Monday, July 22, 2019

सात बेटे (तीसरा भाग)

गुरुदेव आश्रम पहुंच जाते हैं और वह सोचते हैं कि,  कौन शनि की पत्रिका ले गया होगा?  शनि  तो ठीक था ।उसके पास दवाइयां भी थी,  लेकिन गुरुदेव के मन में एक सवाल और था कि, शनि की दवाइयां मोहिनी के पास क्यों थी? गुरुदेव को कुछ गड़बड़ लग रही थी ।                                                                                                                                                                                  अगले दिन गुरुदेव शनि के संगीत आश्रम में गए । वहां पर उन्होंने संगीत गुरु जी से बात की । गुरुदेव ने पूछा, शनि  संगीत में कैसा था?  गुरुजी बोले शनि  बहुत होनहार लड़का है । मोहिनी कैसी  थी?   मोहिनी भी बहुत अच्छी संगीतकार हैं । गुरुदेव,  गुरु जी से पूछते हैं कि,  क्या कोई शनि से मिलने आया था या कोई कभी इस आश्रम से एक  दिन के लिए भी कहीं गया था?  गुरु जी बोलते हैं,  कोई आया तो नहीं था,  लेकिन मोहिनी की मां बहुत बीमार थी तो वह अपने राज्य गई थी । गुरुदेव,  गुरुजी से मोहनी का पता पूछते हैं,  लेकिन गुरुजी बोलते हैं कि,  मुझे नहीं पता लेकिन वह किस राज्य से आती थी,  यह मुझे पता है । गुरुदेव बोलते हैं,  तो राज्य का नाम ही बता दो "सम्माननगर"  गुरुदेव वहां से चले जाते हैं ।                                                                                                                                                                                                                                                    अगले सुबह गुरुदेव सम्मान नगर पहुंचते हैं और पास के ही एक लोहार से पूछते हैं कि,  बेटा यहां पर मोहिनी का घर कौन सा है?  लोहार कहता है,  गुरु जी यहां पर तो चार मोहिनी नाम की लड़कियां रहती हैं, किस मोहिनी के बारे में आप पूछ रहे हो?  गुरुदेव बोलते हैं, मुझे भी उनका निवास स्थान नहीं पता है ।आप ऐसा करें कि मुझे चारों लड़कियों का पता दे दो। जिस  मोहिनी के घर मुझे जाना है, मैं उसे देखते ही पहचान लूंगा। लोहार कहता  है,  ठीक है गुरुजी,  गुरुदेव वहां से चले जाते हैं। गुरुदेव को पता था कि मोहिनी घर पर नहीं मिलेगी क्योंकि वह तो खुशी नगर में है । गुरुदेव तीन घरों में पता करते हैं, वहा  तीनों मोहिनी मिलती है,  गुरुदेव को पक्का यकीन हो जाता है कि चौथा घर ही मोहिनी का है। वह मोहिनी के घर पहुंचते हैं,  दरवाजा खटखटा ते हैं,  लेकिन दरवाजा कोई नहीं खोलता। क्योंकि दरवाजा बाहर  से ही बंद था । गुरुदेव पास में ही एक दर्जी के पास जाते हैं और पूछते हैं कि मोहिनी कहां गई है? दर्जी कहता  है, मोहिनी अपनी मौसी के यहां गई है। गुरुदेव पूछते हैं कि, उनकी मां भी नहीं दिखाई दे रही। दर्जी बोलता है, क्यों गुरु जी मजाक कर रहे हो मोहनी की मां को मरे हुए तीन  साल हो गए ।अब गुरुदेव को पक्का यकीन हो गया था की मोहिनी किसी इरादे से खुशी नगर में गई है । गुरुदेव,  दर्जी से पूछते हैं कि, उनके पिताजी कहां है? दर्जी बोलता है, उनके पिता चार  साल पहले ही गुजर गए थे ।गुरुदेव,  दर्जी  से पूछते हैं, उनके पिता क्या करते थे? दर्जी ने कहा वह खुशी नगर में सेनापति थे।  गुरुदेव दर्जी से पूछते हैं, तो वह लोग सम्मान नगर में क्यों रह रहे हैं? जब उनके पिता खुशीनगर में सेनापति थे,  दर्जी बोलता है कि, मोहिनी के पिता गद्दार थे, उन्हें राजा ने देश निकाला दे दिया था । उन्होंने दूसरे मुल्क  के साथ मिलकर खुशीनगर पर युद्ध  करने की सोची थी। खुशीनगर  के राजा को यह बात पता चल गई उन्होंने उसे खुशीनगर से निकाल दिया।अब  गुरुदेव सारी बातें समझ चुके थे कि मोहिनी वहां पर क्यों है?  गुरुदेव के पास अधिक वक्त नहीं था । वह तुरंत खुशीनगर जाने की तैयारी करने लगे ।                                                                                                                                                                                                                                                        अगले दिन वह खुशीनगर पहुंच गए राजा ने  गुरुदेव का स्वागत किया । राजा बोले  कि,  गुरुदेव जी आप बिल्कुल समय पर आए हो कल हमारे बेटों का जन्मदिन है, आपके आशीर्वाद की बहुत ज्यादा जरूरत है,  मैं रवि को भेजने ही वाला था,  आपको लेने के लिए । गुरुदेव,  राजा को और उसके छह बेटे को एक कमरे में बुलाते  है और कहता है की शनि के ऊपर अभी भी खतरा है। राजा बोलता है,  लेकिन वह तो दवाइयां खा रहा है । गुरुदेव सोम  को बोलते हैं कि, जाओ शनि की दवाइयां लेकर आओ,  सोम शनि  की दवाइयां लेकर आता है,  गुरुदेव दवा की पोटली खोलते है तो उसमे से मिट्टी निकलती है । राजा चौक जाता है कि,  मिट्टी दवा की जगह मिट्टी  किसने रखी,  ऐसा कौन कर सकता है?  गुरुदेव बोलते हैं,  शनि कई दिनों से दवाइयां नहीं ले रहा है । रवि पूछता है,  तो गुरुदेव हमें किस से खतरा है कौन सनी का गलत इस्तेमाल करने वाला है?  गुरुदेव बोलते हैं,  "मोहिनी"  रवि बोलता है,  लेकिन मोहिनी तो शनि से बहुत प्रेम करती है ।गुरुदेव बोलते हैं कि, मोहिनी ने सिर्फ दिखावा किया है, वह शनि  का इस्तेमाल करके इस राज्य को नष्ट करना चाहती हैं। राजा पूछता है कि,  मोहिनी ऐसा क्यों करेगी? गुरुदेव बताते हैं। मोहिनी तुम्हारे सेनापति की बेटी है जिसे तुमने देश निकाला दे दिया था, राजा को सभी बातें याद आ जाती हैं,  हां वह दूसरे राज्य के साथ मिलकर खुशीनगर पर युद्ध करने वाला था,  इसलिए उसे हमने राज्य से निकाल दिया। गुरुदेव बोलते हैं, मोहिनी इसी का बदला लेने आई है। वह पूरा राज्य ही नष्ट करना चाहती हैं। सारे भाई बोलते हैं कि, गुरुदेव अब हम क्या करें? गुरुदेव बोलते हैं कि,  हमें शनि को मोहिनी के खिलाफ करना होगा,  यह आसान नहीं होगा, इसमें बहुत ज्यादा खतरा है,  क्योंकि शनि मोहिनी पर बहुत ज्यादा विश्वास करता है और मोहिनी ने उसे सम्मोहन में ले रखा है। जब तक उसका सम्मोहन नहीं टूटेगा शनि किसी की भी नहीं सुनेगा इसलिए हमें शनि  का सम्मोहन तोडना  होगा। बुध  बोलता है कि,  सम्मोहन बढ़ाने से तो खतरा और बढ़ जाएगा । गुरुदेव कहते हैं,  हां पता है लेकिन यही एक रास्ता है, शनि को बचाने का सभी भाई शनि  को बचाने के लिए तैयार हो जाते हैं। गुरुदेव मंगल से कहते हैं कि तुम्हें ही शनि  का सम्मोहन तोड़ना है। मंगल कहता है कि, मैं कैसे मुझे तो तीर चलाना आता है, पता है।  तुम्हें शनि का विश्वास जीतना, होगा मंगल कहता है जी गुरुदेव में यही करूंगा। गुरुदेव कहते हैं कि,  आगे के बारे में बाद में बताता हूं।                                                                                                                                                                                              अगले दिन सातों भाइयों का जन्मदिन था ।उस दिन सातों भाइयों की क्षमता दोगुनी हो जाती थी। इसका मतलब शनि अब ज्यादा ताकतवर हो गया था ।मोहिनी को यह बात पता थी इसलिए उसने जन्मदिन का दिन चुना ताकि पूरा राज्य नष्ट हो जाए ।गुरुदेव,  सब को अकेले में बुलाया और कहा की मंगल तुम्हें तीर को शनि के कान के पास रखकर चलाना है ।मंगल कहता है, लेकिन कहां चलाना है,गुरुदेव बोलते हैं, बहुत बड़ी घंटी पर, यह सारी प्रक्रिया हम महल में ही करेंगे हम एक बहुत बड़ी घंटी टांग देंगे उसकी आवाज से ही शनि का सम्मोहन टूटेगा। मंगल कहता है, मैं समझ गया आप मुझे घंटी पर तीर चलाने को बोल रहे हो ताकि घंटी जोरो से बजे और शनि का सम्मोहन टूट जाए ।गुरुदेव बोलते हैं, हां लेकिन इस बात का ध्यान रहे की घंटी के पास कोई नहीं रहना चाहिए। क्युकी घंटी की आवाज इतनी ज्यादा तेज होगी की जो भी उसके आस पास होगा वह वही मर जाएगा । इसलिए हमे बीस कदम की दूरी पर रहना है,  घंटी के आस पास नहीं । प्रक्रिया प्रारंभ करने से पहले पूरे महल के लोगों को बाहर भेजना होगा, क्योंकि कुछ भी हो सकता है।                                                                                                                                                                                                                                                                                               "कुछ देर बाद" रवि शनि से बोलता है, शनि,   मोहिनी तुझे धोखा दे रही है, सभी भाई मिलकर बोलने लगते हैं कि हां मोहिनी तुझे धोखा दे रही हैं ।वह अपने पिता  का बदला लेने आए हैं । वह  केवल तेरा  इस्तेमाल कर रही है,  तू समझ मेरे भाई । शनि को बहुत गुस्सा आता है वह बोलता है कि, मोहिनी मेरे साथ ऐसा क्यों करेगी? आप झूठ बोल रहे हो,रवि बोलता है,  नहीं भाई हम सही बोल रहे हैं, शनि मोहिनी के सम्मोहन में इतना बंधा  हुआ था कि, उसे अपने भाइयों की बात झूठी  लग रही थी। यह सभी बातें मोहिनी सुन रही थी। वह जोर-जोर से हसने  लगती है। तुम लोग कितना भी कर लो लेकिन मेरा सम्मोहन नहीं तोड़ पाओगे, तभी रवि बोलता है कि, मोहिनी को बंदी बना लिया जाए । यह बात सुनकर शनि को बहुत गुस्सा आता है और वह चिल्लाने लगता है, उसके चिल्लाने की आवाज से महल की दीवारें हिलने लगती है, महल धीरे धीरे टूटने लगता है। सभी भाई देख कर दंग रह जाते हैं कि यह कैसे हो गया? मोहिनी जोर जोर से हसने  होने लगती है, जो मेने चाहा था वही हो रहा है। मै  तो यही चाहती थी कि सब मुझे परेशान करें। मंगल शनि के पास जाता है और उसके कानों के पास से तीन चलाता है, लेकिन उसी वक्त दिवार टूट जाती है और घंटी निचे गिर जाती है । सभी भाई घायल हो जाते है और घंटी भी दीवारों के निचे दब जाती है । रवि बोलता है, हमें महल  तुरंत खली करना होगा नहीं तो कोई नहीं बचेगा ।सोम बोलता है, लेकिन शनि को कैसे ले जाए?                                                                                                                   तभी सोम बोलता है में घंटी  को उठा लेता हु और तुम मंगल इसपर  तीर चलाओ । मंगल बोलता है, नहीं भाई,  मै  ऐसा  नहीं करूँगा अगर मेने ऐसा  किया तो तुम मर जाओगे ।सोम बोलता है, हमारे पास वक्त नहीं है जल्दी करो पूरा राज्य को बचाना है ।रवि बोलता है, नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा ।सोम बोलता है, भाई कुछ ही देर में पूरा महल गिरजाएगा हमे जल्दी करना होगा ।सभी भाई रोने लगते है और मंगल तीर चला देता है, उसकी गुज से शनि का सम्मोहन तो टूट जाता है लेकिन अब सोम नहीं रहा, सभी बहुत रोते  है।                                                                                                                                                                               अगले दिन शनि को होश आता  है। शनि बोलता  है, पिताजी मुझे क्या हुआ हैं? आप लोग क्यों रो रहे हो? मोहिनी कहां है? राजा शनि को पूरी घटना के बारे में बताता है। शनि यह जानकर बहुत दुखी होता है कि उसकी वजह से उसका भाई सोम  अब नहीं रहा वह बहुत रोता है और राजा से अपनी गलतियों की माफी मांगता है और बोलता है मुझे मृत्युदंड दे दो पिताजी। राजा बोलता है,नहीं बेटा ऐसा नहीं कर सकता मैं,  इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं यह सब मोहिनी ने किया था, मोहिनी हम से बदला लेना चाहती थी इसलिए उसने तुम्हें अपने प्यार में फंसा कर यह सब किया शनि  बहुत दुखी होता है । सभी भाई शनि  को गले लगाते हैं और बोलते हैं, इस में तेरी कोई गलती नहीं हमारे भाई ने राज्य के लिए अपना बलिदान दिया है, हमें इस बात का गर्व होना चाहिए।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कहानी समाप्त 

No comments:

Post a Comment