इतनी जल्दी तबादला नहीं हो सकता यहां पर 3 साल तो नौकरी करनी ही पड़ेगी। सुखिया  परेशान थी कि मेरी बेटी अकेले कैसे रहेगी?  रोशनी,  मां आप चिंता मत करो मैं अपना ख्याल रख लूंगी आप घर जाओ और मेरे भाइयों और बहनों का ख्याल रखो अब आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं मैं अपने भाई बहनों को बहुत काबिल  बनाऊंगी ।                                                                                                                                                                                   रोशनी अपना काम मन लगा कर करती । उसका काम देखकर बड़े साहब बहुत खुश हुए । रोशनी को काम करते हुए 3 साल हो चुके थे, साहब ने उसका तबादला उसके गांव में कर दिया और साथ ही साथ उसे उस पोस्ट ऑफिस का मैनेजर भी बना दिया। रोशनी बहुत खुश थी। वह अगले दिन अपने गांव चली गई सुखिया रोशनी को देखकर बहुत खुश हुई । तभी राधा, कमल, रवि  और रानी रोशनी को गले लगाते  है और बोलते  है , दीदी  मै  और रानी अद्यापिका बन गए है, कमल और रवि बोलते है हम भी कुछ  महीनो में डॉक्टर और वकील बन जाएगे  दीदी,  रोशनी बहुत  खुश होती है।                                                                                                                                                                                                                                                       सुखियां :-  रोशनी बेटा अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए,  तुम्हारे लिए बहुत रिश्ते आते हैं तुम कहो तो मैं बात करूं। तुम्हारी शादी हो जाएगी तो राधा, रानी की शादी की बात चलाएंगे ।                                                                                                                                                                                                                     रोशनी:-  नहीं मां,  मैं अभी शादी नहीं करूंगी,  पहले कमल और रवि  अपनी पढ़ाई पूरी  कर ले ।तब शादी करूंगी ।                                                                                                                                               सुखिया:-  कैसी बात कर रही हो बेटा?  तुम्हारी उम्र हो गई है शादी की,  तुम शादी कर लो वह दोनों तो पढ़ने में बहुत अच्छे हैं,रोशनी नहीं मां मैं अभी शादी नहीं करूंगी,  सुखिया जैसी तुम्हारी मर्जी बेटा अभी नहीं तो कुछ महीने बाद सही ।                                                                                                                                                                                                     "कुछ महीने बाद" कमल और रवि ने डॉक्टर और वकील की डिग्री प्राप्त करली  थी, वह बहुत अच्छे नंबरों से पास हुए, रोशनी बहुत खुश थी ।सुखिया बोली बेटा अब तो तुम शादी करोगी ना,  रोशनी बोली,  नहीं मैं अभी नहीं । पहले कमल और रवि को कहीं अच्छा काम मिल जाए ।सुखिया बोली बेटा उसे तो अच्छा काम मिल ही जाएगा आखिरकार दोनों के पास डॉक्टर वकील की डिग्री है । हां पता है मां मुझे,  मिल जाएगा काम तो मैं शादी कर लूंगी।                                                                                                                                                                                 "कुछ  साल बाद"  रोशनी ने बहुत तरक्की कर ली थी अब रोशनी उस गांव के साथ-साथ आसपास के  गांव के पोस्ट ऑफिस की प्रमुख अध्यक्ष थी  ।                                                                                                                                                                        सुखियां अब हमेशा बीमार रहती,  रोशनी उसका बहुत ख्याल रखती । सुखिया ने बोला बेटा रोशनी मेरे जाने के बाद तुम अपने भाई बहनों का ख्याल रखना, वह  अभी नासमझ है। रोशनी ने कहां,  हां माँ,  मैं अपने भाई बहनों का ख्याल रखूगी । इतना कहते ही सुखिया ने  अपना दम तोड़ दिया,  सभी भाई बहन बहुत रोए ।रोशनी  ने शादी नहीं की कि, वह अपने भाई-बहनों को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। राधा और रानी ने कहा भी कि दीदी आप शादी कर लो,  लेकिन रोशनी ने कहा,  नहीं मैं तुम लोगों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी।                                                                                                                                                                                                                                              कुछ महीनों में रोशनी ने राधा और रानी की शादी कर दी और लड़कों से यह प्रस्ताव रखा कि वह लोग हमारे साथ ही रहेंगे लड़के वाले मान गए और यह सब रोशनी के घर में ही रहने लगे ।कमल और रवि को अभी तक कोई काम नहीं मिला था। वह दोनों काम भी नहीं करना चाहते थे,  क्योंकि उनके मन में यह था कि जब इतना पैसा है हमारे पास तो हम काम क्यों करें? जब जरूरत होगी तो देखेंगे।                                                                                                                                                                                                                                                             कुछ महीनों बाद रोशनी ने  कमल और रवि की भी शादी कर दी रोशनी बहुत अच्छा कमाती थी । इसलिए वह अपने पूरे परिवार का ख्याल रख पाती, वह  हमेशा कमल  और रवि को काम करने को बोलती तो कमल, रवि  बोलते,  दीदी आप हमें पैसे दे दो हम अपना अपना काम खोल लेंगे ।रोशनी ने कहा,  नहीं तुम्हें अपने दम पर सब कुछ करना होगा मैं तुम्हें कोई पैसा नहीं दूंगी तुम्हें बाहर जाकर काम ढूंढना होगा तुम्हारे पास तो अच्छी खासी डिग्रियां है ।कमल और रवि को रोशनी की यह बात नहीं अच्छी लगी ।उन्होंने मन में सोचा क्या सब कुछ रोशनी दीदी का ही है?  हम लोगों का इस पर कोई अधिकार नहीं ।रोशनी तो केवल अपने भाई बहन को इतना काबिल बनाना चाहती थी कि,  उन्हें रोशनी की कभी जरूरत ना पड़े। लेकिन कमल और रवि के मन में लालच था। राधा और रानी बस अपने खर्चे लायक ही कमा पा रही थी ।उनके भी दोनों पति काम नहीं करते थे उनके मन में भी लालच था कि जब इतना सब कुछ है तो काम करने की क्या जरूरत?  रोशनी यह सब देख कर बहुत दुखी रहती कि मैं अपने भाइयों और अपनी बहनों के पति को कैसे समझाऊं?  रोशनी हर साल अपनी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा,  अनाथ आश्रम में देती थी यह बात चारों भाई बहनों को बिल्कुल पसंद नहीं थी।                                                                                                                                                                           रोशनी ने  शादी नहीं की उसने अपना जीवन अपने भाई-बहनों को  समर्पित किया,  लेकिन उसके भाई बहनों ने उसकी कोई कदर नहीं की । यह देखकर रोशनी को  बहुत दुख हुआ और उसने अपना सब कुछ अपने चारों भाई बहनों में बांट दिया । रोशनी ने अपने पास, कुछ भी नहीं रखा यह बात चारों भाई बहनों को पता थी ।कमल की पत्नी ने कहा कि दीदी का यहां पर क्या काम?  दीदी को कहीं वृद्धा आश्रम में छोड़ आते हैं दीदी वही रह लेंगी । सभी भाई-बहन इस बात से सहमत  हो गए। रोशनी ने उनकी यह सारी बातें सुन ली और उसे बहुत दुख हुआ कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने भाई-बहनों को दे उन्होंने मुझे क्या दिया? वह  दुखी होकर अपना घर और गांव छोड़कर वहां से बहुत दूर चली  जाती है, रोशनी एक छोटे से गांव में पहुंचती हैं और एक घर के सामने बेहोश हो जाती हैं ।                                 

Monday, July 22, 2019

सात बेटे (तीसरा भाग)

गुरुदेव आश्रम पहुंच जाते हैं और वह सोचते हैं कि,  कौन शनि की पत्रिका ले गया होगा?  शनि  तो ठीक था ।उसके पास दवाइयां भी थी,  लेकिन गुरुदेव के मन में एक सवाल और था कि, शनि की दवाइयां मोहिनी के पास क्यों थी? गुरुदेव को कुछ गड़बड़ लग रही थी ।                                                                                                                                                                                  अगले दिन गुरुदेव शनि के संगीत आश्रम में गए । वहां पर उन्होंने संगीत गुरु जी से बात की । गुरुदेव ने पूछा, शनि  संगीत में कैसा था?  गुरुजी बोले शनि  बहुत होनहार लड़का है । मोहिनी कैसी  थी?   मोहिनी भी बहुत अच्छी संगीतकार हैं । गुरुदेव,  गुरु जी से पूछते हैं कि,  क्या कोई शनि से मिलने आया था या कोई कभी इस आश्रम से एक  दिन के लिए भी कहीं गया था?  गुरु जी बोलते हैं,  कोई आया तो नहीं था,  लेकिन मोहिनी की मां बहुत बीमार थी तो वह अपने राज्य गई थी । गुरुदेव,  गुरुजी से मोहनी का पता पूछते हैं,  लेकिन गुरुजी बोलते हैं कि,  मुझे नहीं पता लेकिन वह किस राज्य से आती थी,  यह मुझे पता है । गुरुदेव बोलते हैं,  तो राज्य का नाम ही बता दो "सम्माननगर"  गुरुदेव वहां से चले जाते हैं ।                                                                                                                                                                                                                                                    अगले सुबह गुरुदेव सम्मान नगर पहुंचते हैं और पास के ही एक लोहार से पूछते हैं कि,  बेटा यहां पर मोहिनी का घर कौन सा है?  लोहार कहता है,  गुरु जी यहां पर तो चार मोहिनी नाम की लड़कियां रहती हैं, किस मोहिनी के बारे में आप पूछ रहे हो?  गुरुदेव बोलते हैं, मुझे भी उनका निवास स्थान नहीं पता है ।आप ऐसा करें कि मुझे चारों लड़कियों का पता दे दो। जिस  मोहिनी के घर मुझे जाना है, मैं उसे देखते ही पहचान लूंगा। लोहार कहता  है,  ठीक है गुरुजी,  गुरुदेव वहां से चले जाते हैं। गुरुदेव को पता था कि मोहिनी घर पर नहीं मिलेगी क्योंकि वह तो खुशी नगर में है । गुरुदेव तीन घरों में पता करते हैं, वहा  तीनों मोहिनी मिलती है,  गुरुदेव को पक्का यकीन हो जाता है कि चौथा घर ही मोहिनी का है। वह मोहिनी के घर पहुंचते हैं,  दरवाजा खटखटा ते हैं,  लेकिन दरवाजा कोई नहीं खोलता। क्योंकि दरवाजा बाहर  से ही बंद था । गुरुदेव पास में ही एक दर्जी के पास जाते हैं और पूछते हैं कि मोहिनी कहां गई है? दर्जी कहता  है, मोहिनी अपनी मौसी के यहां गई है। गुरुदेव पूछते हैं कि, उनकी मां भी नहीं दिखाई दे रही। दर्जी बोलता है, क्यों गुरु जी मजाक कर रहे हो मोहनी की मां को मरे हुए तीन  साल हो गए ।अब गुरुदेव को पक्का यकीन हो गया था की मोहिनी किसी इरादे से खुशी नगर में गई है । गुरुदेव,  दर्जी से पूछते हैं कि, उनके पिताजी कहां है? दर्जी बोलता है, उनके पिता चार  साल पहले ही गुजर गए थे ।गुरुदेव,  दर्जी  से पूछते हैं, उनके पिता क्या करते थे? दर्जी ने कहा वह खुशी नगर में सेनापति थे।  गुरुदेव दर्जी से पूछते हैं, तो वह लोग सम्मान नगर में क्यों रह रहे हैं? जब उनके पिता खुशीनगर में सेनापति थे,  दर्जी बोलता है कि, मोहिनी के पिता गद्दार थे, उन्हें राजा ने देश निकाला दे दिया था । उन्होंने दूसरे मुल्क  के साथ मिलकर खुशीनगर पर युद्ध  करने की सोची थी। खुशीनगर  के राजा को यह बात पता चल गई उन्होंने उसे खुशीनगर से निकाल दिया।अब  गुरुदेव सारी बातें समझ चुके थे कि मोहिनी वहां पर क्यों है?  गुरुदेव के पास अधिक वक्त नहीं था । वह तुरंत खुशीनगर जाने की तैयारी करने लगे ।                                                                                                                                                                                                                                                        अगले दिन वह खुशीनगर पहुंच गए राजा ने  गुरुदेव का स्वागत किया । राजा बोले  कि,  गुरुदेव जी आप बिल्कुल समय पर आए हो कल हमारे बेटों का जन्मदिन है, आपके आशीर्वाद की बहुत ज्यादा जरूरत है,  मैं रवि को भेजने ही वाला था,  आपको लेने के लिए । गुरुदेव,  राजा को और उसके छह बेटे को एक कमरे में बुलाते  है और कहता है की शनि के ऊपर अभी भी खतरा है। राजा बोलता है,  लेकिन वह तो दवाइयां खा रहा है । गुरुदेव सोम  को बोलते हैं कि, जाओ शनि की दवाइयां लेकर आओ,  सोम शनि  की दवाइयां लेकर आता है,  गुरुदेव दवा की पोटली खोलते है तो उसमे से मिट्टी निकलती है । राजा चौक जाता है कि,  मिट्टी दवा की जगह मिट्टी  किसने रखी,  ऐसा कौन कर सकता है?  गुरुदेव बोलते हैं,  शनि कई दिनों से दवाइयां नहीं ले रहा है । रवि पूछता है,  तो गुरुदेव हमें किस से खतरा है कौन सनी का गलत इस्तेमाल करने वाला है?  गुरुदेव बोलते हैं,  "मोहिनी"  रवि बोलता है,  लेकिन मोहिनी तो शनि से बहुत प्रेम करती है ।गुरुदेव बोलते हैं कि, मोहिनी ने सिर्फ दिखावा किया है, वह शनि  का इस्तेमाल करके इस राज्य को नष्ट करना चाहती हैं। राजा पूछता है कि,  मोहिनी ऐसा क्यों करेगी? गुरुदेव बताते हैं। मोहिनी तुम्हारे सेनापति की बेटी है जिसे तुमने देश निकाला दे दिया था, राजा को सभी बातें याद आ जाती हैं,  हां वह दूसरे राज्य के साथ मिलकर खुशीनगर पर युद्ध करने वाला था,  इसलिए उसे हमने राज्य से निकाल दिया। गुरुदेव बोलते हैं, मोहिनी इसी का बदला लेने आई है। वह पूरा राज्य ही नष्ट करना चाहती हैं। सारे भाई बोलते हैं कि, गुरुदेव अब हम क्या करें? गुरुदेव बोलते हैं कि,  हमें शनि को मोहिनी के खिलाफ करना होगा,  यह आसान नहीं होगा, इसमें बहुत ज्यादा खतरा है,  क्योंकि शनि मोहिनी पर बहुत ज्यादा विश्वास करता है और मोहिनी ने उसे सम्मोहन में ले रखा है। जब तक उसका सम्मोहन नहीं टूटेगा शनि किसी की भी नहीं सुनेगा इसलिए हमें शनि  का सम्मोहन तोडना  होगा। बुध  बोलता है कि,  सम्मोहन बढ़ाने से तो खतरा और बढ़ जाएगा । गुरुदेव कहते हैं,  हां पता है लेकिन यही एक रास्ता है, शनि को बचाने का सभी भाई शनि  को बचाने के लिए तैयार हो जाते हैं। गुरुदेव मंगल से कहते हैं कि तुम्हें ही शनि  का सम्मोहन तोड़ना है। मंगल कहता है कि, मैं कैसे मुझे तो तीर चलाना आता है, पता है।  तुम्हें शनि का विश्वास जीतना, होगा मंगल कहता है जी गुरुदेव में यही करूंगा। गुरुदेव कहते हैं कि,  आगे के बारे में बाद में बताता हूं।                                                                                                                                                                                              अगले दिन सातों भाइयों का जन्मदिन था ।उस दिन सातों भाइयों की क्षमता दोगुनी हो जाती थी। इसका मतलब शनि अब ज्यादा ताकतवर हो गया था ।मोहिनी को यह बात पता थी इसलिए उसने जन्मदिन का दिन चुना ताकि पूरा राज्य नष्ट हो जाए ।गुरुदेव,  सब को अकेले में बुलाया और कहा की मंगल तुम्हें तीर को शनि के कान के पास रखकर चलाना है ।मंगल कहता है, लेकिन कहां चलाना है,गुरुदेव बोलते हैं, बहुत बड़ी घंटी पर, यह सारी प्रक्रिया हम महल में ही करेंगे हम एक बहुत बड़ी घंटी टांग देंगे उसकी आवाज से ही शनि का सम्मोहन टूटेगा। मंगल कहता है, मैं समझ गया आप मुझे घंटी पर तीर चलाने को बोल रहे हो ताकि घंटी जोरो से बजे और शनि का सम्मोहन टूट जाए ।गुरुदेव बोलते हैं, हां लेकिन इस बात का ध्यान रहे की घंटी के पास कोई नहीं रहना चाहिए। क्युकी घंटी की आवाज इतनी ज्यादा तेज होगी की जो भी उसके आस पास होगा वह वही मर जाएगा । इसलिए हमे बीस कदम की दूरी पर रहना है,  घंटी के आस पास नहीं । प्रक्रिया प्रारंभ करने से पहले पूरे महल के लोगों को बाहर भेजना होगा, क्योंकि कुछ भी हो सकता है।                                                                                                                                                                                                                                                                                               "कुछ देर बाद" रवि शनि से बोलता है, शनि,   मोहिनी तुझे धोखा दे रही है, सभी भाई मिलकर बोलने लगते हैं कि हां मोहिनी तुझे धोखा दे रही हैं ।वह अपने पिता  का बदला लेने आए हैं । वह  केवल तेरा  इस्तेमाल कर रही है,  तू समझ मेरे भाई । शनि को बहुत गुस्सा आता है वह बोलता है कि, मोहिनी मेरे साथ ऐसा क्यों करेगी? आप झूठ बोल रहे हो,रवि बोलता है,  नहीं भाई हम सही बोल रहे हैं, शनि मोहिनी के सम्मोहन में इतना बंधा  हुआ था कि, उसे अपने भाइयों की बात झूठी  लग रही थी। यह सभी बातें मोहिनी सुन रही थी। वह जोर-जोर से हसने  लगती है। तुम लोग कितना भी कर लो लेकिन मेरा सम्मोहन नहीं तोड़ पाओगे, तभी रवि बोलता है कि, मोहिनी को बंदी बना लिया जाए । यह बात सुनकर शनि को बहुत गुस्सा आता है और वह चिल्लाने लगता है, उसके चिल्लाने की आवाज से महल की दीवारें हिलने लगती है, महल धीरे धीरे टूटने लगता है। सभी भाई देख कर दंग रह जाते हैं कि यह कैसे हो गया? मोहिनी जोर जोर से हसने  होने लगती है, जो मेने चाहा था वही हो रहा है। मै  तो यही चाहती थी कि सब मुझे परेशान करें। मंगल शनि के पास जाता है और उसके कानों के पास से तीन चलाता है, लेकिन उसी वक्त दिवार टूट जाती है और घंटी निचे गिर जाती है । सभी भाई घायल हो जाते है और घंटी भी दीवारों के निचे दब जाती है । रवि बोलता है, हमें महल  तुरंत खली करना होगा नहीं तो कोई नहीं बचेगा ।सोम बोलता है, लेकिन शनि को कैसे ले जाए?                                                                                                                   तभी सोम बोलता है में घंटी  को उठा लेता हु और तुम मंगल इसपर  तीर चलाओ । मंगल बोलता है, नहीं भाई,  मै  ऐसा  नहीं करूँगा अगर मेने ऐसा  किया तो तुम मर जाओगे ।सोम बोलता है, हमारे पास वक्त नहीं है जल्दी करो पूरा राज्य को बचाना है ।रवि बोलता है, नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा ।सोम बोलता है, भाई कुछ ही देर में पूरा महल गिरजाएगा हमे जल्दी करना होगा ।सभी भाई रोने लगते है और मंगल तीर चला देता है, उसकी गुज से शनि का सम्मोहन तो टूट जाता है लेकिन अब सोम नहीं रहा, सभी बहुत रोते  है।                                                                                                                                                                               अगले दिन शनि को होश आता  है। शनि बोलता  है, पिताजी मुझे क्या हुआ हैं? आप लोग क्यों रो रहे हो? मोहिनी कहां है? राजा शनि को पूरी घटना के बारे में बताता है। शनि यह जानकर बहुत दुखी होता है कि उसकी वजह से उसका भाई सोम  अब नहीं रहा वह बहुत रोता है और राजा से अपनी गलतियों की माफी मांगता है और बोलता है मुझे मृत्युदंड दे दो पिताजी। राजा बोलता है,नहीं बेटा ऐसा नहीं कर सकता मैं,  इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं यह सब मोहिनी ने किया था, मोहिनी हम से बदला लेना चाहती थी इसलिए उसने तुम्हें अपने प्यार में फंसा कर यह सब किया शनि  बहुत दुखी होता है । सभी भाई शनि  को गले लगाते हैं और बोलते हैं, इस में तेरी कोई गलती नहीं हमारे भाई ने राज्य के लिए अपना बलिदान दिया है, हमें इस बात का गर्व होना चाहिए।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कहानी समाप्त 

सात बेटे (दूसरा भाग)

"अगले दिन"  गुरुदेव ने सातों भाइयों को बुलाया और सातों को एक  काम दिया । सातो ने वह काम बखूबी तरीके से पूरा किया। गुरुदेव छह भाइयों की खूबियों का पता लगाना चाहते थे । धीरे धीरे करके गुरुदेव को बाकी सब की खूबियों के बारे में पता चल जाता है ।                                                                                                                                                                             रवि की तलवार  की  रफ्तार के आगे  कोई भी टिक नहीं पाता ।                                                                                                                                                                                                                                   सोमवार बहुत ताकतवर और बाहुबली था । वह किसी भी मजबूत  चीज का चूरमा बना देता । मंगल बहुत अच्छा तीर बाज था। उसका निशाना कभी नहीं चूकता ।                                                                                                                                                                                                                                                         बुद्ध आने वाली किसी भी घटना या खुशी को देखने की क्षमता                                                                           रखता था।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                       गुरु के अंदर अनोखी कला थी। वह लोगों के डर का इस्तेमाल                                                                            करके उन्हें प्राजित  करता ।                                                                                                                                                                                                   शुक्र बहुत बुद्धिमान था। वह हर प्रश्न का उत्तर तुरंत देता ।                                                                                                                                                                                                                   शनि के अंदर कोई खास खूबी  नहीं थी वह एक आम लड़का था । उसे संगीत से बहुत प्यार था और वह बहुत अच्छा गायक भी था लेकिन शनि अपने भाइयों जैसा बिल्कुल नहीं था ।                                                                                                                                                                        सातों भाई महल वापस लौटते हैं, गुरुदेव भी उनके साथ जाते हैं ।राजा अपने सातों बेटों को देखकर बहुत प्रसन्न होता है और गुरुदेव को सर झुका कर प्रणाम करता है। "गुरुदेव राजा से बोलते हैं" पुत्र तुम्हारे सातो  पुत्र अपने हर काम में निपुण हैं । तुम्हारे 6 पुत्र हमेशा तुम्हें युद्ध में विजय प्राप्त करा  आएंगे । "राजा कहता है"  गुरुदेव 6 पुत्र क्यों मेरे तो सात पुत्र है? "गुरुदेव बोलते हैं"  हां पुत्र पता है लेकिन तुम्हारा सातवां पुत्र, शनि उसके अंदर युद्ध में जाने जैसी कोई खूबी नहीं है । वह एक आम लड़का है ।राजा यह बात सुनकर बहुत दुखी होते हैं कि मेरा सातवां पुत्र अपने भाइयों जैसा शूरवीर नहीं है ।गुरुदेव जाते जाते राजा को कुछ जड़ी बूटियां देते हैं और बोलते हैं की,  तुम्हें यह जड़ी बूटियां शनि  को रोज  देना है ।राजा  पूछता है क्यों गुरुदेव? "गुरुदेव  बोलते हैं"  शनि  दिल का बहुत कमजोर है इसलिए उसे यह जड़ी बूटियां पूरी जिंदगी खानी है । राजा बोलता है जैसी आपकी आज्ञा । गुरुदेव वहां से चले जाते हैं ।                                                                                                                                                                     अब राजा को कोई भी राज्य प्राजित  नहीं कर पाता, उसके छह बेटे बहुत कमाल के थे । राजा को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता । पड़ोसी राज्य कभी भी उनसे युद्ध  नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हें पता था कि वह उनसे  से नहीं जीत पाएंगे ।राजा बहुत खुश था,राजा को अपने बेटो पर बहुत नाज था । लेकिन वह शनि को लेकर हमेशा परेशान रहते ।सारे भाई शनि  को बहुत प्यार करते, उसका बहुत ख्याल रखते,  उसे कभी भी यह एहसास नहीं दिलाते कि वह खास नहीं है ।उसे हमेशा खास होने का एहसास दिलाते,  शनि  बहुत खुश रहता।                                                                                                                                                               एक  दिन शनि ने अपने पिता से कहा कि,  पिताजी मुझे बहुत बड़ा गायक बनना है जिसके लिए मुझे संगीत सीखना होगा ।राजा कहता है क्यों नहीं बेटा तुम जहां जाना चाहते हैं वहां जाकर संगीत सीख सकते हो । शनि बोलता है मैं वीरेंद्र मामा के यहां जाकर संगीत सीखना चाहता हूं वहां पर बहुत अच्छे गुरु हैं ।राजा सारा बंदबस करा देता है और शनि अपने मामा  के यहां पहुंच जाता है । वीरेंद्र शनि को देख कर बहुत खुश होता है और गले लगाया। पुत्र तुम आ गए, "शनि  बोलता है" हां  मामा "महेंद्र बोलता है" मैं कल ही तुम्हें संगीत आश्रम में ले चलूंगा और गुरु जी से मिल लेना । तुम्हें वहीं रहकर शिक्षा ग्रहण करनी होगी,  "शनि  कहता है"  कोई बात नहीं मामा जी मैं वहां रह लूंगा । मुझे पता है बेटा तुम रह लोगे ।                                                                                                                                                                           अगले दिन वीरेंद्र शनि  को लेकर गुरुजी के आश्रम पहुंचता है,  शनि बहुत खुश था । शनि ने गुरु जी को प्रणाम किया और कहा कि मुझे आप से ही संगीत सीखना है गुरु जी बोलते क्यों नहीं पुत्र अवश्य? तुम आज से ही अपना अभ्यास प्रारंभ कर दो।शनि बोलता है,  जी गुरुजी और वीरेंद्र वहा  से चला जाता है ।  शनि बहुत अच्छा शिष्य था ।वह बहुत जल्दी संगीत कला सीखने लगा था, गुरुजी उसे बहुत पसंद थे, शनि गुरु जी का प्रिय शिष्य था।  शनि  को शिक्षा प्राप्त करते हुए 1 माह हो चुके थे । शनि  पूरी तरह संगीत सीख चुका था, वह  बहुत अच्छा गायक था,  अब शनि को  वहां पर सिर्फ 20 दिन और रहना था ।                                                                                                                                                                                                                                                       एक दिन की बात है ।आश्रम में एक बहुत सुंदर लड़की संगीत सीखने आई हुई थी। शनि  की नजर उस पर पड़ी और वह उसे देखता रह गया । वह बहुत सुंदर थी । कुछ देर में सभी लोग संगीत की कक्षा में उपस्थित हुए वहां पर वह  सुंदर लड़की भी थी । गुरुजी ने कहा यह हमारी  नई शिष्या  हैं इनका नाम मोहिनी है । गुरु जी बोलते हैं, मोहिनी तुम शनि के साथ रहोगी वह संगीत में  बहुत अच्छा है । तुम्हे उससे बहुत मदद मिलेगी,  मोहनी कहती है, जी  गुरुजी । शनि  मोहिनी को संगीत सिखाता,  मोहिनी को शनि  का संगीत बहुत पसंद था ।मोहिनी बोलती है,  तुम बहुत अच्छा गाते हो । तुम कौन  से राज्य से हो? शनि बोलता है में खुशीनगर से हु,  मोहिनी बोलती है क्या तुम सच बोल रहे हो? क्या तुम उन सात भाइयो में से हो?  तुम्हारे सारे  भाई बहुत कमाल  के है,  लेकिन तुम यहाँ पर क्यों?  शनि बोलता है में अपने भाइयो जैसा नहीं हु। शनि  को वापस जाने में सिर्फ 15 दिन बाकी हैं ।                                                                                                                                                                            एक दिन मोहिनी शनि से मिलने उसके कक्ष में जाती  हैं । सनी उस वक्त अपनी दवा खा रहा था ।मोहिनी बोलती है, शनि तुम यह दवा क्यों खाते हो?  शनि बोलता है,  अगर मैं यह दवा नहीं खाऊंगा तो मेरी सांस फूलने लगती है । मोहिनी कहती है,  तुमने कभी यह दवाई बंद की,  शनि बोलता है, नहीं मैंने यह दवाई कभी नहीं बंद की,  मोहिनी बोलती है,  तो तुम एक दिन यह दवाई मत खाओ और देखो क्या तुम्हारी सांस फूलती है?  शनि बोलता है,  नहीं पिताजी को पता चला तो वह बहुत गुस्सा होंगे । मोहिनी बोलती है नहीं किसी को नहीं पता चलेगा तुम बस एक दिन मत खाओ । शनि मोहिनी की बात को मान लेता है और उस दिन दवा नहीं खाता । शनि  ने आज दवाई नहीं खाई ।                                                                                                                                                                      कुछ देर बाद शनि  मोहिनी के पास जाता है बोलता है कि,  आज मैंने दवा नहीं खाई मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे लग रहा है मैं आज आजाद हो गया हूं ।मोहिनी बोलती है,  मैंने कहा था ना तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम अब इन  दवाइयों को कभी मत खाना। शनि  बोलता है,  हां तुम बिल्कुल ठीक बोल रही हो। पता नहीं क्यों पिताजी मुझे दवाई खाने को बोलते थे? शनि के 20 दिन पूरे होने वाले थे , अब उसे वापस अपने घर जाना था ।शनि  और मोहिनी एक दूसरे को चाहने लगे थे ।                                                                                                                                                                                                                   एक दिन मोहिनी शनि  से बोलती है,  मेरी मां बीमार है मैं उनको देखने जा रही हूं मैं कल तक आऊंगी । शनि बोलता है मैं भी चलूं,  मोहिनी कहती है,  नहीं तुम नहीं चल सकते । शनि बोलता है कोई बात नहीं तुम जाओ ।                                                                                                                                                                         मोहिनी अपनी मां से मिलने नहीं गई थी मोहिनी उस जगह गई थी जहां पर शनि और उसके छह भाइयों ने शिक्षा ग्रहण की थी । गुरुदेव जी के आश्रम । मोहिनी गुरुदेव के आश्रम पहुंच जाती  हैं और उस दिन गुरुदेव आश्रम में नहीं होते हैं । मोहिनी सीधे ही गुरुदेव के कक्ष में पहुंच जाती हैं और सातों भाइयों की पत्रिकाएं ढूंढने लगती हैं जिसमें गुरुदेव ने उनके बारे में लिखा हुआ है वह अपने हर शिष्य का लेखा-जोखा रखते  थे । मोहिनी ढूंढती हैं लेकिन मोहिनी को नहीं मिलता,  मोहनी को  6 भाइयो की पत्रिका मिलजाती है । लेकिन शनि की नहीं मिलती । मोहिनी गुस्से में  सामान  फेंकने लगती है,  तभी उसकी नजर एक बस्से पर पड़ती है मोहिनी उस बस्से को खोलती है तो उसमे शनि की पत्रिका मिल जाती है । मोहिनी पत्रिका को पढ़ती है और वह से चली जाती है ।                                                                                                                                                                             अगले दिन मोहिनी आश्रम पहुंच जाती  हैं। वह शनि से बोलती हैं शनि अब तुम यह दवाइयां कभी भी नहीं खाओगे ।शनि बोलता है,  क्यों मेरी तबीयत अगर कभी खराब हो गई तो यह दवाइयां काम आएंगी? मोहिनी बोलती है,  नहीं ऐसा नहीं होगा तुम इन दवाइयों को फेंक दो,  शनि बोलता है,  नहीं मैं नहीं फेकूंगा । मोहिनी कहती है कि,  क्या तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं?  क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते?  तुम्हें लगता है मैं तुम्हारा बुरा चाहती हूं,  शनि बोलता है,  नहीं मुझे पता है तुम मेरा बुरा नहीं चाहती हो,  मोहिनीं बोलती है,  तो फिर तुम यह दवाइयां नहीं खाओगे  मेरे लिए,  शनि दवाइयों को फेंक देता है और मोहिनी को गले लगा लेता है ।मोहिनी शनि से बोलती है,  शनि, क्या मैं तुम्हारे राज्य में चल सकती हूं? मेने सुना है खुशीनगर बहुत सुन्दर है । शनि बोलता है,  क्यों नहीं तुम चल सकती हो । मोहिनी कहती है,  मैं तुम्हारे भाइयों से भी मिल लूंगी,  शनि कहता है कि,  बिल्कुल ठीक है तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी मुलाकात अपनी मां से कराऊंगा और उन्हें हमारे बारे में भी बता दूंगा । मोहिनी बोलती है,  ठीक है फिर हम 3 दिन बाद यहां से चलेंगे, शनि बोलता है,  ठीक है ।                                                                                                                                                                                                       कई दिनों बाद गुरुदेव अपने आश्रम पहुंचते हैं और आश्रम की दशा देखकर वह चकित रह जाते हैं कि यह कैसे हुआ? सारा सामान इधर-उधर क्यों फैला हुआ है? गुरुदेव तुरंत बक्से को खोलते हैं और देखते हैं कि उसमें शनि की पत्रिका नहीं है,  वह बहुत चिंतित हो जाते हैं और तुरंत खुशीनगर राज्य की ओर चल पड़ते हैं। गुरुदेव राजा से मुलाकात करते हैं और राजा को सारी  बात बताते हैं ।राजा भी बहुत चिंतित हो जाता है कि आखिर कौन ले गया होगा शनि की पत्रिका?  अगर किसी गलत इंसान के हाथ लग गई तो बहुत अनर्थ हो जाएगा । बुद्ध गुरुदेव और राजा की सारी बातें सुन लेता है और पूछता है पिताजी क्या हुआ? आप लोग इतना परेशान क्यों है? क्या था शनि की पत्रिका में? गुरुदेव बोलते हैं,  बेटा तुम तो आने वाला कल देख सकते हो तो देखो आने वाले कल में क्या होने वाला है?बुध  अपनी आंखें बंद करता है और देखता है कि पूरा राज्य तहस-नहस होगया है  कोई भी नहीं बचा सभी लोग मर चुके हैं । बुध तुरंत आंखें खोलता है और बोलता है कि गुरुदेव हमारा पूरा राज्य नष्ट हो चुका है और हम में से कोई भी नहीं बचा । गुरुदेव बोलते हैं,  मुझे जिसका डर था वही हुआ, बुध पूछता है,  ऐसा क्या था शनि की पत्रिका में?  गुरुदेव बोलते हैं की,  शनि का दिमाग बहुत तेज है वह अपने दिमाग से बड़ी से बड़ी इमारत बड़े से बड़ा राज्य नष्ट कर सकता है और उसकी  पत्रिका गायब है अगर किसी गलत इंसान के हाथ लग गई तो यह राज्य खतरे में आ जाएगा ।राजा बोलता  है,  अगर यह पत्रिका किसी शत्रु के हाथ लग गई तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाएगा। अब हमें वह पत्रिका ढूंढनी पड़ेगी। बुध  कहता है लेकिन पिताजी कैसे हमें तो पता भी नहीं है कि पत्रिका लेकर कौन गया? बुध बोलता है,  तो पिताजी शनि को जो आप दवाइयां देते थे वह इसीलिए थी ताकि कोई उसके दिमाग के साथ खेल ना सके,  गुरुदेव बोलते हैं बिल्कुल,  बुध,  तुम सही समझे इसलिए वे दवा  दी थी, ताकि उसके दिमाग का इस्तेमाल कोई गलत इंसान ना कर पाए ।सभी बहुत चिंतित होते हैं कि अब क्या होगा?  गुरुदेव बोलते हैं शनि कब तक महल लौटने  वाला है? राजा बोलता है वह कल तक आ जाएगा । गुरुदेव कहते हैं,  तो मैं कल तक यहीं पर उसका इंतजार करता हूं । यह पत्रिका किसी गलत इंसान के हाथ नहीं लगनी चाहिए ।                                                                                                                                                                            अगले दिन शनि मोहिनी के साथ अपने महल पहुंच जाता है । शनि अपने पिता और गुरुदेव को सर झुका कर प्रणाम करता है और मोहिनी का परिचय कराता है ।शनि बोलता है, पिताजी यह मोहिनी है,  हम एक साथ संगीत की शिक्षा प्राप्त करते थे । मोहिनी को हमारा राज्य देखना था। राजा बोलता है, क्यों नहीं यह हमारा सौभाग्य होगा?  शनि अपने भाइयों से गले मिलता है और अपने और मोहिनी के बारे में सब बता देता है, सभी भाई शनि के लिए बहुत खुश थे । मोहिनी सब से मिल लेती हैं, सब मोहिनी को देखकर बहुत खुश होते हैं कि,  इतनी सुंदर लड़की लेकिन, गुरुदेव बार-बार मोहिनी को देखते रहते वह किसी सोच में डूबे थे,  उनके मन में बार-बार ख्याल आ रहा था कि कहीं तोइस लड़की को मैंने देखा है, लेकिन कहां यह याद नहीं आ रहा ।                                                                                                                                                                                                राजा शनि को अकेले में ले जाकर पूछते हैं, बेटा तुम्हारे साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ, शनि कहता है, पिताजी आप ऐसा क्यों बोल रहे हो? बस बेटा तुम बहुत दिनों बाद आए हो इसलिए, नहीं पिताजी मुझे कुछ नहीं हुआ है,  मैं बिल्कुल ठीक हूं, मोहिनी मेरा बहुत ख्याल रखती थी ।राजा गुरुदेव से कहता है,  गुरुदेव जी शनि बिल्कुल ठीक है उसे कुछ भी नहीं हुआ। गुरुदेव शनि के पास जाते हैं और कहते हैं,  तुम अपनी दवाइयां ले रहे हो,  शनि बोलने ही वाला होता है की मोहिनी कहती है शनि तुमने अपनी दवाई मेरे थैले  में रख दी थी यह लो । गुरुदेव कहते हैं, इस दवाई को हमेशा लेना कभी छोड़ना मत। शनि सोच में पड़ जाता है कि दवाइयां तो मैंने फेंक दी थी तो मोहिनी के पास कहां से आई?  शनि मोहिनी से पूछता है कि यह दवाई कहां से आई?  मोहिनी कहती है,  मैंने उठा ली थी । लेकिन तुमने तो कहा था फेक दो,  तो मोहिनी बोलती है,  मैंने सोचा कि कभी काम आ सकती है शनि बोलता है तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो। गुरुदेव राजा से विदा लेते हुए अपने आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं।

सात बेटे (पहला भाग)

यह कहानी ख़ुशीनगर के राजा की है जिसकी साथ पत्नियां थी । लेकिन उसे एक भी संतान नहीं थी । राजा हमेशा परेशान रहता कि,  अब क्या होगा कौन मेरा वंश आगे चलाएगा?                                                                                                                                                                      एक  दिन की बात है । राज्य में एक बहुत बड़े गुरु आए हुए थे । राजा ने उन्हें सह सम्मान अपने महल में बुलाया उनका बहुत सम्मान किया और उनसे कहा,   गुरुदेव मुझे एक भी संतान नहीं है,  क्या मैं संतान से वंचित रहूँगा?  "गुरुदेव बोलते हैं"  नहीं पुत्र तुम्हें संताने होंगी । राजा कहता है,  लेकिन कब?   गुरुदेव अपने थैले में से साथ फल निकालते हैं और राजा को देते हैं, गुरुदेव  कहते हैं,  पुत्र यह साथ फल तुम अपनी  सातो  पत्नियों को दे देना ।  लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि तुम्हारी सातों पत्नियां इस फल को एक साथ  एक वक्त में एक साथ ही खाएं । राजा बोलता है,  ठीक है गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा । मैं ऐसा ही करूंगा। गुरुदेव राजा से आज्ञा लेते हैं और वहां से जाने लगते हैं,  जाते-जाते वह राजा से  कहते हैं की,   तुम्हारी पत्नियां यह फल साथ में ही खाएं नहीं तो अच्छा नहीं होगा कोई आगे पीछे नहीं साथ में मतलब साथ में । राजा कहता है हां गुरुदेव मैं अपनी पत्नियों को यह फल एक साथ ही खिलाऊंगा और गुरुदेव वहां से चले जाते हैं ।                                                                                                                                                                           "कुछ देर बाद"  राजा अपनी सातों पत्नियों को एक साथ बुलाता है और एक- एक फल  सातों पत्नियों को दे देता है । पत्नियां पूछती हैं,  महाराज यह फल आपने क्यों दिया?  राजा गुरुदेव की सारी बातें अपनी पत्नियों को बताते हैं पत्नियां बहुत खुश होती हैं । राजा कहता है कि,  इस बात का ध्यान रखना कि तुम सातो ही  ये फल एक साथ ही खाना होगा । कोई आगे पीछे नहीं एक साथ । रानियां बोलती हैं,  ठीक है महाराज सातों पत्नियां फल को खाने लगती हैं तभी सातवीं  पत्नी के हाथ से फल गिर जाता है और वह 1 मिनट लेट हो जाती है, फल खाने में । यह देखकर राजा बहुत डर जाता है कि,  गुरुदेव ने कहा था अगर एक भी रानी ने फल देरी से खाया तो बहुत अनर्थ हो जाएगा । क्या हो जाएगा यह तो गुरुदेव ने नहीं बताया था? सातो  पत्नियां फल खाकर अपने अपने कमरे में चली जाती है ।                                                                                                                                                                               "कुछ दिनों बाद"   राजा को पता चलता है कि उनकी सातों पत्नियां मां बनने वाली हैं राजा बहुत खुश होता है ।                                                                                                                                                                          "कुछ महीनों बाद"   महाराज की 6 पत्नियों को एक साथ पुत्र होते हैं लेकिन सातवीं पत्नी को थोड़ी देर बाद एक पुत्र होता  है राजा बहुत खुश होता है ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                            राजा बहुत खुश होता है और वह पूरे राज्य में जश्न का माहौल बना देता है । पूरे राज्य के लोग बहुत खुश होते हैं । राजा भी बहुत खुश था अगले दिन गुरुदेव फिर से राज्य मे आए और राजा से मुलाकात की । गुरुदेव ने राजा को बधाई दी । राजा ने सिर झुका कर गुरुदेव का धन्यवाद किया । आपकी कृपा से ही मुझे आज सात संताने हैं । गुरुदेव आशीर्वाद देते हुए राजा को बोलते हैं पुत्र तुम अपने सातों पुत्रों का नाम सप्ताह के नाम पर ही रखना । राजा पूछता है ऐसा क्यों गुरुदेव गुरुदेव बोलते हैं तुम्हारे सातो पुत्र बहुत महान राजा बनेंगे और पूरी दुनिया पर राज करेंगे । राजा बहुत खुश होता है। राजा गुरुदेव से कहता है कि,  गुरुदेव आपने कहा था कि,  सातों पत्नी एक साथ ही फल खाएं लेकिन गलती से मेरी  सातवी पत्नी से फल नीचे गिर गया और 6 पत्नियों ने उस वक्त फल खा लिया था तो इससे कोई अनर्थ तो नहीं होगा । गुरुदेव क्रोधित हो जाते हैं और बोलते मैंने कहा था कि सातों को साथ में ही खाना है ।राजा  बोलता है लेकिन वह तो गलती से हुआ था । गुरुदेव कहते हैं, ठीक हैं लेकिन तुम्हें अपने सातवे  पुत्र पर बहुत ध्यान देना पड़ेगा । राजा पूछता है क्यों गुरुदेव?  गुरुदेव बोलते हैं, तुम्हारे सारे पुत्रों में कुछ ना कुछ खास है ।                                                                                                                                                                                                                                                                "सात  साल बाद"  गुरुदेव फिर से महल में आते हैं । राजा से बोलते हैं मैं तुम्हारे सात पुत्रों का मै गुरु बनना चाहता हु । राजा बहुत खुश होता है और बोलता है गुरुदेव येतो मेरा सौभाग्ये होगा । गुरुदेव बोलते है  उन्हें मेरे आश्रम में 7 साल तक रहना पड़ेगा उनसे कोई भी मिलने नहीं आएगा । राजा बोलता है ठीक  है गुरुदेव ।                                                                                                                                                                                 अगले दिन आश्रम में गुरुदेव सातों को बुलाते हैं और सातों को बोलते हैं,  तुम्हें एक काम करना होगा । सातों बोलते हैं, जी गुरुजी । गुरुदेव बोलते हैं,  तुम्हें यह साथ पत्थर सात कदम की दूरी पर रखना है और इस बात का ध्यान रखें कि तुम केवल सात   कदम इस्तेमाल कर सकते हो । इससे अधिक नहीं । रवि बोलता है, गुरु जी यह कैसे हो सकता है? एक ही पत्थर रखने में सात  कदम ख़तम हो जाएगे । गुरुदेव बोलते है, ये मुझे नहीं पता ये तुम लोग सोचो कैसे करे ।                                                                                                                                                                           सातों भाई सोचने लगते हैं कि यह काम हम पूरा कैसे करें? वह सातों कोशिश करते हैं लेकिन सातों पत्थर सात कदम की दूरी पर नहीं रख पाते सातों को बहुत गुस्सा आता है कि,  गुरुजी ने यह कैसा काम दे दिया? कोई तलवार चलाना सिखाते,  तीर चलाना सिखाते, यह पत्थर  रखने के लिए क्यों कहा? यह भी कोई काम है । रवि बोलता है चलो फिर से कोशिश करते हैं लेकिन फिर से वह लोग नहीं रख पाते ।                                                                                                                                                                               सातों भाई थक जाते हैं और एक जगह पर बैठ जाते हैं । सोचते हैं यह काम पूरा कैसे करें? रवि पानी पीने लगता है,  तभी शनि बोलता है भैया मुझे भी पानी दो,  रवि  बोलता है आके  लेजा  । शनि शुक्र को बोलता है, भैया पानी देना, "शुक्र"  गुरु को बोलता है,  "गुरु"  बुध  को बोलता है,  "बुध"  मंगल को बोलता है,  "मंगल"  सोम  को बोलता है,  "सोम" रवि को ।                                                                                                                                                                      तभी शुक्र बोलता है भैया आपने  देखा । शनि को  पानी चाहिए था,  तो हमने एक दूसरे के द्वारा पानी उस तक पहुंचाया । रवि बोलता है,  हां तो क्या हुआ?  अरे भैया इसका मतलब कि हम पत्थर को भी इसी तरह से सात कदम की दूरी पर रख सकते हैं । रवि बोलता है लेकिन गुरु जी ने तो कहा था सबके सात  कदम । शुक्र बोलता है,  नहीं भैया उन्हें सिर्फ सात कदम कहे थे मतलब हम सातों भाइयों के सात  कदम  । रवि समझ जाता है और सभी मिलकर पत्थर को सात कदम पर रख देते है ।                                                                                                                                                                         गुरुदेव शुक्र की सूझबूझ को देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं । रवि बोलता है, गुरुदेव हमने कार्य समाप्त कर दिया,  गुरुदेव प्रसन्न होते हैं और कहते हैं, "ठीक है"  गुरुदेव पूछते हैं कि तुम्हें इससे क्या सीख मिली?  सोम बोलता है हमें यह सीख मिलेगी हमें कोई भी काम एकता के साथ करना चाहिए गुरुदेव बोलते हैं सोम ने  बिल्कुल ठीक कहा । सातो भाई खाना खाकर सोने चले जाते हैं । गुरुदेव अपने कमरे में यह सोचते हैं कि शुक्र के बारे में पता चल गया कि वह बहुत बुद्धिमान और चतुर है अब बाकी छह भाइयों की खूबियों का पता लगाना है ।