Monday, July 22, 2019

सात बेटे (पहला भाग)

यह कहानी ख़ुशीनगर के राजा की है जिसकी साथ पत्नियां थी । लेकिन उसे एक भी संतान नहीं थी । राजा हमेशा परेशान रहता कि,  अब क्या होगा कौन मेरा वंश आगे चलाएगा?                                                                                                                                                                      एक  दिन की बात है । राज्य में एक बहुत बड़े गुरु आए हुए थे । राजा ने उन्हें सह सम्मान अपने महल में बुलाया उनका बहुत सम्मान किया और उनसे कहा,   गुरुदेव मुझे एक भी संतान नहीं है,  क्या मैं संतान से वंचित रहूँगा?  "गुरुदेव बोलते हैं"  नहीं पुत्र तुम्हें संताने होंगी । राजा कहता है,  लेकिन कब?   गुरुदेव अपने थैले में से साथ फल निकालते हैं और राजा को देते हैं, गुरुदेव  कहते हैं,  पुत्र यह साथ फल तुम अपनी  सातो  पत्नियों को दे देना ।  लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि तुम्हारी सातों पत्नियां इस फल को एक साथ  एक वक्त में एक साथ ही खाएं । राजा बोलता है,  ठीक है गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा । मैं ऐसा ही करूंगा। गुरुदेव राजा से आज्ञा लेते हैं और वहां से जाने लगते हैं,  जाते-जाते वह राजा से  कहते हैं की,   तुम्हारी पत्नियां यह फल साथ में ही खाएं नहीं तो अच्छा नहीं होगा कोई आगे पीछे नहीं साथ में मतलब साथ में । राजा कहता है हां गुरुदेव मैं अपनी पत्नियों को यह फल एक साथ ही खिलाऊंगा और गुरुदेव वहां से चले जाते हैं ।                                                                                                                                                                           "कुछ देर बाद"  राजा अपनी सातों पत्नियों को एक साथ बुलाता है और एक- एक फल  सातों पत्नियों को दे देता है । पत्नियां पूछती हैं,  महाराज यह फल आपने क्यों दिया?  राजा गुरुदेव की सारी बातें अपनी पत्नियों को बताते हैं पत्नियां बहुत खुश होती हैं । राजा कहता है कि,  इस बात का ध्यान रखना कि तुम सातो ही  ये फल एक साथ ही खाना होगा । कोई आगे पीछे नहीं एक साथ । रानियां बोलती हैं,  ठीक है महाराज सातों पत्नियां फल को खाने लगती हैं तभी सातवीं  पत्नी के हाथ से फल गिर जाता है और वह 1 मिनट लेट हो जाती है, फल खाने में । यह देखकर राजा बहुत डर जाता है कि,  गुरुदेव ने कहा था अगर एक भी रानी ने फल देरी से खाया तो बहुत अनर्थ हो जाएगा । क्या हो जाएगा यह तो गुरुदेव ने नहीं बताया था? सातो  पत्नियां फल खाकर अपने अपने कमरे में चली जाती है ।                                                                                                                                                                               "कुछ दिनों बाद"   राजा को पता चलता है कि उनकी सातों पत्नियां मां बनने वाली हैं राजा बहुत खुश होता है ।                                                                                                                                                                          "कुछ महीनों बाद"   महाराज की 6 पत्नियों को एक साथ पुत्र होते हैं लेकिन सातवीं पत्नी को थोड़ी देर बाद एक पुत्र होता  है राजा बहुत खुश होता है ।                                                                                                                                                                                                                                                                                                            राजा बहुत खुश होता है और वह पूरे राज्य में जश्न का माहौल बना देता है । पूरे राज्य के लोग बहुत खुश होते हैं । राजा भी बहुत खुश था अगले दिन गुरुदेव फिर से राज्य मे आए और राजा से मुलाकात की । गुरुदेव ने राजा को बधाई दी । राजा ने सिर झुका कर गुरुदेव का धन्यवाद किया । आपकी कृपा से ही मुझे आज सात संताने हैं । गुरुदेव आशीर्वाद देते हुए राजा को बोलते हैं पुत्र तुम अपने सातों पुत्रों का नाम सप्ताह के नाम पर ही रखना । राजा पूछता है ऐसा क्यों गुरुदेव गुरुदेव बोलते हैं तुम्हारे सातो पुत्र बहुत महान राजा बनेंगे और पूरी दुनिया पर राज करेंगे । राजा बहुत खुश होता है। राजा गुरुदेव से कहता है कि,  गुरुदेव आपने कहा था कि,  सातों पत्नी एक साथ ही फल खाएं लेकिन गलती से मेरी  सातवी पत्नी से फल नीचे गिर गया और 6 पत्नियों ने उस वक्त फल खा लिया था तो इससे कोई अनर्थ तो नहीं होगा । गुरुदेव क्रोधित हो जाते हैं और बोलते मैंने कहा था कि सातों को साथ में ही खाना है ।राजा  बोलता है लेकिन वह तो गलती से हुआ था । गुरुदेव कहते हैं, ठीक हैं लेकिन तुम्हें अपने सातवे  पुत्र पर बहुत ध्यान देना पड़ेगा । राजा पूछता है क्यों गुरुदेव?  गुरुदेव बोलते हैं, तुम्हारे सारे पुत्रों में कुछ ना कुछ खास है ।                                                                                                                                                                                                                                                                "सात  साल बाद"  गुरुदेव फिर से महल में आते हैं । राजा से बोलते हैं मैं तुम्हारे सात पुत्रों का मै गुरु बनना चाहता हु । राजा बहुत खुश होता है और बोलता है गुरुदेव येतो मेरा सौभाग्ये होगा । गुरुदेव बोलते है  उन्हें मेरे आश्रम में 7 साल तक रहना पड़ेगा उनसे कोई भी मिलने नहीं आएगा । राजा बोलता है ठीक  है गुरुदेव ।                                                                                                                                                                                 अगले दिन आश्रम में गुरुदेव सातों को बुलाते हैं और सातों को बोलते हैं,  तुम्हें एक काम करना होगा । सातों बोलते हैं, जी गुरुजी । गुरुदेव बोलते हैं,  तुम्हें यह साथ पत्थर सात कदम की दूरी पर रखना है और इस बात का ध्यान रखें कि तुम केवल सात   कदम इस्तेमाल कर सकते हो । इससे अधिक नहीं । रवि बोलता है, गुरु जी यह कैसे हो सकता है? एक ही पत्थर रखने में सात  कदम ख़तम हो जाएगे । गुरुदेव बोलते है, ये मुझे नहीं पता ये तुम लोग सोचो कैसे करे ।                                                                                                                                                                           सातों भाई सोचने लगते हैं कि यह काम हम पूरा कैसे करें? वह सातों कोशिश करते हैं लेकिन सातों पत्थर सात कदम की दूरी पर नहीं रख पाते सातों को बहुत गुस्सा आता है कि,  गुरुजी ने यह कैसा काम दे दिया? कोई तलवार चलाना सिखाते,  तीर चलाना सिखाते, यह पत्थर  रखने के लिए क्यों कहा? यह भी कोई काम है । रवि बोलता है चलो फिर से कोशिश करते हैं लेकिन फिर से वह लोग नहीं रख पाते ।                                                                                                                                                                               सातों भाई थक जाते हैं और एक जगह पर बैठ जाते हैं । सोचते हैं यह काम पूरा कैसे करें? रवि पानी पीने लगता है,  तभी शनि बोलता है भैया मुझे भी पानी दो,  रवि  बोलता है आके  लेजा  । शनि शुक्र को बोलता है, भैया पानी देना, "शुक्र"  गुरु को बोलता है,  "गुरु"  बुध  को बोलता है,  "बुध"  मंगल को बोलता है,  "मंगल"  सोम  को बोलता है,  "सोम" रवि को ।                                                                                                                                                                      तभी शुक्र बोलता है भैया आपने  देखा । शनि को  पानी चाहिए था,  तो हमने एक दूसरे के द्वारा पानी उस तक पहुंचाया । रवि बोलता है,  हां तो क्या हुआ?  अरे भैया इसका मतलब कि हम पत्थर को भी इसी तरह से सात कदम की दूरी पर रख सकते हैं । रवि बोलता है लेकिन गुरु जी ने तो कहा था सबके सात  कदम । शुक्र बोलता है,  नहीं भैया उन्हें सिर्फ सात कदम कहे थे मतलब हम सातों भाइयों के सात  कदम  । रवि समझ जाता है और सभी मिलकर पत्थर को सात कदम पर रख देते है ।                                                                                                                                                                         गुरुदेव शुक्र की सूझबूझ को देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं । रवि बोलता है, गुरुदेव हमने कार्य समाप्त कर दिया,  गुरुदेव प्रसन्न होते हैं और कहते हैं, "ठीक है"  गुरुदेव पूछते हैं कि तुम्हें इससे क्या सीख मिली?  सोम बोलता है हमें यह सीख मिलेगी हमें कोई भी काम एकता के साथ करना चाहिए गुरुदेव बोलते हैं सोम ने  बिल्कुल ठीक कहा । सातो भाई खाना खाकर सोने चले जाते हैं । गुरुदेव अपने कमरे में यह सोचते हैं कि शुक्र के बारे में पता चल गया कि वह बहुत बुद्धिमान और चतुर है अब बाकी छह भाइयों की खूबियों का पता लगाना है । 

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