एक छोटे से गांव में एक सुखी परिवार रहता था । रतन सुखियां और उनके पांच बच्चे, रोशनी(15 वर्ष ),रानी(12 वर्ष ) और राधा(10 वर्ष ) तीन बेटियां, कमल(8 वर्ष ), रवि(6 वर्ष ) दो बेटे। रतन गांव में एक पोस्टमैन था। एक दिन की बात है रतन को उसके ऑफिस से लेटर आता है, उसमें लिखा था कि रतन की पोस्टिंग बड़े शहर में हो गई है और सैलरी भी ज्यादा मिलेगी यह बात सुनकर सब बहुत खुश हैं लेकिन रतन अपने परिवार को छोड़कर नहीं जाना चाहता था। रतन:- मैं खुश तो हूं लेकिन मैं तुम सबको छोड़कर नहीं जाना चाहता, मैं क्या करूं नहीं समझ में आ रहा? सुखियां:- आप इतना क्यों सोच रहे हो? इतना अच्छा मौका मिला है आपको जाना चाहिए, मैं यहां पर ख्याल रख लूंगी, आप अगर बड़े शहर में जाएंगे तो हमारे बच्चों का भविष्य बहुत अच्छा होगा। रतन :- तुम ठीक कह रही हो सुखिया, मैं जाऊंगा अपने बच्चों के लिए। कुछ दिन बाद रतन बड़े शहर जाने के लिए तैयार हो गया सबकी आंखों में आंसू थे। रतन ने अपने बच्चों को गले लगाया और कहा मां का ख्याल रखना सभी बोले, हां पापा, हम माँ का ख्याल रखेंगे। रतन अपने नए ऑफिस पहुंच जाता है। वहां पर उसे रहने को घर,खाना सब कुछ था । रतन इमानदारी से अपना काम करता, सभी बड़े साहेब रतन से बहुत खुश रहते। रतन हर महीने अपने गांव चिट्ठी भेजता वह बहुत खुश था कि वह अपने परिवार की हर जरूरत पूरी कर पा रहा है। रतन को 2 साल हो गए थे यहां पर आए हुए आज रतन अपने गांव जाने वाला है। सुखिया और सभी बच्चे बहुत खुश थे कि आज पापा आने वाले हैं। कुछ ही देर में रतन अपने घर पर आ जाता है और सबके लिए बहुत अच्छे तोफे भी लेकर आया ।सब बहुत खुश हैं लेकिन रतन को कुछ ही हफ्तों में अपने काम पर वापस जाना था । रवि :- पापा कुछ दिन और रुक जाओ । रतन :- नहीं बेटा काम पर जाना जरूरी है। रोशनी:- कुछ दिन और रुक जाते "पापा" तो बहुत अच्छा होता । रतन :- मैं भी रुकना चाहता हूं लेकिन काम पर भी जाना बहुत जरूरी है, मुझे सिर्फ 3 हफ्तों की छुट्टी मिली थी अब मुझे जाना होगा । अगले दिन रतन अपने ऑफिस को निकल गया। सबने रतन को खुशी खुशी विदा किया। रतन अपने शहर पहुंच चुका था ।अगले दिन से वह अपने काम पर पहुंच गया और मन लगाकर काम करने लगा। 3 साल हो चुके थे रतन अपने गांव नहीं गया वह रोज चिट्ठी भेजता। सभी पूछते कि गांव कब आओगे? रतन बोला छुट्टी नहीं मिल रही है । एक साल बाद रतन के ऑफिस से खत आया खत में लिखा था रतन बहुत बीमार है यह बात सुनकर सुखिया और उसका परिवार बहुत परेशान हो गए और अगले ही दिन सुखिया रतन से मिलने शहर चली गई सुखिया शहर पहुंच गई थी रतन हॉस्पिटल में भर्ती था सुखिया रतन से मिलने हॉस्पिटल गए । रतन :- तुम बच्चों को छोड़कर क्यों आए? मैं तो ठीक था मुझे ज्यादा कुछ नहीं हुआ है। सुखिया:- हम सबको तुम्हारी चिंता हो रही थी इसलिए मैं तुम्हें देखने आ गए, तुम जब तक ठीक नहीं हो जाते मैं यही रहूंगी । रतन :- नहीं,,,,,,,नहीं,,,,,, नहीं,,,,, तुम्हें बच्चों के पास रहना चाहिए। सुखियां :- रोशनी सब का ख्याल रख लेगी अब रोशनी बड़ी हो गई है। रतन:- हां पता है लेकिन फिर भी। सुखिया :- मैं अभी नहीं जाऊंगी जब तक आप ठीक नहीं हो जाओगे, आप कितना भी बोलो, रतन, ठीक है । कुछ दिनों में रतन हॉस्पिटल से घर आ गया अब वह ठीक था। सुखिया उस का बहुत ख्याल रखती ।अगले दिन से ही रतन अपने ऑफिस जाने लगा सुखिया ने मना किया लेकिन वह बोला मैं अब ठीक हूं तुम घर जाओ। सुखिया कुछ दिन और रुकी और फिर अपने गांव चली गई । सुखियां अपने गांव पहुंच गए। रोशनी, राधा, रानी, मां पापा कैसे हैं? सुखिया ठीक है तुम्हारे पापा, अब तो वे काम पर भी जाने लगे हैं, इसलिए मैं आ गई । 6 महीने बाद रतन के ऑफिस से खत आया । सुखिया ने जैसे ही खत खोलकर पड़ा वह बेहोश हो गई सभी बच्चे चिल्लाने लगे मां क्या हुआ? बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी वहां पर आ गए लोगों ने पूछा क्या हुआ? रोशनी ने चिट्ठी को पढ़ा और रोने लगी उसने ने कहा कि अब पापा नहीं रहे, सभी बहुत दुखी हुए सुखिया को थोड़ी देर में होश आ गया सब बेहाल थे ।इतना बड़ा सदमा झेल नहीं पा रहे थे। यह कैसे हो गया पापा तो ठीक थे? फिर कैसे हो गया? अगले दिन सुखिया और रोशनी रतन के शहर गए । रतन का अंतिम संस्कार हो चुका था। सुखियां और रोशनी रतन से आखरी बार मिल भी नहीं पाए वह दोनों एक दूसरे को पकड़कर बहुत रोए और रतन का सारा सामान लेकर गांव को चले गए। सुखिया बहुत परेशान रहती कि अब मैं क्या करूं? मैं तो ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हूं कि मुझे कोई अच्छा काम मिल जाए। रतन कुछ पैसे छोड़ कर गया था उन पैसों से कुछ महीने तो घर चला लेकिन उसके बाद सुखिया को खेतों में जाकर काम करना पड़ा । रोशनी:- मां मैं भी तुम्हारे साथ कल से खेत में चलूंगी आप अकेले ही घर को संभालती हैं मैं भी अब से साथ में चलूंगी। सुखिया:- नहीं तुम नहीं चलोगी तुम्हें घर देखना है और अपनी पढ़ाई पूरी करनी है ।तुम्हारे पापा कभी भी अपने बच्चों से काम नहीं करवाते तो मैं कैसे करवा लूं? रोशनी :- मां मैं पढ़ाई भी करूंगी और आपके साथ काम भी मैं दोनों कर सकती हूं आप बस मुझे साथ में चलने को कहो हम दोनों मिलकर करेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा ।कुछ महीनों में मेरी पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी। सुखियां :- ठीक है बेटा, चलो लेकिन तुम्हें अच्छे नंबरों से भी पास होना है। ठीक है मां । एक दिन की बात है रतन के ऑफिस से एक खत आया ।खत में लिखा था कि रतन की जगह उसके घर के किसी एक सदस्य को नौकरी मिल जाएगी। खत पढ़कर सुखिया बहुत खुश हूंइ । अगले दिन वह रोशनी को लेकर रतन के शहर उसके ऑफिस गए। वहां पर उसने बड़े साहब को खत दिखाया और कहा कि साहब आपने कहा था कि किसी एक को नौकरी मिलेगी । मेरी बेटी पढ़ी लिखी है यह नौकरी इसे ही मिलनी चाहिए । बड़े साहब बोले नहीं यहां पर औरतें काम नहीं कर सकती । सुखिया:- क्यों नहीं? मेरी बेटी बहुत अच्छी है बहुत समझदार है और अच्छे नंबरों से पास भी हुई है तो उसे क्यों नहीं मिल सकती नौकरी? बड़े साहब ने कहा कि यहां पर औरतें काम नहीं करती है। सुखियां बोली यह तो गलत बात है। मेरा बेटा बहुत छोटा है जब तक वह बड़ा नहीं हो जाता तब तक तो रोशनी को काम पर रख लो लेकिन बड़े साहब नहीं माने ।रोशनी और सुखिया गांव वापस चले जाते हैं। सुखिया बहुत दुखी थी कि वह ऐसा कैसे कर सकते हैं? रोशनी ने कहा कि मां हमें फिर से वहां जाना चाहिए और वहां के कर्मचारियों से बात करनी चाहिए क्या पता वह हमारा साथ दें? सुखिया ने कहा हां बेटा तुम्हारे पिताजी को सब बहुत अच्छे से जानते थे शायद हमें कुछ मदद मिल जाए। अगले दिन रोशनी और सुखियां शहर को जाते हैं और सभी कर्मचारियों से बात करते हैं सारे कर्मचारी बोलते हैं कि, बड़े साहब ऐसा कैसे कर सकते हैं? जब उनका बड़ा बेटा नहीं है तो बड़ी बेटी ही यह नौकरी करेगी हम बड़े साहब से बात करेंगे, सभी कर्मचारी बड़े साहब के पास जाते हैं और बोलते हैं कि, आप को रोशनी को नौकरी देनी ही पड़ेगी ।हमें कोई आपत्ति नहीं है कि हमारे बीच में कोई महिला काम करें ।बड़े साहब बोले कि, नहीं ऐसा नहीं हो सकता। सभी कर्मचारियों ने बड़े साहब से कहा कि अगर आपने ऐसा नहीं किया तो हम लोग हड़ताल पर बैठ जाएंगे ।बड़े साहब डर गए और उन्होंने रोशनी को नौकरी दे दी । सुखिया ने बोला साहब क्या रोशनी मेरे गांव में यह नौकरी कर सकती है। बड़े साहब ने कहा नहीं इतनी जल्दी तबादला नहीं हो सकता यहां पर 3 साल तो नौकरी करनी ही पड़ेगी। सुखिया परेशान थी कि मेरी बेटी अकेले कैसे रहेगी? रोशनी, मां आप चिंता मत करो मैं अपना ख्याल रख लूंगी आप घर जाओ और मेरे भाइयों और बहनों का ख्याल रखो अब आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं मैं अपने भाई बहनों को बहुत काबिल बनाऊंगी । रोशनी अपना काम मन लगा कर करती । उसका काम देखकर बड़े साहब बहुत खुश हुए । रोशनी को काम करते हुए 3 साल हो चुके थे, साहब ने उसका तबादला उसके गांव में कर दिया और साथ ही साथ उसे उस पोस्ट ऑफिस का मैनेजर भी बना दिया। रोशनी बहुत खुश थी। वह अगले दिन अपने गांव चली गई सुखिया रोशनी को देखकर बहुत खुश हुई । तभी राधा, कमल, रवि और रानी रोशनी को गले लगाते है और बोलते है , दीदी मै और रानी अद्यापिका बन गए है, कमल और रवि बोलते है हम भी कुछ महीनो में डॉक्टर और वकील बन जाएगे दीदी, रोशनी बहुत खुश होती है। सुखियां :- रोशनी बेटा अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए, तुम्हारे लिए बहुत रिश्ते आते हैं तुम कहो तो मैं बात करूं। तुम्हारी शादी हो जाएगी तो राधा, रानी की शादी की बात चलाएंगे । रोशनी:- नहीं मां, मैं अभी शादी नहीं करूंगी, पहले कमल और रवि अपनी पढ़ाई पूरी कर ले ।तब शादी करूंगी । सुखिया:- कैसी बात कर रही हो बेटा? तुम्हारी उम्र हो गई है शादी की, तुम शादी कर लो वह दोनों तो पढ़ने में बहुत अच्छे हैं,रोशनी नहीं मां मैं अभी शादी नहीं करूंगी, सुखिया जैसी तुम्हारी मर्जी बेटा अभी नहीं तो कुछ महीने बाद सही । "कुछ महीने बाद" कमल और रवि ने डॉक्टर और वकील की डिग्री प्राप्त करली थी, वह बहुत अच्छे नंबरों से पास हुए, रोशनी बहुत खुश थी ।सुखिया बोली बेटा अब तो तुम शादी करोगी ना, रोशनी बोली, नहीं मैं अभी नहीं । पहले कमल और रवि को कहीं अच्छा काम मिल जाए ।सुखिया बोली बेटा उसे तो अच्छा काम मिल ही जाएगा आखिरकार दोनों के पास डॉक्टर वकील की डिग्री है । हां पता है मां मुझे, मिल जाएगा काम तो मैं शादी कर लूंगी। "कुछ साल बाद" रोशनी ने बहुत तरक्की कर ली थी अब रोशनी उस गांव के साथ-साथ आसपास के गांव के पोस्ट ऑफिस की प्रमुख अध्यक्ष थी । सुखियां अब हमेशा बीमार रहती, रोशनी उसका बहुत ख्याल रखती । सुखिया ने बोला बेटा रोशनी मेरे जाने के बाद तुम अपने भाई बहनों का ख्याल रखना, वह अभी नासमझ है। रोशनी ने कहां, हां माँ, मैं अपने भाई बहनों का ख्याल रखूगी । इतना कहते ही सुखिया ने अपना दम तोड़ दिया, सभी भाई बहन बहुत रोए ।रोशनी ने शादी नहीं की कि, वह अपने भाई-बहनों को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। राधा और रानी ने कहा भी कि दीदी आप शादी कर लो, लेकिन रोशनी ने कहा, नहीं मैं तुम लोगों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। कुछ महीनों में रोशनी ने राधा और रानी की शादी कर दी और लड़कों से यह प्रस्ताव रखा कि वह लोग हमारे साथ ही रहेंगे लड़के वाले मान गए और यह सब रोशनी के घर में ही रहने लगे ।कमल और रवि को अभी तक कोई काम नहीं मिला था। वह दोनों काम भी नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उनके मन में यह था कि जब इतना पैसा है हमारे पास तो हम काम क्यों करें? जब जरूरत होगी तो देखेंगे। कुछ महीनों बाद रोशनी ने कमल और रवि की भी शादी कर दी रोशनी बहुत अच्छा कमाती थी । इसलिए वह अपने पूरे परिवार का ख्याल रख पाती, वह हमेशा कमल और रवि को काम करने को बोलती तो कमल, रवि बोलते, दीदी आप हमें पैसे दे दो हम अपना अपना काम खोल लेंगे ।रोशनी ने कहा, नहीं तुम्हें अपने दम पर सब कुछ करना होगा मैं तुम्हें कोई पैसा नहीं दूंगी तुम्हें बाहर जाकर काम ढूंढना होगा तुम्हारे पास तो अच्छी खासी डिग्रियां है ।कमल और रवि को रोशनी की यह बात नहीं अच्छी लगी ।उन्होंने मन में सोचा क्या सब कुछ रोशनी दीदी का ही है? हम लोगों का इस पर कोई अधिकार नहीं ।रोशनी तो केवल अपने भाई बहन को इतना काबिल बनाना चाहती थी कि, उन्हें रोशनी की कभी जरूरत ना पड़े। लेकिन कमल और रवि के मन में लालच था। राधा और रानी बस अपने खर्चे लायक ही कमा पा रही थी ।उनके भी दोनों पति काम नहीं करते थे उनके मन में भी लालच था कि जब इतना सब कुछ है तो काम करने की क्या जरूरत? रोशनी यह सब देख कर बहुत दुखी रहती कि मैं अपने भाइयों और अपनी बहनों के पति को कैसे समझाऊं? रोशनी हर साल अपनी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा, अनाथ आश्रम में देती थी यह बात चारों भाई बहनों को बिल्कुल पसंद नहीं थी। रोशनी ने शादी नहीं की उसने अपना जीवन अपने भाई-बहनों को समर्पित किया, लेकिन उसके भाई बहनों ने उसकी कोई कदर नहीं की । यह देखकर रोशनी को बहुत दुख हुआ और उसने अपना सब कुछ अपने चारों भाई बहनों में बांट दिया । रोशनी ने अपने पास, कुछ भी नहीं रखा यह बात चारों भाई बहनों को पता थी ।कमल की पत्नी ने कहा कि दीदी का यहां पर क्या काम? दीदी को कहीं वृद्धा आश्रम में छोड़ आते हैं दीदी वही रह लेंगी । सभी भाई-बहन इस बात से सहमत हो गए। रोशनी ने उनकी यह सारी बातें सुन ली और उसे बहुत दुख हुआ कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने भाई-बहनों को दे उन्होंने मुझे क्या दिया? वह दुखी होकर अपना घर और गांव छोड़कर वहां से बहुत दूर चली जाती है, रोशनी एक छोटे से गांव में पहुंचती हैं और एक घर के सामने बेहोश हो जाती हैं ।
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