"अगले दिन" गुरुदेव ने सातों भाइयों को बुलाया और सातों को एक काम दिया । सातो ने वह काम बखूबी तरीके से पूरा किया। गुरुदेव छह भाइयों की खूबियों का पता लगाना चाहते थे । धीरे धीरे करके गुरुदेव को बाकी सब की खूबियों के बारे में पता चल जाता है । रवि की तलवार की रफ्तार के आगे कोई भी टिक नहीं पाता । सोमवार बहुत ताकतवर और बाहुबली था । वह किसी भी मजबूत चीज का चूरमा बना देता । मंगल बहुत अच्छा तीर बाज था। उसका निशाना कभी नहीं चूकता । बुद्ध आने वाली किसी भी घटना या खुशी को देखने की क्षमता रखता था। गुरु के अंदर अनोखी कला थी। वह लोगों के डर का इस्तेमाल करके उन्हें प्राजित करता । शुक्र बहुत बुद्धिमान था। वह हर प्रश्न का उत्तर तुरंत देता । शनि के अंदर कोई खास खूबी नहीं थी वह एक आम लड़का था । उसे संगीत से बहुत प्यार था और वह बहुत अच्छा गायक भी था लेकिन शनि अपने भाइयों जैसा बिल्कुल नहीं था । सातों भाई महल वापस लौटते हैं, गुरुदेव भी उनके साथ जाते हैं ।राजा अपने सातों बेटों को देखकर बहुत प्रसन्न होता है और गुरुदेव को सर झुका कर प्रणाम करता है। "गुरुदेव राजा से बोलते हैं" पुत्र तुम्हारे सातो पुत्र अपने हर काम में निपुण हैं । तुम्हारे 6 पुत्र हमेशा तुम्हें युद्ध में विजय प्राप्त करा आएंगे । "राजा कहता है" गुरुदेव 6 पुत्र क्यों मेरे तो सात पुत्र है? "गुरुदेव बोलते हैं" हां पुत्र पता है लेकिन तुम्हारा सातवां पुत्र, शनि उसके अंदर युद्ध में जाने जैसी कोई खूबी नहीं है । वह एक आम लड़का है ।राजा यह बात सुनकर बहुत दुखी होते हैं कि मेरा सातवां पुत्र अपने भाइयों जैसा शूरवीर नहीं है ।गुरुदेव जाते जाते राजा को कुछ जड़ी बूटियां देते हैं और बोलते हैं की, तुम्हें यह जड़ी बूटियां शनि को रोज देना है ।राजा पूछता है क्यों गुरुदेव? "गुरुदेव बोलते हैं" शनि दिल का बहुत कमजोर है इसलिए उसे यह जड़ी बूटियां पूरी जिंदगी खानी है । राजा बोलता है जैसी आपकी आज्ञा । गुरुदेव वहां से चले जाते हैं । अब राजा को कोई भी राज्य प्राजित नहीं कर पाता, उसके छह बेटे बहुत कमाल के थे । राजा को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता । पड़ोसी राज्य कभी भी उनसे युद्ध नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हें पता था कि वह उनसे से नहीं जीत पाएंगे ।राजा बहुत खुश था,राजा को अपने बेटो पर बहुत नाज था । लेकिन वह शनि को लेकर हमेशा परेशान रहते ।सारे भाई शनि को बहुत प्यार करते, उसका बहुत ख्याल रखते, उसे कभी भी यह एहसास नहीं दिलाते कि वह खास नहीं है ।उसे हमेशा खास होने का एहसास दिलाते, शनि बहुत खुश रहता। एक दिन शनि ने अपने पिता से कहा कि, पिताजी मुझे बहुत बड़ा गायक बनना है जिसके लिए मुझे संगीत सीखना होगा ।राजा कहता है क्यों नहीं बेटा तुम जहां जाना चाहते हैं वहां जाकर संगीत सीख सकते हो । शनि बोलता है मैं वीरेंद्र मामा के यहां जाकर संगीत सीखना चाहता हूं वहां पर बहुत अच्छे गुरु हैं ।राजा सारा बंदबस करा देता है और शनि अपने मामा के यहां पहुंच जाता है । वीरेंद्र शनि को देख कर बहुत खुश होता है और गले लगाया। पुत्र तुम आ गए, "शनि बोलता है" हां मामा "महेंद्र बोलता है" मैं कल ही तुम्हें संगीत आश्रम में ले चलूंगा और गुरु जी से मिल लेना । तुम्हें वहीं रहकर शिक्षा ग्रहण करनी होगी, "शनि कहता है" कोई बात नहीं मामा जी मैं वहां रह लूंगा । मुझे पता है बेटा तुम रह लोगे । अगले दिन वीरेंद्र शनि को लेकर गुरुजी के आश्रम पहुंचता है, शनि बहुत खुश था । शनि ने गुरु जी को प्रणाम किया और कहा कि मुझे आप से ही संगीत सीखना है गुरु जी बोलते क्यों नहीं पुत्र अवश्य? तुम आज से ही अपना अभ्यास प्रारंभ कर दो।शनि बोलता है, जी गुरुजी और वीरेंद्र वहा से चला जाता है । शनि बहुत अच्छा शिष्य था ।वह बहुत जल्दी संगीत कला सीखने लगा था, गुरुजी उसे बहुत पसंद थे, शनि गुरु जी का प्रिय शिष्य था। शनि को शिक्षा प्राप्त करते हुए 1 माह हो चुके थे । शनि पूरी तरह संगीत सीख चुका था, वह बहुत अच्छा गायक था, अब शनि को वहां पर सिर्फ 20 दिन और रहना था । एक दिन की बात है ।आश्रम में एक बहुत सुंदर लड़की संगीत सीखने आई हुई थी। शनि की नजर उस पर पड़ी और वह उसे देखता रह गया । वह बहुत सुंदर थी । कुछ देर में सभी लोग संगीत की कक्षा में उपस्थित हुए वहां पर वह सुंदर लड़की भी थी । गुरुजी ने कहा यह हमारी नई शिष्या हैं इनका नाम मोहिनी है । गुरु जी बोलते हैं, मोहिनी तुम शनि के साथ रहोगी वह संगीत में बहुत अच्छा है । तुम्हे उससे बहुत मदद मिलेगी, मोहनी कहती है, जी गुरुजी । शनि मोहिनी को संगीत सिखाता, मोहिनी को शनि का संगीत बहुत पसंद था ।मोहिनी बोलती है, तुम बहुत अच्छा गाते हो । तुम कौन से राज्य से हो? शनि बोलता है में खुशीनगर से हु, मोहिनी बोलती है क्या तुम सच बोल रहे हो? क्या तुम उन सात भाइयो में से हो? तुम्हारे सारे भाई बहुत कमाल के है, लेकिन तुम यहाँ पर क्यों? शनि बोलता है में अपने भाइयो जैसा नहीं हु। शनि को वापस जाने में सिर्फ 15 दिन बाकी हैं । एक दिन मोहिनी शनि से मिलने उसके कक्ष में जाती हैं । सनी उस वक्त अपनी दवा खा रहा था ।मोहिनी बोलती है, शनि तुम यह दवा क्यों खाते हो? शनि बोलता है, अगर मैं यह दवा नहीं खाऊंगा तो मेरी सांस फूलने लगती है । मोहिनी कहती है, तुमने कभी यह दवाई बंद की, शनि बोलता है, नहीं मैंने यह दवाई कभी नहीं बंद की, मोहिनी बोलती है, तो तुम एक दिन यह दवाई मत खाओ और देखो क्या तुम्हारी सांस फूलती है? शनि बोलता है, नहीं पिताजी को पता चला तो वह बहुत गुस्सा होंगे । मोहिनी बोलती है नहीं किसी को नहीं पता चलेगा तुम बस एक दिन मत खाओ । शनि मोहिनी की बात को मान लेता है और उस दिन दवा नहीं खाता । शनि ने आज दवाई नहीं खाई । कुछ देर बाद शनि मोहिनी के पास जाता है बोलता है कि, आज मैंने दवा नहीं खाई मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे लग रहा है मैं आज आजाद हो गया हूं ।मोहिनी बोलती है, मैंने कहा था ना तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम अब इन दवाइयों को कभी मत खाना। शनि बोलता है, हां तुम बिल्कुल ठीक बोल रही हो। पता नहीं क्यों पिताजी मुझे दवाई खाने को बोलते थे? शनि के 20 दिन पूरे होने वाले थे , अब उसे वापस अपने घर जाना था ।शनि और मोहिनी एक दूसरे को चाहने लगे थे । एक दिन मोहिनी शनि से बोलती है, मेरी मां बीमार है मैं उनको देखने जा रही हूं मैं कल तक आऊंगी । शनि बोलता है मैं भी चलूं, मोहिनी कहती है, नहीं तुम नहीं चल सकते । शनि बोलता है कोई बात नहीं तुम जाओ । मोहिनी अपनी मां से मिलने नहीं गई थी मोहिनी उस जगह गई थी जहां पर शनि और उसके छह भाइयों ने शिक्षा ग्रहण की थी । गुरुदेव जी के आश्रम । मोहिनी गुरुदेव के आश्रम पहुंच जाती हैं और उस दिन गुरुदेव आश्रम में नहीं होते हैं । मोहिनी सीधे ही गुरुदेव के कक्ष में पहुंच जाती हैं और सातों भाइयों की पत्रिकाएं ढूंढने लगती हैं जिसमें गुरुदेव ने उनके बारे में लिखा हुआ है वह अपने हर शिष्य का लेखा-जोखा रखते थे । मोहिनी ढूंढती हैं लेकिन मोहिनी को नहीं मिलता, मोहनी को 6 भाइयो की पत्रिका मिलजाती है । लेकिन शनि की नहीं मिलती । मोहिनी गुस्से में सामान फेंकने लगती है, तभी उसकी नजर एक बस्से पर पड़ती है मोहिनी उस बस्से को खोलती है तो उसमे शनि की पत्रिका मिल जाती है । मोहिनी पत्रिका को पढ़ती है और वह से चली जाती है । अगले दिन मोहिनी आश्रम पहुंच जाती हैं। वह शनि से बोलती हैं शनि अब तुम यह दवाइयां कभी भी नहीं खाओगे ।शनि बोलता है, क्यों मेरी तबीयत अगर कभी खराब हो गई तो यह दवाइयां काम आएंगी? मोहिनी बोलती है, नहीं ऐसा नहीं होगा तुम इन दवाइयों को फेंक दो, शनि बोलता है, नहीं मैं नहीं फेकूंगा । मोहिनी कहती है कि, क्या तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं? क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते? तुम्हें लगता है मैं तुम्हारा बुरा चाहती हूं, शनि बोलता है, नहीं मुझे पता है तुम मेरा बुरा नहीं चाहती हो, मोहिनीं बोलती है, तो फिर तुम यह दवाइयां नहीं खाओगे मेरे लिए, शनि दवाइयों को फेंक देता है और मोहिनी को गले लगा लेता है ।मोहिनी शनि से बोलती है, शनि, क्या मैं तुम्हारे राज्य में चल सकती हूं? मेने सुना है खुशीनगर बहुत सुन्दर है । शनि बोलता है, क्यों नहीं तुम चल सकती हो । मोहिनी कहती है, मैं तुम्हारे भाइयों से भी मिल लूंगी, शनि कहता है कि, बिल्कुल ठीक है तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी मुलाकात अपनी मां से कराऊंगा और उन्हें हमारे बारे में भी बता दूंगा । मोहिनी बोलती है, ठीक है फिर हम 3 दिन बाद यहां से चलेंगे, शनि बोलता है, ठीक है । कई दिनों बाद गुरुदेव अपने आश्रम पहुंचते हैं और आश्रम की दशा देखकर वह चकित रह जाते हैं कि यह कैसे हुआ? सारा सामान इधर-उधर क्यों फैला हुआ है? गुरुदेव तुरंत बक्से को खोलते हैं और देखते हैं कि उसमें शनि की पत्रिका नहीं है, वह बहुत चिंतित हो जाते हैं और तुरंत खुशीनगर राज्य की ओर चल पड़ते हैं। गुरुदेव राजा से मुलाकात करते हैं और राजा को सारी बात बताते हैं ।राजा भी बहुत चिंतित हो जाता है कि आखिर कौन ले गया होगा शनि की पत्रिका? अगर किसी गलत इंसान के हाथ लग गई तो बहुत अनर्थ हो जाएगा । बुद्ध गुरुदेव और राजा की सारी बातें सुन लेता है और पूछता है पिताजी क्या हुआ? आप लोग इतना परेशान क्यों है? क्या था शनि की पत्रिका में? गुरुदेव बोलते हैं, बेटा तुम तो आने वाला कल देख सकते हो तो देखो आने वाले कल में क्या होने वाला है?बुध अपनी आंखें बंद करता है और देखता है कि पूरा राज्य तहस-नहस होगया है कोई भी नहीं बचा सभी लोग मर चुके हैं । बुध तुरंत आंखें खोलता है और बोलता है कि गुरुदेव हमारा पूरा राज्य नष्ट हो चुका है और हम में से कोई भी नहीं बचा । गुरुदेव बोलते हैं, मुझे जिसका डर था वही हुआ, बुध पूछता है, ऐसा क्या था शनि की पत्रिका में? गुरुदेव बोलते हैं की, शनि का दिमाग बहुत तेज है वह अपने दिमाग से बड़ी से बड़ी इमारत बड़े से बड़ा राज्य नष्ट कर सकता है और उसकी पत्रिका गायब है अगर किसी गलत इंसान के हाथ लग गई तो यह राज्य खतरे में आ जाएगा ।राजा बोलता है, अगर यह पत्रिका किसी शत्रु के हाथ लग गई तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाएगा। अब हमें वह पत्रिका ढूंढनी पड़ेगी। बुध कहता है लेकिन पिताजी कैसे हमें तो पता भी नहीं है कि पत्रिका लेकर कौन गया? बुध बोलता है, तो पिताजी शनि को जो आप दवाइयां देते थे वह इसीलिए थी ताकि कोई उसके दिमाग के साथ खेल ना सके, गुरुदेव बोलते हैं बिल्कुल, बुध, तुम सही समझे इसलिए वे दवा दी थी, ताकि उसके दिमाग का इस्तेमाल कोई गलत इंसान ना कर पाए ।सभी बहुत चिंतित होते हैं कि अब क्या होगा? गुरुदेव बोलते हैं शनि कब तक महल लौटने वाला है? राजा बोलता है वह कल तक आ जाएगा । गुरुदेव कहते हैं, तो मैं कल तक यहीं पर उसका इंतजार करता हूं । यह पत्रिका किसी गलत इंसान के हाथ नहीं लगनी चाहिए । अगले दिन शनि मोहिनी के साथ अपने महल पहुंच जाता है । शनि अपने पिता और गुरुदेव को सर झुका कर प्रणाम करता है और मोहिनी का परिचय कराता है ।शनि बोलता है, पिताजी यह मोहिनी है, हम एक साथ संगीत की शिक्षा प्राप्त करते थे । मोहिनी को हमारा राज्य देखना था। राजा बोलता है, क्यों नहीं यह हमारा सौभाग्य होगा? शनि अपने भाइयों से गले मिलता है और अपने और मोहिनी के बारे में सब बता देता है, सभी भाई शनि के लिए बहुत खुश थे । मोहिनी सब से मिल लेती हैं, सब मोहिनी को देखकर बहुत खुश होते हैं कि, इतनी सुंदर लड़की लेकिन, गुरुदेव बार-बार मोहिनी को देखते रहते वह किसी सोच में डूबे थे, उनके मन में बार-बार ख्याल आ रहा था कि कहीं तोइस लड़की को मैंने देखा है, लेकिन कहां यह याद नहीं आ रहा । राजा शनि को अकेले में ले जाकर पूछते हैं, बेटा तुम्हारे साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ, शनि कहता है, पिताजी आप ऐसा क्यों बोल रहे हो? बस बेटा तुम बहुत दिनों बाद आए हो इसलिए, नहीं पिताजी मुझे कुछ नहीं हुआ है, मैं बिल्कुल ठीक हूं, मोहिनी मेरा बहुत ख्याल रखती थी ।राजा गुरुदेव से कहता है, गुरुदेव जी शनि बिल्कुल ठीक है उसे कुछ भी नहीं हुआ। गुरुदेव शनि के पास जाते हैं और कहते हैं, तुम अपनी दवाइयां ले रहे हो, शनि बोलने ही वाला होता है की मोहिनी कहती है शनि तुमने अपनी दवाई मेरे थैले में रख दी थी यह लो । गुरुदेव कहते हैं, इस दवाई को हमेशा लेना कभी छोड़ना मत। शनि सोच में पड़ जाता है कि दवाइयां तो मैंने फेंक दी थी तो मोहिनी के पास कहां से आई? शनि मोहिनी से पूछता है कि यह दवाई कहां से आई? मोहिनी कहती है, मैंने उठा ली थी । लेकिन तुमने तो कहा था फेक दो, तो मोहिनी बोलती है, मैंने सोचा कि कभी काम आ सकती है शनि बोलता है तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो। गुरुदेव राजा से विदा लेते हुए अपने आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं।
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