Thursday, August 8, 2019

जूठी थाली

यह कहानी 6 साल के अमित की है । अमित अपने माता (सरोज) पिता (अरविंद) और दादी (गीता) के साथ रहता है। अमित अपनी दादी से बहुत प्यार करता है, वह अपनी दादी का बहुत ख्याल रखता, अमित की दादी ने  चार गाय पाल रक्खी  थी। वह उनका बहुत ख्याल रखती अमित भी  अपनी दादी के साथ उनका ख्याल रखता ।अमित की दादी रोज रात को गाय को चारा डालने जाती  और उनके साथ थोड़ा वक्त बिताती । अमित, सरोज और अरविंद खाना खा रहे होते हैं, तभी अमित पूछता है,  मां,  दादी हमारे साथ क्यों नहीं खाना खा रहे?  सरोज बोलती है बेटा वह अपनी गाय को खाना खिला रही है अभी आएंगे तो खा लेंगे। थोड़ी देर में सब खाना खा लेते है.  अमित की दादी आती है और बैठती है,  सरोज उन्हें एक टूटी फूटी थाली में सबका जूठा खाना गीता की थाली में परोस देती है.  अमित यह सब देख रहा होता है.  वह  पूछता है,  मां,  आपने दादी को हमारा छोड़ा हुआ खाना क्यों दिया? सरोज बोलती है,  बेटा इसलिए क्योंकि जूठा खाने से प्यार बढ़ता है और हम सब दादी से बहुत प्यार करते हैं और वह हम सब का जूठा  खाएंगे तो और प्यार बढ़ेगा ।अमित तो 6 साल का नादान बच्चा था उसे क्या पता कि उसकी मां क्या कर रही है?  अमित  बोलता हूं,  तो अच्छी बात है मां अब दादी मुझे बहुत प्यार करेगी क्योंकि वह मेरा, पापा का और आपका जूठा खा रही है।  रात को अमित दादी से बोलता है  अब आप मुझे बहुत ज्यादा प्यार करोगी, गीता बोलती हां बेटा अमित को अपनी मां की बात पर  पूरा विश्वास हो जाता है।                                                                                                                                                                                                                                                        अगले दिन अमित का जन्मदिन था ।  घर पर दावत थी । सभी खास रिश्तेदार आए थे मामा, मौसी, चाचा, बुआ बस यही लोग। जब रात को सब खाना खा के  अपनी  अपनी थाली छोड़ दिए तो अमित अपनी दादी की थाली लेकर गया और सब का जूठा अपनी दादी की  थाली  में डालने लगा सब ने पूछा बेटा यह तुम क्या कर रहे हो?  तो अमित बोला मैं आप सबका जूठा दादी को दे रहा हूं दादी अगर आप सबका जूठा खाएगी तो दादी सब से बहुत प्यार करेगी सब लोग यह बात सुनकर चौक चाहते हैं कि यह 6 साल का बच्चा कह कह रहा है अरविंद पूछता है बेटा यह तुमसे किसने कहा। अमित बोलता है, मां,  ने कहा मां दादी को रोज आपका, मेरा और अपना जूठा खाना  खाने  को देती थी और बोलती थी कि इससे बहुत प्यार बढ़ेगा ।यह सब सुनते सभी लोग बहुत दुखी होते हैं कि सरोज गीता के साथ कितना बुरा व्यवहार करती है ।अरविंद और सब ने मिलकर सरोज को बहुत सुनाया तुम्हें 6 साल के बच्चे को इतनी गलत बात कैसे सिखा ।सकती हो ।तुम  मां को सब का जूठा खाना कैसे दे सकती हो? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?  सरोज को बहुत डांट सरोज को बहुत गुस्सा आया उसने मन ही मन में सोचा यह सब बुढ़िया की वजह से हुआ है इसने ही सबके कान भरे होंगे।                                                                                                                                                                                                          एक दिन गीता की तबीयत बहुत खराब हो जाती है और वह  अपने आप उठ  बैठ नहीं पा रही थी ।रोज रोज सरोज उसे उठाती, लेकिन वह भी ऊपरी मन से। सरोज मन ही मन में सोचती बुढ़िया मर क्यों नहीं जाती?  मुझे परेशान करके रखा है । रात को डॉक्टर आते हैं और बोलते हैं माताजी को चीनी से बनी कोई चीज है मत देना इनको चीनी से बहुत खतरा है, अगर  चीनी खाएंगे तो बहुत ज्यादा बीमार हो जाएंगे,  इसलिए इन्हें चीनी बिल्कुल भी मत देना। सरोज इसी बात का फायदा उठाती  हैं और रोज एक गिलास दूध गीता को देती हैं यह देख कर अरविन्द  बहुत खुश होता है कि सरोज मेरी मां का कितना ख्याल रखती है। लेकिन सरोज तो उस दूध में बहुत अधिक मात्रा में चीनी मिलाकर गीता को देती । गीता उसको पी लेती और कुछ नहीं बोलती । वह रोज ऐसा  करती,  गीता की तबीयत दिन-ब-दिन बहुत ख़राब होती जा  रही थी ।                                                                                                                                                                                                                                         कुछ हफ़्ते बाद गीता की तबीयत बहुत खराब हो गई घर पर डॉक्टर आए ।डॉक्टर ने गीता को चेक किया और कहा कि अब इनका बचना नामुमकिन है किसी ने इनको चीनी तो नहीं खिलाई, सरोज बोली नहीं नहीं हम में से किसने इनको चीनी का एक दाना भी नहीं दिया हमें पता है चीनी  की वजह से तबीयत खराब हो जाएगी, गीता  कुछ भी नहीं बोली उसने मन में सोच में तो चली जाउंगी,  सब बता कर क्यों अपने बेटे की जिंदगी ख़राब करू ।                                                                                                                                                                                                 कुछ ही घंटों बाद गीता अपना दम तोड़ देती हैं ।अमित बर्दाश्त नहीं कर पाता वह बहुत रोता  है । सब लोग  बहुत रोते हैं,  सरोज भी बहुत होती है लेकिन सिर्फ ऊपरी मन से ।                                                                                                                                                                                                                            15 साल बाद अब अमित बड़ा हो चुका था उसकी शादी भी हो गई। एक दिन अमित अपनी  दादी के  कमरे में गया उसे उसकी दादी की रिपोर्ट मिली, रिपोर्ट में लिखा था कि ज्यादा चीनी खाने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई,  लेकिन अमित  सोचने लगा की दादी  ने  तो चीनी कभी खाई नहीं, माँ ने  तो कभी चीनी नहीं दी तो दादी को चीनी किसने दी?   अमित  सोचने लगा, डॉक्टर से जाकर बात करता हु,  वही मुझे सब  बताएंगे। तभी रास्ते में उसे उसके चाचा मिलते हैं और अमित की मां,  सरोज के बारे में उसको बताते हैं कि किस तरह से वह तुम सब का जूठा तुम्हारी दादी को देती और तुम को कहती इसे  से प्यार बढ़ेगा ।अमित यह बात सुनकर बहुत दुखी होता है कि माँ ऐसा कैसे कर सकती है?  अमित  समझ जाता है की हो ना हो,  मां ने  हीं दादी को चीनी खिलाई होगी,   मां इस बात को नहीं कबुल करेगी, मुझे उसे कबूल करवाना होगा और वह घर चला जाता है।                                                                                                                                                                                         अमित घर पर जाता है है और अपनी पत्नी को दादी की थाली देते हुए कहता है की अब से इसी में माँ को खाना देना है लेकिन अमित की पत्नी मीरा बोलती है की इतनी गंदी थाली में में माँ को कैसे कहना  दे सकती हु?  माँ क्या सोचेगी  मेरे बारे में?  अमित बोलता है जोभी सोचे तूमे इसी में खाना देना है और है सबका जूठा देना है। मीरा बोलती है यह गलत है,अमित बोलता है में जो कह रहा हु बस उतना करो बाकि सब तुमे  बाद में पता चल जाएग,  मीरा बोलती है ठीक है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                अगले दिन जब सब खाना खा लेते हैं तो अमित अपनी मां को खाने के लिए बुलाता है। मीरा टूटी फूटी थाली में सबका जूठा उसे देती है, सरोज बोलती हैं, तु,  मुझे सबका जूठा दे रही है, तुझे शर्म नहीं आती,  अभी मैं अपने बेटे से बोलती हूं,  सरोज अमित को बुलाती है और बोलती है देख तेरी पत्नी मुझे सब का जूठा खाना खिला रही है । अमित बोलता है,  मां आप ने  तो कहा था कि सब का जूठा खाने से प्यार बढ़ता है,  तो मैं चाहता हूं आप सबका जूठा खाएं इससे आप हम सब को बहुत प्यार करोगी। यह सब सुनकर सरोज चुप हो जाती है उसके पास कोई जवाब नहीं होता और वह खाना छोड़ कर वहां से चली जाती हैं । अब रोज यही होता कितने दिन तक सरोज खाना नहीं खाएगी उसको मजबूरी में  वही खाना खाना पड़ता है ।सरोज बहुत रोती सरोज ने अमित को अपने कमरे में बुलाया और कहा मैं जूठा खाना नहीं खा सकती मुझे दिक्कत होती है अपनी पत्नी को  मना कर दे। तू तो मेरा अपना बेटा है वह तो पराई है, तु  तो समझ अमित कहता है नहीं मां हम चाहते हैं कि तुम हमें बहुत प्यार करो । सरोज बोलती है मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, अमित ने कहा , तुमने अभी कहा ना मीरा को पराई है,  तो तुम  मीरा को प्यार नहीं करती इसलिए तुम्हें मीरा का जूठा तो खाना ही पड़ेगा । ऐसा रोज होता ।                                                                                                                                                                                         एक दिन सरोज की तबीयत बहुत खराब हो गई डॉक्टर घर पर आए, डॉक्टर ने कहा ज्यादा कुछ नहीं हुआ है बस थोड़ी कमजोरी हो गई है । थोड़ा आराम करेंगे तो ठीक हो जाएंगे । इन्हे रोज एक गिलास दूध दिया करो । अमित मीरा से बोलता है की तुम रोज माँ को एक गिलाश दूध दिया करो, मीरा बोलती है ठीक  है। अमित रोज दूध में थोड़ा ताकत का पाउडर मिलाता है ।मीरा सरोज को दूध  दे देती ।                                                                                                                                                                            एक दिन अमित सरोज के पास गया और कहा मां मीरा जो तुमे  दूध  देती है, उसमें थोड़ा थोड़ा जहर मिला कर देती है, अब तुम कुछ ही दिनों की मेहमान हो ।यह सुनकर सरोज के होश उड़ जाते हैं और वह  चिल्लाने लगती है मीरा,  मीरा आती है, सरोज  बोलती है तूने मुझे जहर दिया, तु  मुझे मरना चाहती हैं । मीरा बोलती  नहीं माँ  मैंने अपको  जहर नहीं  दिया मैं तो सिर्फ आपको दूध देती थी । मीरा  रोने लगती है। अमित बोलता है नहीं माँ मीरा ने जहर नहीं मिलाया, अमित बोलता है मां कैसा लग रहा है?  जब आपको पता चला कि दूध में जहर है तो आपको बहुत तकलीफ हो रही है ना । आपने  दादी के  दूध में चीनी मिलाई थी ना इसीलिए दादी हमारे बिच नहीं है ।  सरोज अपनी गलती कबूल करती हैं और सब से माफी मांगती है और बोलती  हैं मुझे आप हॉस्पिटल ले चलो नही  तो मैं मर जाऊंगी ।अमित बोलता है, माँ  तुम्हें कुछ नहीं होगा मैंने उसमें ताकत का पाउडर मिलाया मीरा ने कुछ नहीं मिलाया था मैंने ही पाउडर मिलाकर आपको भेज देता ।सरोज को थोड़ी राहत हुई सरोज ने अपनी गलती की माफी मांगी लेकिन अरविंद,  सरोज को माफ नहीं किया और ना ही अमित ने । अब सरोज अकेले ही रहती है उसे कोई मतलब नहीं रखता।

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