Wednesday, August 14, 2019

मेरा प्यारा टेडी बियर "मुक्कु" (तीसरा भाग)

अगले दिन काव्या और मुक्कु  सोचते हैं कि, अब क्या करें?  तभी मुक्कू बोलता है, क्यों ना हम सुबोध के पास चलें क्या पता वह हमारी  कुछ मदद कर सके?  काव्या कहती हैं....... तुम बिल्कुल ठीक बोल रहे हो......मुक्कु......  चलो चलते हैं। दोनों सुबोध के घर जाते हैं और सुबोध को  पेन दिखाते हैं। काव्या बोलती हैं...... सुबोध अंकल......हमें पुल के नीचे यह मिला है और यह पेन किसका है यह भी हमें पता चल गया है? यह पापा के ऑफिस में ही काम करने वाले किसी कर्मचारी का है। सुबोध बोलता है...... क्या तुम लोगों को उसका नाम पता है?  काव्या कहती  हैं...... नाम तो नहीं पता लेकिन हमें उसका घर का पता,  पता है। सुबोध पूछता है...... क्या है पता...... काव्या बताती हैं...... सुबोध समझ जाता है कि किसका घर है। सुबोध काव्या से कहता है...... यह पैन मुझे दे दो मैं पता करता हूं, आखिरकार उसने ऐसा क्यों किया? वह तो हमारा बहुत अच्छा दोस्त था। काव्या और मुक्कु  वहां से चले जाते हैं।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             कुछ हफ्ते बीत चुके होते हैं, लेकिन सुबोध का कोई जवाब नहीं आता। काव्या  परेशान हो जाती हैं कि,  सुबोध अंकल कुछ बोल क्यों नहीं रहे?  वह कहां चले गए उनसे मुलाकात भी नहीं हो पा रही है। मुक्कु कहता है...... ऐसा करते हैं, जिसका यह पेन है, हम उसी से जाकर क्यों नहीं बात करते हैं? काव्या कहती  हैं...... अगर हम उससे बात करेंगे, तो  क्या पता वह खतरनाक हो?  हमारे ऊपर हमला कर दे,  ऐसा मैं नहीं कर सकती, मुझे कुछ हो गया तो मां किसके सहारे जीए गी।  मुक्कु बोलता  है...... एक बार जाकर पता तो करते हैं बाकी हम सब देख लेंगे...... काव्या कहती  हैं...... चलो चलते हैं, शायद कुछ पता चल सके। काव्या पेन वाले आदमी के घर जाती  हैं और दरवाजा खटखटाती  हैं, बूढ़ा आदमी बाहर निकलता है बोलता है...... बेटा तुम  फिर से आ गइ......काव्या कहती हैं...... हां...... काव्या, बूढ़े आदमी से पूछती हैं...... पहले आप अपना नाम तो बताओ मुझे...... बूढ़ा आदमी बोलता है...... पहले ये बताओ तुम हो कौन?  काव्या कहती हैं...... मैं रंजीत की बेटी हूं......बूढ़ा आदमी कहता है...... अच्छा तुम रंजीत की बेटी हो,रंजीत  के बारे में सुनकर बहुत बुरा लगा...... मेरा नाम अमरजीत है। काव्य बोलती  हैं...... क्या आप मेरे पापा को जानते थे...... अमरजीत कहता है...... हां  क्यों नहीं, बहुत अच्छे इंसान थे। काव्या पेन के बारे में अमरजीत  से पूछती  हैं...... क्या आपके पास कोई डायमंड पेन  है...... अमरजीत,हां   डायमंड पेन  तो था, लेकिन वह खो गया। काव्या चौक जाती,और बोलती है......आप झूठ बोल रहे हो, आप ने हीं मेरे पापा को धक्का दिया, आपने मेरे पापा को पुल  पर से धक्का दिया था...... अमरजीत कहता है...... नहीं बेटा...... मैंने पुल पर से रंजीत को धक्का नहीं दिया, मैं तो वहां पर था ही नहीं मेरा पेन तो ऑफिस में ही चोरी हो गया था, मैंने बहुत ढूंढा लेकिन नहीं मिला फिर मैंने पुलिस कंप्लेंट भी की लेकिन मेरा पेन नहीं मिला...... काव्या बोलती है...... वह पेन मेरे पास है...... अमरजीत बोलता है...... बेटा अगर पेन  तुम्हारे पास है, तो  बेटा वह पेन बहुत कीमती है, इसलिए नहीं की उसपर  पर डायमंड लगा है, बल्कि इसलिए, क्युकी वह एक पेन नहीं, एक पेनड्राइव है...... काव्या बोलती है...... क्या बोल रहे हो आप, वह पेनड्राइव है...... अमरजीत बोलता है...... हां बेटा...... बेटा, तुम्हारे पापा और मैं बहुत अच्छे दोस्त थे, हम बहुत ईमानदारी से अपना काम करते, लेकिन हमारा एक तीसरा दोस्त था, जो हमेशा जल्दी तरक्की पाना चाहता था । तुम तो  रंजीत की कंपनी में ही काम करती हो, तुम्हें तो पता होगा कि वह केमिकल फैक्ट्री है, हमारा तीसरा दोस्त केमिकल चोरी करता और बेचा करता, इसके बारे में रंजीत को पता चल गया था और रंजीत ने मुझे बताया रंजीत ने हमारे तीसरे दोस्त की  चोरी करते हुए, वीडियो बना लिया था और वही वीडियो उस पेनड्राइव में था लेकिन यह बात हमारे दोस्त को पता चल गई और पता नहीं कैसे उसने वह पेनड्राइव चोरी कर लिया और उसी रात रंजीत का एक्सीडेंट भी हो गया, लेकिन मुझे  नहीं पता, यह दोनों घटनाएं एक साथ मिलती हैं या नहीं। काव्या कहती है...... अमरजीत अंकल, पापा का एक्सीडेंट नहीं हुआ था, उनको किसी ने पुल  से धक्का दिया था ......अमरजीत बोलता है क्या बात कर रही हो बेटा क्या यह सही है?  काव्या बोलती है...... हां, यह बिल्कुल सही है, पापा को किसी ने धक्का दिया था, पापा तो बच गए थे लेकिन किसी ने पीछे से आकर धक्का दिया। अमरजीत सोच में पड़ जाता है, तभी अमरजीत को याद आता है कि मेरा पेन तो चोरी हो गया था, तो तुम्हें पेन पुल के नीचे कैसे मिला?  इसका मतलब तुम्हारे पापा को उसी ने गिराया है, काव्या पूछती है, किसने...... अमरजीत कहता है पहले तुम पेन दो...... काव्या कहती है...... वह मेरे पास नहीं है, उसको मैंने पापा के दोस्त को दे दिया...... अमरजीत......किस को बेटा......काव्या...... वह आए थे उन्होंने ही बताया था कि तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट नहीं उनको किसी ने धक्का दिया था,तो मैं उस पुल के नीचे गई और वह पेन  लेकर आई, तभी मैं उस दिन आई थी,ये पता करने की वो पेन  आपका है या किसी और का......अमरजीत,तूमने, क्यों नहीं बताया पेन के बारे में......काव्या......मुझे लगा की अगर मेने आपको बता दिया तो आप कही हमें   नुकसान  ना पहुचाओ, हम जानना चाहते थे,कि आपने मेरे पापा को क्यों धक्का दिया। अमरजीत मैंने तुम्हारे पापा को धक्का नहीं दिया वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त था, अभी तुम लोग घर जाओ बहुत रात हो गइ  है ।                                                                                                                                                                                                                                                                                         अगले दिन अमरजीत काव्या के घर आता है । अमरजीत काव्या से पूछता है......तुमने पेन किसको दिया?   काव्या बोलती है ......सुबोध अंकल को...... अमरजीत बहुत परेशान हो जाता है और बोलता है कि, बेटा ये तुमने क्या किया, सुबोध ही तो वह आदमी है जो केमिकल की चोरी करता था, हो ना उसी ने तुम्हारे पापा को धक्का दिया होगा, उसे पता था कि उसी पेनड्राइव  में उसका पूरा काला चिट्ठा है और तुमने उसे वह पेन दे  दिया उसने पेन नष्ट कर दिया तो, वह  कभी पकड़ा भी नहीं  जाएगा ।  मुक्कू बोलता है...... नहीं भाग पाएगा...... काव्या बोलती है, क्यों तुम्हें कैसे पता? मुक्कु  बोलता है कि, जब तुम पेन  लेकर आई थी, तो गलती से पेन मुझसे नीचे गिर गया और  उसके दो टुकड़े हो गए,  जब मैंने पेन  को उठाया तो उसके अंदर पेनड्राइव था, मैंने पेनड्राइव  निकाल कर उसके अंदर कागज भरकर पेन उसको दे दिया। काव्या, मुक्कु को गले लगाती है और बोलती है वाह तुम तो बहुत समझदार हो गए हो । मुक्कू पेनड्राइव बाहर निकालता है और अमरजीत को देता है, अमरजीत पूरा वीडियो देखता  हैं और पता चल जाता है कि सुबोध ही केमिकल चुरा कर बेचा करता था, रंजीत ने  वीडियो सूट किया  था , इसलिए तो उसने रंजीत को  जान से मार डाला ।                                                                                                                                                                                                                                       काव्या, अमरजीत और  मुक्कू,  तीनों सुबोध के घर गए । सुबोध अमरजीत को देखकर डर गया। अमरजीत ने कहा, तूने काव्या को सब झूठ बताया और कहा कि जिसका यह पेन  है, उसने रंजीत को धक्का दिया, रंजीत को धक्का  तूने दिया था, मैंने नहीं,  तू केमिकल की चोरी करता था । सुबोध बोलता है अब तुम सब मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्यों की पेन मेरे पास है अमरजीत पेन खोल के तो देख सुबोध पेन खोलता है उसमे सिर्फ कागज निकलता है अमरजीत अब तू नहीं बचेगा, तूने ही रंजीत को धक्का दिया था,  बोल जल्दी, सुबोध हां हां, हां, मुझे माफ़ करदो, मुझे जाने दो, वो पेन मुझे देदो, अमरजीत अब वो पेन तुझे कभी नहीं मिलेगा क्युकी मेने वो पेन पुलिस को देदिया।  काव्या बोलती है...... तुमने अच्छा नहीं किया, तूने बहुत गलत किया मेरे पापा के साथ, हमारे साथ, तभी पुलिस आ जाती है और सुबोध को पकड़ लेती  हैं, जाते-जाते सुबोध बोलता  है...... जब मेने तुम्हारे पापा को धक्का दिया तो उनके हाथ में एक बैग था, जैसे वे नीचे गिरे तो बोहत तेज बिजली कड़की थी शायद गाड़ी गिरी हो इसलिए, सुबोध को पुलिस लेके चली जाती है सब अपने घर चले जाते है ।                                                                                                                                                                                             अगले दिन,  काव्या इस सोच में पड़ जाती है कि, बिजली कैसे कड़की? पापा की कार तो नीचे गिरी ही नहीं थी, कार तो अभी भी हमारे पास है, बिजली कैसे कड़की, तभी काव्या को पिकनिक का दिन याद आता है कि, उस दिन भी बिजली की वजह से मेरा मुक्कू मर गया था, इसका मतलब वह बिजली मुक्कु की वजह से कड़की । काव्या मुक्कू के पास जाती है और पूछती है......मुक्कु सच बताओ, उस दिन क्या हुआ था? मुक्कु बोलता है......  जब पापा और मै नीचे गिरे तो बहुत तेज बिजली कड़की, उस बिजली की वजह से पापा की  सारी यादें, सारी अच्छाइयां, बाकी हर चीज मुझ में समा गई, इसलिए मैं पापा की तरह सोचता हूं, पापा की  तरह काम करता हूं । काव्या मुक्कु को गले लगाती है, बोलती है, मेरा प्यारा मुक्कू, इसका मतलब जो हमारी मदद कर रहा था ,वह पापा थे , मुक्कु बोलता है......  बिल्कुल ठीक कहा, पापा की यादें मेरे अंदर है अब पापा हमारे साथ हमेशा रहेंगे।...... ...... ...... कहानी समाप्त 

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