Thursday, July 4, 2019

लालच की कीमत

एक गांव में दो जुड़वा बहने रहती थी । सुखिया और दुखिया दोनों की शक्ल एक जैसी थी, लेकिन सुखिया बहुत गोरी थी और दुखिया बहुत काली ।                                                                                                                                                                             सुखिया और दुखिया बहुत गरीब थे । उनकी मां घरों में काम करती और दो वक्त की रोटी लाती दुखिया हमेशा अपनी मां की मदद करती, लेकिन सुखिया कुछ भी नहीं करती वह हमेशा अपने आपको आईने में देखती और साज  श्रृंगार करती ।                                                                                                                                                                                                                            एक दिन सुखिया, दुखिया और उनकी मां मेले घूमने गए वह मेले में  जाकर बहुत खुश थी । उसी मेले में एक राज्य से राजकुमार आया हुआ था, उसकी नजर सुखिया पर पड़ी और वह सुखिया को देखता ही रह गया उसने मन में सोच लिया था कि मैं शादी करूंगा तो इसी लड़की से वह अपने राज्य जाता है और अपने माता पिता को यह बात बताता है उसके माता पिता बोलते हैं,  बेटा हमें कैसे पता चलेगा कि वो लड़की कहां से आई थी । राजा का बेटा बोलता है मां मैं वह पता कर लूंगा ।                                                                                                                                                                                              अगले दिन राजकुमार उसी मेले में जाता है और एक दुकानदार से पूछता है कि भाई कल यहां पर दो लड़कियां थी और दोनों हमशक्ल थी एक बहुत गोरी और एक बहुत काली आप जानते हैं वह कहां रहती हैं,  दुकान वाला बोला हां राजकुमार वह दोनों पास के गांव में रहती हैं। वह गांव में जाता है और सुखिया का दरवाजा खटखटाता है दुखिया दरवाजा खोलती है और पूछती हैं आप कौन? वह कहता है मैं आपकी बहन से मिलने आया हूं दुखिया सुखिया को बुलाती  हैं राजकुमार सुखिया को देखकर बहुत खुश होता है और उसकी मां से सुखिया का हाथ मांगता है सुखिया की मां बहुत खुश होती है और वह इस रिश्ते के लिए मान जाती है राजकुमार खुशी-खुशी सुखिया से विवाह कर के अपने महल में ले जाता है ।                                                                                                                                                                                       अब घर में सिर्फ दुखिया और  मां है । एक दिन दुखिया अपनी मां से कहती है कि मां मैं रुई बेचने का काम करूं उसकी मां कहती हैं,  हां बेटा करो वह बाजार से रुई लती  हैं और चौराहे पर रख कर बेचने लगती हैं । वह रोज ऐसा करती ।                                                                                                                                                                       एक दिन मौसम बहुत खराब था । ऐसा लग रहा था तूफान आने वाला है दुखिया  कहती हैं,  मां मैं रूई बेचने जा रही हूं उसकी मां कहती है,  बेटा आज मत जाओ आज तूफान आने वाला है दुखिया कहती है, मां अगर तूफान आएगा तो मैं जल्दी से घर आ जाऊंगी उसकी मां कहती हैं ठीक है बेटा लेकिन चलो आज मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूं दुखिया बोलती हैं ठीक है चलो ।                                                                                                                                                                         दोनों चौराहे पर रुई  बेचने लगती है तभी बहुत तेज तूफान आता है और दुखिया की सारी रुई  उड़ जाती हैं दुखिया अपने रुई  के पीछे पीछे भागने लगती है उसकी मां बोलती है बेटा जाने दो वह नहीं मिलेगी लेकिन दुखिया रुई के पीछे भागती हैं और  जंगल में पहुंच जाती है वह देखती है, तभी रास्ते में उसे ढेर सारी चींटियां मिलती है दुखिया उन चीटियों को देखती हैं तो चीटियां बोलते हैं दुखिया बहन  हमें मत मारना दुखिया कहती है,  नहीं नहीं मैं तुम्हें नहीं मारूंगी और वह दूसरे रास्ते से रुई  के पीछे भागती है भागते भागते उसे दो कछुए मिलते हैं दोनों आपस में लड़ाई कर रहे होते हैं कछुवा बोलता है दुखिया बहन हमें छुड़ा  दो हम दोनों लड़ाई करते करते फस गए दुखिया उन लोगों को छुड़ाती  हैं और फिर अपनी रुई के पीछे भागती है भागते भागते उसे एक गाय मिलते हैं गाय बोलते हैं दुखिया बहन वह मेरी बेटी को दूर बांध के चले गए हैं उसे भूख लगी है कृपया करके उसे खोल देंगे ताकि वह दूध पी सके दुखिया बछड़े को खोल कर उसके पास ला के रख देती  हैं दुखिया भागने लगती है भागते भागते उसे एक घर दिखाई देता  है,  तभी घर में से एक बुढ़िया निकलती है और कहती है बेटा रुई  ढूंढ रहे हो क्या बुढ़िया  बोलती हैं बेटा तुम्हारी रुई  आगे चली गई है । दुखिया चलने लगती हैं बुढ़िया  कहती है बेटा रुको मैं तुम्हें एक बात बताती हूं ।                                                                                                                                                                        बढ़िया दुखिया से कहती है, बेटा तुम यहां से सीधी जाना वहां पर तीन  नदियां मिलेंगी तुम्हें किसी एक नदी में सात  बार डुबकी लगाना है दुखिया ने पूछा क्यों अम्मा? बुढ़िया बोली मैं जैसा कहती हूं वैसा ही करो दुखिया ने  कहा ठीक है अम्मा और वह चली जाती हैं चलते चलते उसे तीन नदी मिलती हैं । तीनों नदियां अलग होती हैं एक काले पानी की साफ़  पानी  की ढेर सारे  फूलों से भरी वह सोचती है क्यों ना में साफ पानी में नहा लू,  वह साफ पानी में जाती है और सात  बार डुबकी लगाती है,  जब वह डुबकी लगा के निकलती  है तो वह परियों से भी ज्यादा सुंदर हो जाती हैं और उसे उसकी रुई  भी मिल जाती हैं वह वहां से चली जाती है चलते चलते वह बुढ़िया के घर पर पहुंचती हैं बुढ़िया  कहती है,  बेटा तुम अंदर जाकर कोई एक बक्सा ले लो वहां पर तीन बक्से  हैं । दुखिया  घर में जाती हैं और देखती  हैं तीन बक्से  एक सोने का एक चांदी का और एक आम बक्सा । वह आम बक्सा लेती  हैं वहां से चली जाती  हैं । चलते चलते उसे गाय मिलती  हैं गाय बोलती हैं दुखिया बहन यह बक्सा मेरी  पीट पे  रख दो दुखिया  बक्सा उसकी पीट पर  रख देती हैं और चलने लगती हैं गाय उसे उसकी मां के पास छोड़ देती हैं उसकी मां दुखिया को पहचान नहीं पाती  हैं,  वह बोलती है  मैं दुखिया उसकी मां बोलते नहीं मेरी बेटी तो काली थी वह पूरी घटना बताती हैं दुखिया की मां बहुत खुश होती हैं और पूछती है बेटा यह बक्सा कैसा वह  बोलते हैं बूढ़ी अम्मा ने दिया दुखिया बक्से को खोलती है उसमे से एक राजकुमार निकलता है राजकुमार दुखिया और उसकी मां को लेकर अपने घर चला जाता है और दुखिया से विवाह कर लेता है ।                                                                                                                                                                                       कुछ दिनों बाद यह खबर सुखिया तक पहुंची वह दुखिया से मिलने उसके घर आती है और दुखिया को देखकर हैरान हो जाती हैं कि इतनी सुंदर यह तो मुझसे भी ज्यादा सुंदर हो गई सुखिया दुखिया से पूछती हैं कि बहन यह कैसे हुआ? तो दुखिया  पूरी बात बताती हैं वह किस तरह से रुई के  पीछे भागी उसने कैसे सबकी मदद की?  सुखिया दुखिया  के ठाठ बाट देख कर हैरान थी उसने सोचा कि क्यों ना मैं भी रुई   बेचू और ऐसा ही करूं तो मुझे भी इतना बड़ा घर सुंदर राजकुमार और मैं भी बहुत ज्यादा सुंदर हो जाऊंगी ।                                                                                                                                                                                   अगले दिन सुखिया अपनी मां के साथ चौराहे पर रुई  बेचने जाती है तभी बहुत तेज तूफान होता है और सुखिया की रुई  उड़ जाती है वह  पीछे पीछे भागने लगती है चलते चलते हुए जंगल में पहुंच जाती हैं उसे चीटियां मिलती है चीटियां बोलती है सुखिया  बहन हमें दबाना मत नहीं तो हम मर जाएंगे तो सुखिया कहती  हैं अच्छा तुम लोगों के लिए मैं दूसरे रस्ते से जाऊ  मेरे पास इतना टाइम नहीं है और वही उसी रास्ते से जाने लगती है बहुत सारी चींटियां मर जाती हैं आगे चलते चलते कछुए मिलते हैं वह उनकी भी मदद नहीं करती फिर मैं आगे चलने लगते हैं गाय मिलती है गाय की भी मदद नहीं करती आगे चल चलते हैं एक बुढ़िया मिलतीं  और बोलती  हैं बेटा रुई ढूंढ रही हो बोलती हैं वे कहती  हैं बेटा यहां से सीधे जाना तुम्हें तीन  नदी मिलेगी तुम उन में से किसी एक में नहा लेना और डुबकी लगा  लेना तुम्हें तुम्हारी रुए  मिल जाएगी । सुखिया चलने लगती है और उसे तीनों नदी मिल जाती है वह फूलों वाली नदी में नहाती है सात बार  डुबकी लगाती हैं और बहुत ज्यादा सुंदर हो जाती है तभी उसके मन में लालच आता है कि सात बाद डुबकी लगाने से मैं दुखिया से भी ज्यादा सुंदर हो गई हूं लेकिन अगर मैं सात बार और लगा हूं तो मैं बहुत ज्यादा सुंदर हो जाऊंगी मेरे जैसा  कोई नहीं होगा । वह सात बार और डुबकी लगा लेती है और वहां से चली जाती है । वह बुढ़िया  के घर पहुँचती है कहती है बेटा अंदर जाओ और तीनों बक्सों में से एक ले लो, वह  अंदर जाती हैं और सोने का बक्सा निकाल कर लाती है और चलने लगती है चलते चलते उसे गाय मिलती हैं गाय उसकी कोई मदद नहीं करती, वह  अकेले ही लेकर जाती है और अपनी मां के पास खड़ी हो जाती है उसकी मां उसको बोलती है कौन है तू?  सुखिया  बोलती है मां मैं सुखियां नहीं मेरी बेटी तो बहुत ज्यादा सुंदर थी तुतो काली कलूटी है यह सुनकर सुखिया  बहुत रोने  लगती है और बोलती है, माँ में हु तुम्हारी बेटी सुखिया उसकी माँ वह से चली जाती है । सुखिया बक्सा खोलती है उसमे से एक राक्षस निकलता है और सुखिया को लेकर चला जाता है ।

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