Wednesday, July 3, 2019

मां की चिंता मां की सीख

एक बहुत बड़े शहर में एक छोटा परिवार रहता था । रीटा और उसका  एक 10 साल का बेटा रोबिन । वह दोनों हमेशा खुश रहते । रीटा पेशे से एक छोटे से स्कूल में अध्यपिका थी । रोबिन के पिता नहीं थे वह एक लम्बी बीमारी की वजह से चल बसे, जब रोबिन पांच साल का था ।                                                                                                                                                                               रीटा रोबिन से बहुत प्यार करती थी । वह रोबिन का बहुत ख्याल रखती एक दिन की बात है रीटा अपने स्कूल जा रही थी वह रोबिन के बारे में सोच रही थी की अचानक एक गाड़ी आई और रीटा और गाड़ी की टक्कर हो गई । रीटा को काफी चोट आई थी, वह चल फिर नहीं पा रही थी ।डॉक्टर ने उसे आराम करने को कहा कई दिनों तक रीटा का इलाज चलता रहा लेकिन डॉक्टर लोग रीटा को  बचा नहीं सके ।                                                                                                                                                                            अब रोबिन का कोई नहीं था । रोबिन अपनी मां की कब्र के पास जाकर हमेशा रोता रहता आसपास के लोग उसे खाना दे जाते लेकिन कब तक? अब रोबिन स्कूल भी नहीं जाता था, क्युकी उसके पास पैसे ख़तम होगए थे फीस कहाँ से भरता?  माता पिता ज्यादा अमीर नहीं थे की उसके लिये पैसा छोड़ के  जाते ।                                                                                                                                                                                        एक दिन रोबिन अपनी मां की कब्र पर रो रहा था । अचानक उसे आवाज आई बेटा क्यों रो रहे हो?  रोबिन यहां वहां देखने लगा  की आवाज कहां से आ रही है?  फिर से आवाज आती है बेटा मैं तेरी मां बोल रही हूं रोबिन चौक जाता है, उसकी मां उसे  कहती है बेटा तुम कुछ काम करो रोबिन बोलता है लेकिन मैं क्या करूं मेरे पास तो पैसे भी नहीं है? उसकी मां कहती है बेटा अपनी मां के आसपास देखो तुम्हें काम मिल जाएगा रोबिन सोचने लगता है कि मां के पास क्या देखूं? वह सोचता है शायद मां मेरे लिए कुछ पैसे छोड़ कर गई है वह पूरा घर देख लेता है लेकिन उसे कुछ नहीं मिलता ।                                                                                                                                                                                                                     अगले दिन वह अपनी मां की कब्र के पास जाता है और कहता है,  मां मुझे तो घर में कुछ नहीं मिला । कब्र से फिर से उसकी मां की आवाज आती है बेटा मैंने कहा मेरे आस-पास मैं जहा  पर हूं मैं, वहां पर देखो रोबिन सोचने लगता है कि मैं कहां पर देखूं? थोड़ी देर सोचने पर उसे लगता है मां उसे उसकी कब्र के आसपास बोल रही हैं वह अपनी मां के कब्र आसपास देखने लगता है उसे अपनी मां की कब्र के पास बहुत सारे फूल दिखाई देते हैं यह वही फूल है जो उसकी मां को उनके विद्यार्थी और उनके स्कूल के दोस्त  रोज उनकी याद में रखकर जाते हैं रोबिन  कहता है,  मां मैं समझ गया आप इन फूलों को मुझे बेचने  को बोल रही हैं उसकी मां बोली हां बेटा ।                                                                                                                                                                                                      फिर क्या था, रोबिन ने वहा से फूल  उठाएं और बाजार में बेचने  के लिए चला गया वह रोज फूल को बेचता और पैसे जमा करता । ऐसे ही वह रोज करता धीरे धीरे करके उसके पास बहुत पैसे हो गए अब वह बाजार से भी फूल खरीदता और बेचता अब रोबिन बड़ा हो चुका था अब उसकी फूलों की बहुत बड़ी दुकान है जिसे उसने अपनी मां के नाम पर खोल कर रखी है,  रोबिन पढ़ तो नहीं पाया लेकिन बहुत बड़ा आदमी जरूर बना और वह भी अपनी  मां की चिंता और सीख की वजह से ।

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