एक छोटे से गांव में दो दंपत्ति रहते थे रतन और माला दोनों हमेशा दुखी रहते क्योंकि उन्हें कोई औलाद नहीं थी । "लगभग दस साल बाद" माला मां बनने वाली थी । रतन और माला बहुत खुश थे । माला ने एक लड़के को जन्म दिया । रतन और माला बहुत खुश थे । लड़के नाम रवि रखा । पांच साल बाद माला को एक लड़की हुई । माला रतन और रवि बहुत खुश थे । रतन और माला अपने बच्चो के साथ बहुत ख़ुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे । दस साल बाद एक दिन रतन की तबियत अचानक ख़राब हो गए । उसे अस्पताल ले गए डॉक्टर ने कहा ये ज्यादा दिन तक नहीं जी पाएगे । माला बहुत दुखी थी तभी रवि और रतना आए और बोले माँ रोइए मत पापा को कुछ नहीं होगा । लेकिन कुछ महीनो बाद रतन दुनिया छोड़के चला गया । सब बहुत दुखी थे जैसे तैसे सबने अपने आप को संभाला । माला ने बहुत मेहनत करके रवि और रतना को पढ़ाया । रवि अब इंजीनियर बन गया है और रतना ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी । अब माला को रतना की शादी की चिंता थी । रवि बोला, माँ आप चिंता मत करो हम रतना के लिए बहुत अच्छा लड़का ढूढेंगे । कुछ महीनो बाद रतना की शादी अच्छे घर में कर दी गई । अब माला रवि की शादी के बारे में सोचने लगी माला ने कहा, बेटा तू भी शादी कर ले । कुछ महीनो बाद रवि की शादी हो गई । रवि की पत्नी सुलेखा बहुत समझदार थी वह एक स्कूल टीचर थी लेकिन माला को उसका काम करना पसंद नहीं था वह हमेशा इसबात पर झगड़ा करती । सुलेखा ने स्कूल छोड़ दिया और घर सँभालने में जुट गए लेकिन माला तभी खुश नहीं थी । वह हमेश सुलेखा की गलतिया निकालती । जब भी रवि घर आने वाला होता तो माला घर का काम करने लगती और रवि ये सब देख कर सुलेखा पर गुस्सा करता । सुलेखा बोलती की मेने सारा काम करलिया है तो रवि कहता, तो माँ क्यों काम कर रही है? एक दी सुलेखा को फ़ोन आया की उसकी माँ बहुत बीमार है उसने रवि से कहा मुझे माँ के पास जाना है उनके पास कोई नहीं है । रवि बोला, चली जाओ लेकिन माँ से पूछ लेना उसने माँ से कहा माँ, मेरी माँ बहुत बीमार है उनके पास कोई नहीं में माँ के पास जाऊ लेकिन माला ने मना कर दिया की अगर तू चली जाएगी तो घर कौन देखेगा? सुलेखा चुप चाप वह से चली जाती है और अपने कमरे में बहुत रोती है । कुछ दिनों बाद माला की ताबिया बहुत ख़राब हो जाती है सुलेखा उसका बहुत ख्याल रखती है माला रवि से कहती है की मेरी रतना से बात करा दे रवि रतना को फ़ोन लगता है माला रतना से कहती है, बेटा मै बहुत बीमार हु आजा मेरे पास लेकिन रतना मना कर देती है और बोलती है की माँ मेरे ससुराल वाले नहीं आने देंगे वह कहते है घर कोन देखेगा तेरी माँ को तेरे भैया भाभी देख लगे । तभी रवि बोलता है की माँ जैसे आप बीमार हुए तो अपनी बेटी को याद किया वैसे ही सुलेखा की माँ ने सुलेखा को याद किया था । माला को अपनी गलती का अहसाह होता है और वह सुलेखा से माफ़ी मांगती है और सुलेखा को उसको उसकी माँ के पास भेज देती है । अब माला सुलेखा को अपनी बेटी की तरह रखती है दोनों बहुत खुश है
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