Wednesday, September 4, 2019

साहसी रेनू और राक्षस (तीसरा भाग)


रेनू और गोपाल ट्रेन का इंतजार करते हैं। शाम होने वाली थी । रेनू,  गोपाल से बोलती है............ गोपाल, कुछ ही घंटों में ट्रेन आ जाएगी,  लेकिन हम ट्रेन में सभी लोगों को समझा तो लेंगे,  लेकिन जो छोटे बच्चे हैं वह थोड़ी समझेंगे उनकी नींद अगर खुल गई तो उन्होंने राक्षस को देख लिया तो । गोपाल बोलता है............ तुम फिकर मत करो,  मेरे पास कुछ जड़ी बूटियां है जो मैं सभी बच्चों को दे दूंगा वह थोड़ी-थोड़ी खा लेगे । रेनू पूछती है............ कैसी जड़ी बूटी?  गोपाल कहता है............ यह जड़ी बूटी खाने से नींद आती है और इससे किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। रेनू पूछती हैं............ तुमको कहां से मिली यह जड़ी-बूटी?  गोपाल ने कहा............ मैंने जंगल में ढूंढा तो मुझे यह जड़ी बूटी मिल गई। रेनू बोलती है............ यह तुमने अच्छा किया।                                                                                                                                                                                                                        आधी रात हो  चुकी थी। ट्रेन आकर जंगल में रुक गई,  जैसे ही ट्रेन रुकी,  रेनू और गोपाल ट्रेन में चढ़ गए और सभी पैसेंजर को सारी बात बताने  लगे,  सारे पैसेंजर बहुत डरे हुए थे। गोपाल  ने कहा............ डरो मत,  यह जड़ी-बूटी अपने बच्चो  को थोड़ी थोड़ी खिला दो ताकि उन्हें नींद आ जाए। कुछ ही देर में वह राक्षस ट्रेन में आएगा,  कोई भी मत उठना, सभी लोग सोए रहना चाहे,  कुछ भी हो जाए,  सभी पैसेंजर बोलते हैं............ ठीक है,  हम तुम्हारी बात जरूर मानेंगे। रेनू, गोपाल ट्रेन से उतर जाते हैं तभी वह देखते हैं कि राक्षस ट्रेन के पास खड़ा है। राक्षस इंतजार कर रहा था कि कोई बच्चा उसे देखें लेकिन कोई भी बच्चा उसे नहीं देख रहा था। वह ट्रेन के अंदर गया लेकिन ट्रेन में सभी लोग सो रहे थे, कोई हलचल नहीं थी। राक्षस ध्यान से हर जगह देखने लगा, सभी बच्चों ने तो नींद की जड़ी-बूटी खाई थी तो वह कहां जगने वाले थे। राक्षस ने  थोड़ा इंतजार किया लेकिन कोई नहीं जगा, राक्षस वहां से चला गया और ट्रेन भी चालू हो गई, जैसे ही ट्रेन गई राक्षस जाने लगा। रेनू और गोपाल राक्षस का पीछा करने लगे, थोड़ी दूर जाकर एक छोटी सी कुटिया थी,  उस कुटिया में राक्षस चला गया। रेनू और गोपाल कुटिया के बाहर खड़े होकर अंदर देखने लगे,  अंदर सभी बच्चे थे,  रवि भी लेकिन रेनू बहुत दंग थी  कि कोई भी बच्चा उस राक्षस से डर क्यों नहीं रहा?  सभी उसे देखकर खुश क्यों हैं?  वह समझ नहीं पाती। गोपाल कहता है............ अभी राक्षस बाहर जाएगा तो हम अंदर जा के सभी बच्चों को बचा लेंगे। रेनू बोली............ ठीक है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        थोड़ी ही देर में राक्षस बच्चों के लिए खाना लेने बाहर गया,  तभी रेनू और गोपाल कुटिया के अंदर गए,  रवि भाग कर आया और रेनू को गले लगा लिया। रेनू............ मेरे भाई,  तू ठीक है ना,  मुझे तेरी बहुत चिंता हो रही थी,  राक्षस ने तेरे साथ कुछ किया तो नहीं। रवि बोलता है............ नहीं दीदी,  वह तो बहुत अच्छा है। रेनू बोलतीहै............ क्या?  अच्छा है,  तू कैसी पागलों वाली बातें कर रहा है?  रवि............नहीं दीदी मैं सही कह रहा हूं, वह सच में बहुत अच्छा है,  वह सभी बच्चों से बहुत प्यार करता है  और सबका बहुत ख्याल रखता है । सभी बच्चे बोलते हैं............ हां दीदी,  वह राक्षस वह हमारा बहुत ख्याल रखता है । रेनू और गोपाल समझ नहीं पाते की यह हो क्या रहा है? बच्चे बोल क्या रहे हैं?  लगता है राक्षस ने इन्हें मोहित कर लिया है। रेनू,  रवि से कहती हैं............ मेरे भाई,  राक्षस ने  तुम लोगों को सम्मोहन में ले रखा है इसलिए तुम लोग ऐसी बातें कर रहे हो । रवि............ नहीं दीदी,  ऐसा कुछ भी नहीं है, हमें राक्षस ने कोई सम्मोहन में नहीं किया है।                                                                                                                                                                                                                   वहां पर सभी बच्चे 4 साल से लेकर 15 साल तक की उम्र के थे। थोड़ी ही देर में राक्षस कुटिया में वापस आ जाता है। राक्षस रेनू और गोपाल को देखकर बहुत गुस्सा करता है। तुम  लोग कौन हो ? तुम यहां पर क्या कर रहे हो ?  तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी कुटिया में आने की?  तुम लोग अभी और इसी वक्त यहां से चले जाओ,  नहीं तो बहुत बुरा होगा,  तुम्हारे साथ,  तभी रवि बोलता है............ नहीं राक्षस भैया,  यह मेरी दीदी है, आप इन्हे कुछ मत करना,  मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। राक्षस बोलता है............ ठीक है,  लेकिन इन्हें बोलो यह अभी यहां से चले जाए । रेनू बोलती  हैं............ नहीं,  मैं नहीं जाऊंगी,  मैं अपने भाइ को और इन बच्चों को अपने साथ लेकर जाऊंगाी । राक्षस बहुत गुस्से में आ जाता है............ तुम इन्हें नहीं ले जा सकती। रेनू,  राक्षस को कहती है कि............ तुमने इन बच्चों को क्यों पकड़ के रखा है?  इन मासूम बच्चों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?  रेनू बोलती  हैं............ मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं,  तुम मेरे भाई और इन बच्चों को यहां से जाने दो,  उनके मम्मी पापा बहुत दुखी हैं। राक्षस बोलता है............ तो फिर मेरा क्या होगा?  मैं फिर से अकेला हो जाऊंगा। रेनू बोलती है............ मतलब,  तुम कहना क्या चाहते हो? राक्षस कहता है कि............ हम नो  भाई थे । ट्रेन का डिब्बा पलटने से मेरे 8 भाई मर गए लेकिन मैं दुर्भाग्यवश बच गया और एक गड्ढे में जा गिरा। मैं 4 दिनों तक उस गड्ढे  में रहा। मैं तो उस गड्ढे से निकल भी नहीं पा रहा था,  क्योंकि मैं सिर्फ 6 साल का था,  तभी एक बाबा आए और उन्होंने मुझे वहां से निकाला ।वह बहुत चमत्कारी बाबा थे । उन्होंने मुझे अपनी सारी शक्तियां सिखाई,  उन्होंने मुझे कहा था कि अगर तुम अपने भाई की उम्र के लोगों को मेरे पास लेकर आओगे तो मैं उनके अंदर तुम्हारे भाइयों की आत्मा डाल  दूंगा, तब तुम उनके साथ खुशी-खुशी रहना।                                                                                                                                                                                                                                                                                    लेकिन,  कुछ दिनों में ही चमत्कारी बाबा की मृत्यु हो गई,  मैं बहुत रोया कि मैं फिर से अकेला हो गया,  लेकिन मेरे पास बाबा की शक्तियां थी,  इसलिए जब भी कोई ट्रेन आती और जब भी कोई बच्चा मुझे देखता तो मैं उसे उठा लेता। मेरे भाइयों की आत्मा तो उनमें नहीं आ सकती लेकिन मैं उन्हें अपने भाइयों की तरह ही प्यार करता हूं । रेनू कहती हैं............ मैं तुम्हारी भावनाओं को समझ सकती हूं लेकिन उनके भी माता-पिता -भाई बहन है,  वह भी बहुत दुखी होंगे, तुमने क्या यह सब नहीं सोचा? राक्षस बहुत दुखी होता है............ मैंने बहुत गलत किया। रेनू पूछती हैं............ तुम कितने साल के हो। राक्षस कहता  हैं............ मैं 14 साल का हूं। रेनू कहती है............ तुम तो मेरे रवि की उम्र के हो, तो तुम भी मेरे भाई हुए। राक्षस ने कहा............ तुमने मुझे अपना भाई कहा। रेनू कहती हैं............ हां,  तुम भी मेरे भाई हो,  अब  तुम्हें किसी भी बच्चे को उठाने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें अपना भाई बनाती हूं,  मैं तुम्हें अपने साथ रखूंगी,  अब तुम मेरे साथ रहोगे । राक्षस,  रेनू को पकड़ के रोने लगता है। राक्षस कहता है............ दीदी लेकिन क्या समाज मुझे अपना पाएगा। रेनू कहती है............ क्यों नहीं?  तूने क्या गलत किया है?  तुम तो खो गए थे,  तुम्हें तो इस दुनिया के बारे में पता भी नहीं है। मैं तुम्हें इंसान बनाऊंगी और बहुत अच्छा इंसान बनाऊंगी और मेरी नानी भी तुम्हें बहुत प्यार करेगी । रवि कहता है........... हां, राक्षस भैया,  मेरी नानी भी आपसे बहुत प्यार करेगी।                                                                                                                                                                                                                                              रेनू,  राक्षस और सभी बच्चों को लेकर वहां से चले जाती हैं और अपनी  नानी के घर पहुंच जाती हैं। रेनू, नानी को पूरी बात के बारे में बताती है। नानी  ने राक्षस को गले लगाया   हैं। नानी कहती है............  बेटा तुम कोई राक्षस नहीं हो,  तुमने अपने आप को राक्षस क्यों समझा? तुम एक बच्चे हो,  मेरे रवि की तरह,  नानी राक्षस को नहलाती हैं, अच्छे से तैयार करती हैं और वह बिल्कुल एक आम लड़के की तरह दिखने लगता है । नानी कहती है............  देखा  अब कोई पहचाने गा भी नहीं तुम्हें कि,  तुम कभी राक्षस के रूप में थे,  तुम तो इंसान हो । अब तुम मेरे परिवार का एक हिस्सा हो । रेनू नानी से कहती हैं............  नानी इन सभी बच्चों का क्या करें?  नानी ने कहा............  हमें इन्हें पुलिस को सौंप देना चाहिए,  वह उन्हें उनके घर पहुंचा देंगे नानी  और रेनू पुलिस स्टेशन जाते हैं और पुलिस को पूरी घटना के बारे में बताते हैं । नानी राक्षस के  बारे में कुछ नहीं बताती। पुलिस सभी बच्चों को उनको उनके मां-बाप को देते हैं। अब रेनू,  रवि और राक्षस जिसका नाम नकुल रखा गया सभी लोग नानी के साथ रहते हैं और बहुत खुश रहते हैं । बचपन में ही खो जाने की वजह से नकुल अपने आप को राक्षस  समझता था । उसे नहीं पता था  कि वह इंसान है और एक  छोटा सा बच्चा है। 

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