Monday, September 2, 2019

साहसी रेनू और राक्षस (पहला भाग)

यह कहानी दो 👬 भाई बहनों की है। रेनू और रवि......दोनों भाई बहन अपनी नानी के साथ रहते हैं क्योंकि,  जब वह छोटे थे,  तभी उनके माता-पिता गुजर गए,  तो उनकी नानी ने उन्हें पाला पोसा। रवि और रेनू अपनी  नानी के साथ उनके गांव में रहते हैं। नानी ने  रेनू और रवि को बड़े शहर पढ़ने को भेजा हुआ था ।                                                                                                                                                                                                                                           कई वर्षों बाद दोनों अपनी नानी से मिलने गांव जाने वाले थे। रेनू बड़ी थी रवि छोटा............आज शाम 6:00 बजे,  दोनों की ट्रेन थी,  दोनों समय पर रेलवे स्टेशन पहुंच गए और ट्रेन में बैठ गए । नानी के गांव जाने में पूरे 20 घंटे लगते थे । ट्रेन चालू हो चुकी थी,  दोनों भाई बहन बहुत खुश थे कि वह नानी के पास जा रहे हैं,  इतने सालों बाद,  नानी बहुत खुश होगी। सभी ट्रेन में सो जाते हैं। रेनू भी रवि को बोलती है कि तुम भी सो जाओ ।                                                                                                                                                                                               रात  के लगभग 1:00 बज रहे थे  और ट्रेन एक सुनसान रास्ते पर रुक गइ ,  जहां पर सिर्फ जंगल ही जंगल था। अचानक रवि की नींद खुलती  हैं,  वह रेनू से कहता है............दीदी ट्रेन जंगल में रुकी है............रेनू बोलती हैं, तू  सो जा सिग्नल नहीं होगा इसलिए ट्रेन रुकी होगी अभी ट्रेन थोड़ी देर में चलेगी। लगभग 1 घंटे हो जाते हैं लेकिन ट्रेन नहीं चलती,  रवि बोर हो जाता है उसे नींद ही नहीं आ रही थी, वह अपना फोन चलाने लगता है, बाहर इतना अंधेरा था कि कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। रवि ने अपने फोन की टॉर्च जलाइ और बाहर का नजारा देखने लगा, तभी उसे अचानक दो चमकती हुई आंखें दिखी,  रवि डर गया । रवि बोलता है............ दीदी उठो बाहर कोई है?  रेनू बोली............ तू अभी तक सोया नहीं मैंने तुझे कहा ना तू सो जा तू टॉर्च क्यों जला रहा है?  तू सोता क्यों नहीं?  रवि बोलता है............नहीं दीदी बाहर कोई था, उसकी आंखें चमक रही थी । रेनू बोलती है............तेरा वेहम होगा, वह जुगनू होंगे, गांव में जुगनू भी होते हैं सो जा, अब सिर्फ 5 घंटे बाकी हैं,  नानी का गांव आने में............रवि रेनू सो जाते हैं,  लेकिन रवि को बार-बार वही  नजर आ रह था । रवि फिर उठता है और  उसे फिर से वह दोनों आंखें नजर आती  हैं, वह डर जाता है और चिल्लाने लगता है, ट्रेन में लगभग सभी लोग उठ जाते हैं। क्यों चिल्लाया क्या हुआ, सभी लोग रवि से पूछते हैं?  रवि बोलता है............बाहर कोई है,  ट्रेन में सभी लोग बाहर देखने लगते हैं लेकिन कुछ नहीं होता है। रवि कहता है............नहीं कुछ तो था। सभी रवि को डांटने लगते हैं कि इतनी रात को तुम मोबाइल क्यों चला रहा है, तूने मोबाइल में ही कुछ देखा होगा, तू  चुपचाप सो जा ।                                                                                                                                                                                                                                                                     थोड़ी देर में ही ट्रेन चालू हो जाती  हैं। ट्रेन में बहुत अंधेरा होता है। रवि को बहुत डर लग रहा था । उसने सोचा क्यों ना मैं लाइटजलालु उसने जैसे ही लाइट जलाई ऊपर कि सीट पर एक अजीबो गरीब आदमी बैठा हुआ था। रवि डर गया और चिल्लाने लगा, सभी ट्रेन वाले फिर से उठ गए।  अब क्या हुआ, फिर क्यों चिल्लाया ?  रवि बोला............ऊपर कोई बैठा है, बहुत अजीब है और उसकी आंखें बहुत चमक रही हैं। ट्रेन में एक आदमी बोला............तू फिर से चालू हो गया अब तू चिल्लाया तो तुझे में  ट्रेन से उतार दूंगा । रेनू बोलती है............नहीं भाई,  बच्चा है,  डर गया है,  माफी मांगती हूं मैं आपसे,  रेनू रवि को डाटती है और बोलती है............तू अब  सोएगा,  मुझे अपना मोबाइल दे,  दिन भर मोबाइल चलाता है। रेनू,  रवि का मोबाइल ले लेती  हैं। रवि को कहां नींद आने वाली थी। वह बहुत डरा हुआ था,  उसकी बात पर कोई विश्वास नहीं कर रहा था । रवि ने सोचा,  फिर से एक बार बाहर देखूं कोई है तो नहीं,  वह देखने लगा तभी नीचे की सीट पर फिर से वही आदमी बैठा था,  रवि फिर चिल्लाया। रेनू उठी और बोली............तू  फिर चिल्लाने लगा,  नहीं दीदी,  वहां देखो कोई बैठा है। रेनू ने देखा तो वहां पर सच में  कोई बैठा था,  रेनू भी डर गई,  यह क्या चीज है,  यह तो बहुत अजीब है,  दिख भी नहीं रहा है,  सिर्फ आंखें ही चमक रही है। जिस सीट पर बैठा था, उस पर एक आदमी सोया था। रवि उसे बुलाता है............अंकल उठो, अंकल उठो,  आदमी बोलता है............क्या रे तूने तो सबको परेशान कर दिया,  क्या हुआ क्यों उठा रहा है, मुझे?  अंकल आपके पैर के पास कोई बैठा है............कौन बैठा है मेरे पैर के पास,  जैसे ही आदमी ने उठकर देखा एक अजीबो गरीब आदमी उसके पास बैठा था, वह डर  गया और चिल्लाने लगा । सभी ट्रेन वाले उठ गए, तभी वह आदमी भी गायब हो गया सभी पूछने लगे क्या हुआ,  फिर से लड़का, चिल्लाया क्या?                                                                                                                                                                                                                                                                                  रवि,  रेनू और वह आदमी बहुत डरे हुए थे ।आदमी बोला............नहीं नहीं यहां पर सच में कोई था,  यह लड़का झूठ नहीं बोल रहा है,  सभी ट्रेन वाले डर जाते हैं, बोलते हैं क्या था?  रवि कहता है............पता नहीं क्या था?  कुछ समझ में नहीं आया बहुत अजीब था उसके पैर नहीं थे। सभी ट्रेन वाले बहुत डरे हुए होते हैं। वह कहते हैं कि चलो पुलिस को फोन करें क्या पता कोई चोर घुस आया हो?  रेनू फोन लगाती हैं, लेकिन नेटवर्क नहीं था । सभी लोग फोन लगाने की कोशिश करते हैं लेकिन किसी के भी फोन में नेटवर्क नहीं था। सभी बोलते हैं............एक साथ सब का नेटवर्क कैसे जा सकता है? कुछ तो गड़बड़ है हमें ड्राइवर को यह बात बतानी पड़ेगी,  तभी एक आदमी ड्राइवर की ओर  जाने लगता है,  तभी वह अजीबो गरीब आदमी उसके सामने आ जाता है। इस बार सबने उसे देखा वह एक राक्षस था। सब डर जाते हैं, सब चिल्लाने लगते हैं तुम कौन हो तुम्हें क्या चाहिए?  वह रवि की तरफ इशारा करता है। रेनू, रवि को अपनी तरफ खींच लेती हैं,  बोलती है............मेरा भाई क्यों?  फिर से राक्षस  रवि की तरफ इशारा करता है और बोलता है............यह चाहिए, यह लड़का चाहिए............रेनू बोलती है............नहीं मैं अपना भाई तुम्हें नहीं दूंगी। ट्रेन में सभी लोग डरे होते हैं कोई भी ड्राइवर के पास पहुंच नहीं पाता,  जो भी कोशिश करता,  राक्षस उसे चोट पहुचाता , सभी ट्रेन में थे, कुछ लोग रेनू और रवि की तरफ से थे, तो कुछ लोग यह बोल रहे थे कि क्यों ना तुम इस लड़के को उस राक्षस को दे दो कम से कम हम सबकी जान तो बचेगी?                                                                                                                                                                                                                                                             रेनू बोलती है............ तुम लोग क्या कह रहे हो? तुम चाहते हो मैं अपने भाई को इस राक्षस कर दे दूं,  मैं ऐसा नहीं करूंगी। सभी ट्रेन वाले बोलते हैं............तो तुम क्या चाहती हो कि एक जान के बदले हजारों जाने चली जाए?  रवि बहुत रोता है............दीदी मैं नहीं जाऊंगा इस राक्षस के साथ............रेनू  कहती है............मैं तुझे नहीं जाने दूंगी तू डर मत । उसी ट्रैन में एक लड़का था ।गोपाल।  गोपाल बोलता है............तुम डरो मत, मैं तुम लोगों के साथ हूं, यह राक्षस तुम्हारा कुछ नहीं करेगा हम रवि को इसे  नहीं देंगे। ट्रेन वाले चिल्लाने लगते हैं कि,  नहीं इस लड़के को राक्षस को सौंप दो तभी हम लोग बचेंगे। जो भी रवि को बचाने की कोशिश करता,  राक्षस उसे घायल करदेता,  राक्षस ने  किसी को   जान से नहीं मारा था,  लेकिन कई लोग बहुत गंभीर रूप से घायल थे । ट्रेन में सभी लोग बोलने लगे कि,  तुम्हें रवि को राक्षस को देना होगा,  नहीं तो इन सब की जान चली जाएगी,  इन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत है। रेनू बहुत परेशान हो जाती हैं कि, अब मैं क्या करूं कैसे अपने भाई को बचाऊ । रेनू,  रवि से कहती हैं............भाई तुझे अब इस राक्षस के साथ जाना होगा............रवि कहता है............ नहीं दीदी,  मैं नहीं जाऊंगा,  मुझे बहुत डर लगता है। रेनू रवि को समझाती हैं कि, अगर तुम इसके साथ नहीं गया तो यह सब को मारेगा और अभी तो सब लोग घायल हैं लेकिन क्या पता इनमें से कई लोगों की जान चली जाए, क्या तू यही चाहता है कि,  तेरी वजह से हजारों लोगों की जान चली जाए । रवि बोलता है............नहीं दीदी............रेनू कहती है............मेरे भाई, तू इस राक्षस के  साथ चला  जा,  मैं मुझे जरूर बचाने  आऊंगी,  यह मेरा वादा है············· रवि कहता है............लेकिन यह मुझे खा गया तो............रेनू कहती है............नहीं यह तुम्हें नहीं खाएगा क्योंकि अगर इसे तुम्हें खाना होता तो यह किसी को भी खा सकता था, यह बस तुम्हें अपने साथ ले जाना चाहता है इसने किसी को जान से भी नहीं मारा सिर्फ सब को घायल किया है, तुम इसके साथ जाओ मेरे भाई,  मैं तुम्हें जरूर बचाने  आऊंगी। रवि,  रेनू की बात मान जाता है और उस राक्षस के साथ चला जाता है, रेनू बहुत रोती है और कुछ ही घंटों में नानी का गांव भी आ जाता है।

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