Sunday, July 28, 2019

रोशनी (दूसरा भाग)

घर में से एक 7 साल की लड़की निकलती है,  जिसका नाम किरन  है। किरन  बाहर आती हैं, वह  रोशनी को अपने घर के सामने बेहोश  देखती हैं,  किरण अपनी मां को जोर जोर से बुलाने लगती है, मां घर के सामने कोई आंटी सोई हुई है,  उसकी मां तुरंत बाहर आती  हैं और देखती  हैं कि एक औरत घर के सामने बेहोश पड़ी हैं ।वह रोशनी को अंदर लेकर जाती हैं,  उसे पानी पिलाती हैं और पूछती हैं तुम कहां से आई हो और तुम्हें क्या हुआ?  तुम बेहोश कैसे हो गई?  रोशनी बोली,  मैं रास्ता भूल गई हूं मैंने कई दिनों से खाना भी नहीं खाया है। गायत्री  ने तुरंत रोशनी को खाना खिलाया और फिर डॉक्टर को बुलाया, डॉक्टर ने रोशनी का चेकअप किया और कहा,  यह बिल्कुल ठीक है,  खाना ना खाने की वजह से  बहुत कमजोरी आ गई थी ।                                                                                                                                                                               कुछ देर के बाद रोशनी वहां से जाने लगी । गायत्री ने कहा कि, बहन तुम कहां जाओगे? तुम तो रास्ता भूल गई हो,  तुम बताओ तो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूं। रोशनी ने कहा कि मेरा कोई घर नहीं है जहां ठिकाना मिल जाए मैं वहीं रह लूंगी । गायत्री  बोलती है कि नहीं बहन तुम हमारे साथ रहोगी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। रोशनी बोलती हैं कि तुम्हारे घर में किसी को दिक्कत तो नहीं होगी मेरे यहां रहने से। गायत्री  बोलती है,  घर में सिर्फ मैं और मेरी बेटी ही है मेरे पति को गुजरे हुए काफी साल हो गए। रोशनी कहती है, ठीक है मैं यहीं पर रुकूंगी , लेकिन मैं कुछ काम करूंगी । गायत्री  कहती है कि,  मेरे पास तो कुछ ऐसा नहीं है जो मैं तुम्हें काम करने को  दु,  मैं तो दूसरों के घर काम करके अपनी बेटी को पढ़ाती हूं खिलाती हूं। रोशनी  कहती है क्यों क्या तुम पढ़े-लिखे नहींहो । गायत्री ने कहा नहीं मैंने पढ़ाई नहीं की है, गायत्री सबके घर घर जाकर काम करती और कुछ पैसे लेकर आती  हु,  जिससे वह रोशनी और अपनी बेटी का पेट भर पाती  थी। रोशनी से यह सब देखा नहीं जा रहा था।                                                                                                                                                                                                                                                                एक दिन  किरन,  रोशनी को अपने घर के पीछे एक बगीचे में ले गई और कहा कि,  मासी यह  हमारा आम का बगीचा है,  किरन ने  कहा,  अच्छा हां लेकिन यह आम बहुत खराब है बहुत ज्यादा खट्टे हैं इनका कोई काम नहीं। दोनों घर जाते हैं रोशनी, गायत्री  से पूछती हैं कि.  बहन तुम्हारे पास तो इतने सारे आम के पेड़ हैं तो तुम आम क्यों नहीं बेचती  क्यों दूसरों के घर जाकर काम करती हो। गायत्री  बोलती है कि,  बहन वह सभी आम बहुत ज्यादा खट्टे हैं उन्हें कोई नहीं खरीदा एक दो लोग खरीद के लिए जाते हैं तो वह भी वापस  कर जाते हैं कि, तुम्हारे पेड़ के हम बहुत ज्यादा खट्टे हैं उनसे वह कुछ भी नहीं बना पाते इन आमो  का मुझे कोई फायदा नहीं है। रोशनी कहती है जैसा मैं कहूंगी तुम वैसा करोगी। गायत्री बोलती है क्यों नहीं बहन क्या करना है, रोशनी और किरण बगीचे में जाकर दस आम तोड़कर लाती है,  रोशनी उन्हें हल्के गुनगुने नमक वाले पानी में पूरी रात रख देती हैं। गायत्री पूछती है, आप ऐसा क्यों कर रही हो? रोशनी कहती है सुबह पता चल जाएगा ।                                                                                                                                                                                                     अगली सुबह रोशनी ने आमो को देखा, आम तैयार हो चुके थे । गायत्री  ने पूछा कि, बहन ऐसा करने से क्या होगा? तो रौशनी  ने कहा कि अगर हम रात भर आम को नमक के पानी में रखेंगे  तो उसका खट्टापन कम हो जाता है और हम उसका इस्तेमाल आचार, मुरब्बा, खटाई इन सब में कर सकते हैं । गायत्री  ने कहा, यह तो मुझे पता ही नहीं था ।रोशनी ने आम का अचार बनाया और गायत्री से कहा कि तुम इन्हें अपनी जान पहचान के लोगों को बेच के देखो और अगरयह अचार   उन्हें पसंद आएगा तो हम और बनाएंगे इससे हमें पैसे मिलेंगे । गायत्री ने कहा, ठीक है बहन।                                                                                                                                                                       अगले दिन गायत्री  जहां जहां काम करती थी वहां सब को अचार का डिब्बा देकर आई सबको अचार बहुत पसंद आया सब ने गायत्री से कहा कि तुम हमारे लिए और अचार ला सकती हो । गायत्री ने कहा क्यों नहीं? सबने  पूछा कौन से बाजार से लाई हो? गायत्री ने कहा कि यह अचार,  मेरी बहन और मेने मिलकर बनाए हैं। गायत्री घर पर जाती हैं और रोशनी से बोलती है बहन हमारे अचार सब को बहुत पसंद आए उनको और चाहिए।                                                                                                                                                                         अगले दिन रोशनी ने 20 किलो आम तोड़े और उसका अचार बनाया ऐसे करते करते रोशनी का बनाया हुआ अचार मशहूर  हो गया।अब  गायत्री किसी के घर काम नहीं करने जाती ।एक दिन रौशनी ने कहा कि,  क्यों ना हम एक छोटी सी दुकान खोले  जिसमें हम आम का अचार बनाने के लिए लोगों को रखें जिससे हम ज्यादा अचार बना सकेंगे  और हम ज्यादा बेच  पाएंगे इससे हमारी कमाई भी अच्छी होगी। गायत्री ने कहा जैसा आप समझो बहन रोशनी नए कर्मचारियों को रखा और अचार बनाने का काम चालू कर दिया,  रोशनी को यहाँ रहते हुए 5 साल हो चुके थे। किरन  अब 12 साल की हो गई थी, किरन  भी सबके साथ मिलकर मदद कर ती  और अपनी पढ़ाई भी। गायत्री ने रौशनी से कहा कि यह सब आप की देन है, अगर आप उस दिन हमारे घर के सामने नहीं मिलती तो आज भी में लोगों के घरों में काम करती। रौशनी  ने कहा यह तुम्हारे नसीब में था इसलिए तुम्हें मिला मैं नहीं तो भी तुम्हें मिलता ।गायत्री ने कहा यह तो आपका बडकप्पन  है । गायत्री अब बहुत बड़ी कंपनी की मालकिन बन चुकी थी । गायत्री,  रोशनी की बहुत इज्जत करती और किरन  रोशनी से बहुत प्यार।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           एक दिन रोशनी ने कहा,  गायत्री क्यों ना हम और कर्मचारियों को भर्ती करें जो लोग बेरोजगार हैं,  हम उन्हें काम देंगे तो हमें दुआएं मिलेंगी ।गायत्री ने कहा बिल्कुल सही कहा आपने हम कल ही गांव के आसपास  अपनी कंपनी का पोस्टर लगवा देते हैं ताकि लोगों को पता चले और लोग हमारे पास काम लेने आए हैं।                                                                                                                                                                                    वहां रोशनी के घर पर उसके भाई बहनों ने अपना सब कुछ गंवा दिया था उन्होंने कोई काम नहीं किया जितना भी पैसा था उन्होंने ऐसो आराम में उड़ा दिया ।अब राधा और रानी की नौकरी भी नहीं रही क्योंकि वह लोग घर पर बैठी थी अब उन्हें कोई नौकरी नहीं देना चाहता था ।कमल और रवि को भी कोई नौकरी नहीं देना चाहता था क्योंकि उन्होंने कहीं पर भी काम नहीं किया था इसलिए उन्हें कोई काम पर नहीं रखना चाहता था। चारों भाई बहन बहुत परेशान थे राधा और रानी  के पति वैसे भी काम नहीं करते थे ।सब ने सब कुछ खत्म कर दिया था सभी पैसे खत्म हो चुके थे। बस घर था वह भी गिरवी ।                                                                                                                                                                                                                  एक दिन की बात है कमल कहीं से आ रहा था और उसकी नजर उस पोस्टर पर पड़ी उसने सोचा क्यों ना मैं यहां पर जाकर काम करूं। वह घर पर गया और उसने यह बात सबको बताएं सभी भाई-बहनों ने  कहा क्यों नहीं? हम सब मिलकर   काम करेंगे तो,  कम से कम हमें खाने पीने  की दिक्कत तो नहीं होगी। चारों भाई बहन और राधा रानी के पति उस पोस्टर के  लिखे हुए पते पर पहुंच गए ।कमल ने वहां के कर्मचारी से पूछा कि तुम्हारी मालकिन कहां है, उसने कहा हमारी मालकिन वहां खड़ी  हैं। कमल ने गायत्री  से हाथ जोड़कर कहा कि हमें नौकरी चाहिए हम बहुत परेशान हैं हम लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं है मेरा बहुत बड़ा परिवार है। गायत्री,  हमने यह पोस्टर इसलिए लगाया था कि सभी लोगों को काम मिल सके सभी लोग अपना और अपने परिवार का पेट भर सके,  कमल ने  गायत्री के पैर पकड़े और कहा कि बहन आप जैसे लोग दुनिया में कहां मिलते हैं। गायत्री ने कहा यह सब मैंने नहीं किया यह मेरी बहन ने किया है ।अगर शुक्रिया करना है तो उसका जाकर करो ।कमल ने कहा कि वह कहां मिलेंगी ।  गायत्री बोली वहां देखो वहां पर खड़ी है मेरी बहन,  कमल और सारे भाई बहन जाकर रोशनी का पैर पकड़ कर उसका धन्यवाद करने लगे कि आपकी वजह से हमें यह काम मिला नहीं तो  हम लोग तो भूखे ही मर रहे थे,  हमारे पास कुछ भी नहीं है हम बहुत दूर से आए हैं। रोशनी को  आवाजे जानी पहचानी लग रही थी उसने सोचा आखिर यह लोग हैं कौन?  कमल जैसे खड़ा हुआ और उसने रोशनी को देखा, वह  दंग रह गया उसने कहा,   दीदी आप हमें छोड़ कर कहां चले गए थे।                                                                                                                                                                                                                                                      किरन ने  सब बातें सुन ली उसने जाकर तुरंत अपनी मां से कहा कि मां वह सब तो रोशनी मौसी को जानते हैं ।गायत्री आई और गायत्री ने रोशनी से पूछा बहन, आप इन सब को जानती हो उसने कहा कि हां यह सारे मेरे भाई बहन हैं,  गायत्री ने कहा लेकिन आपने तो कहा था आपका कोई नहीं, रोशनी ने कहा इन लोगों के लिए मैं मर चुकी थी। गायत्री को यह  बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और उसने उन सब को वहां से निकलने को कहा सारे भाई बहन रोशनी से अपनी गलतियों की माफी मांगने लगे रोशनी को अपने साथ ले जाने को कहा। गायत्री ने कहा कि कहीं नहीं जाएंगे यह हमारे साथ ही रहेंगे तब तुम कहां थे जब तुमने उनको दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया था और ढूंढने की कोशिश भी नहीं की । जब तुम्हारे पास पैसा नहीं बचा तब तुम आए और फिर ले जाकर फिर इनको धक्का मार के घर से निकालना चाहोगे। मैं अपनी रोशनी को कहीं नहीं जाने दूंगी तुम लोग यहां से जा सकते हो ।   आखिरकार वह सब रोशनी के भाई बहन थे रोशनी ने उन्हें माफ कर दिया,  लेकिन रोशनी उनके साथ नहीं गई सभी भाई-बहन निराश होकर चले गए । सभी भाई बहनो को अपनी गलती का एहसास हुआ।,,,,,,,,कहानी समाप्त 

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