यह कहानी एक 10 साल के लड़के की है । जिसका नाम नवीन है, वह बहुत चतुर है । एक दिन की बात है, नवीन स्कूल से घर जा रहा था, तभी उसकी टक्कर उसके पड़ोसी श्यामलाल से हो जाती है । उसने ढेर सारी मिठाइयां ले रखी थी, सारी मिठाईयां मिट्टी में गिर गई और खराब हो गई , उसका पड़ोसी नवीन पर बहुत गुस्सा किया और कहा तुमने मेरा बहुत नुकसान कर दिया अब इसकी भरपाई तुम्हें करनी होगी। नवीन मैंने जानबूझकर नहीं किया और हां, टक्कर आपकी वजह से लगी है आप पता नहीं क्या सोचते आ रहे थे । पड़ोसी बोलता है, कि एक तो गलती करते हो, ऊपर से अपनी गलती मानते भी नहीं । पड़ोसी जानता था, नवीन बहुत चतुर हैं और वह इन सब चीजों से निकलने की पूरी कोशिश करेगा, लेकिन पड़ोसी नवीन को उसके घर लेकर गया और उसके माता-पिता को कहा कि देखो इसने मुझे धक्का दे दिया और मेरी सारी मिठाइयां गिरा दी । नवीन के माता-पिता ने नविन को डाटा और कहा यह तूने क्या किया? नवीन ने कहा पिताजी यह अंकल मुझे नहीं देख रहे थे, मैं तो देख कर चल रहा था, इनकी गलती की वजह से मिठाई गिरी है। पड़ोसी बोलता है,अच्छा सारी गलतियां मेरी है, पड़ोसी बोलता है, मैं इसकी शिकायत पंचायत में करूंगा। नवीन के माता-पिता कहते, छोटी सी बात के लिए आप पंचायत में क्यों जाएंगे? पड़ोसी कहता है, यह छोटी बात नहीं है नवीन आए दिन हमेशा कुछ ना कुछ नुकसान करता रहता है, अब बहुत हुआ। अगले दिन सब लोग पंचायत में गए, पड़ोसी ने अपनी बात पंचों के सामने रखी। पंचों ने कहा कि, हां हमने भी सुना है कि नवीन बहुत शरारत करता है । सारे पंच बोलते हैं कि, यह गलत है, तुम्हें श्यामलाल को मिठाई की भरपाई के पूरे पैसे देने होंगे, नवीन के माता-पिता बोलते हैं की हमें मंजूर है, लेकिन श्यामलाल बोलता है, नहीं मुझे इनके पैसे नहीं चाहिए । सारे पंच बोलते हैं कि फिर तुम क्या चाहते हो? यह छोटा सा बालक है इसको हम सजा नहीं दे सकते, तो श्यामलाल बोलता है की, मेरी मिठाई के पैसे नवीन ही देगा, नविन के माता पिता बोलते है, नविन कहा से देगा वह तो अभी बालक है सारे पंच भी बोलते है, हां, वह अभी बालक है । श्यामलाल बोलता है, मैं नवीन को एक काम देता हूं, उसको एक चीज बेचनी होगी। सारे पंच पूछते है क्या? श्यामलाल एक रुमाल निकालता है और बोलता है कि यह रुमाल नवीन को 1000 में बेचना होगा । सारे पंच बोलते, तुम मूर्ख हो क्या? यह ₹5 का रुमाल कोन 1000 रूपए में खरीदेगा । यह एक बच्चा है, कैसे बेचेगा? श्यामलाल कहता है, अगर इसने यह बेच दिया तो, मैं इससे एक पैसा भी नहीं लूंगा और उसको माफ भी कर दूंगा । सारे पंच बोलते हैं कि ऐसा नहीं हो सकता, तभी नवीन कहता है कि, मैं ऐसा कर सकता हूं और मैं ऐसा जरूर करूंगा। श्यामलाल बोलता है, लेकिन तुम्हारे पास बस कल तक का समय है कल तक तुम्हें यह रुमाल 1000 में बेच देना होगा अगर नहीं बेचा तो मैं तुम्हें सजा दूंगा और तुम को कबूल करनी होगी। नवीन बोलता है जैसा आप कहेंगे वैसा ही करूंगा कल तक में यह रुमाल 1000 रुपए में बेच के दिखाऊगा । नवीन के माता पिता कहते हैं, यह तो कैसी पागलों वाली बातें कर रहा है कोई ₹5 का रुमाल १००० रुपए में क्यों खरीदेगा? श्यामलाल मन ही मन में सोचता है कि अपने आप को बहुत चलाक समझता है अब देखता हूं इसकी चालाकी । अगले दिन नवीन रुमाल लेकर बहुत सारी दुकानों पर जाता है और बोलता है यह रुमाल आप 1000 रुपए में खरीदेंगे, सारे दुकान वाले नवीन पर हंसने लगते हैं कि ₹5 का रुमाल कोई १००० रुपए में खरीदेगा वो मुर्ख ही होगा । नविन थक जाता है अब उसके पास ज्यादा वक्त नहीं था। दिन खत्म होने वाला था नवीन सोच में पड़ जाता है कि मैं क्या करूं? मैं कैसे इस रुमाल को बेचु तभी उसे एक सुनार की दुकान दिखती हैं, सुनार को उसका नौकर चाय लेकर आता है और चाय में मक्खी गिरी होती है, तो नौकर बोलता है, मालिक, चाय में मक्खी गिर गई है, मैं दूसरी चाय लाता हूं, तो सुनार कहता है,मुर्ख कहीं के तू चीनी, चायपत्ती , दूध, पानी इन सब का नुकसान करेगा । सुनार मक्खी निकाल कर चाय पी जाता है और अपने नौकर से कहता है, मक्खी गिरने की वजह से मैं तेरी आधी तनख्वाह काट लूंगा, नौकर बोलता है, इसमें मेरी क्या गलती है? चाय तू ही लेकर आया ना तू ने मक्खी को मना क्यों नहीं किया? नविन सोचता इसे में रुमाल जरूर बेच दूंगा, नविन सुनार के पास जाता है और बोलता है, सुनार जी आप कितने बुद्धिमान हो मैंने देखा कि आपने कैसे चाय व्यर्थ नहीं होने दी, सुनार कहता है, तो हमें हर चीज को संभाल के इस्तेमाल करना चाहिए उसे व्यर्थ ही फेंकना नहीं चाहिए, नवीन बोलता है सोनार जी, मेरे पास एक रुमाल है क्या आप खरीदेंगे? सुनार कहता है, कैसा रुमाल? नवीन रुमाल को निकालता है और बोलता है यह देखो, सुनार कहता है, यह तो एक आम रुमाल है मैं इसे क्यों खरीदु? सुनार पूछता है कितने में बेचोगे? नवीन बोलता है 1000 रुपए में सुनार कहता है, पागल है क्या तु? कोई ₹5 का रुमाल 1000 रुपए में क्यों खरीदेगा? नवीन कहता है, सुनार जी आपने इस रुमाल को ध्यान से नहीं देखा यह कोई आम रुमाल नहीं है, यह चमत्कारी रुमाल है, सुनार कहता है, चमत्कारी, चल मेरे को बेवकूफ मत बना मैं कोई मूर्ख नहीं हूं, नवीन कहता है, ठीक है मेरे पास ऐसे तीन रुमाल थे मैंने अपने नानी के गांव में जाकर एक रुमाल बेचा और उस सुनार ने अपनी आंखों पर जैसे ही इस रुमाल को रखा उसके पूर्वज आए और कहां-कहां खजाना रखा है और कहां उनकी जमीनें हैं सब उसको बता कर गए और वो रात ही रात में बहुत अमीर हो गया। नवीन बोलता है, सुनार जी में चलता हूं आपको तो ये रुमाल खरीदना नहीं है, सुनार सोचने लगता है कि मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रहा, सुनार सोचता है, क्या पता सच भी बोल रहा हो, खरीद के देख लेता हूं क्या जाता 1000 रुपए में, सुनार रुमाल को खरीदने को तैयार हो जाता है और बोलता है कि मैं इसका इस्तेमाल पंचायत में करूंगा ताकि वहां पर साबित हो सके के रुमाल काम करता है या नहीं, नवीन बोलता है बिल्कुल ठीक। नवीन, सुनार को लेकर पंचायत में जाता है और बोलता है कि, मैंने ये रुमाल इन सुनार जी को बेच दिया है। सुनार बोलता है कि, इसने मुझे कहां है यह चमत्कारी रुमाल है, इसको चेहरे पर रखते ही मुझे मेरे पूर्वज दिखेंगे और मैं रुमाल आप लोगों के सामने अपनी आँख पर रखूँगा, अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं इससे 1000 रुपए पर वापस ले लूंगा । पंचायत बोलती है, ठीक है, तभी नवीन बोलता है, लेकिन सुनार जी एक बात का ध्यान रखें कि इस रुमाल को केवल एक ईमानदार और सच्चा इंसान ही अपने चेहरे पर रख सकता है और आप ने कभी भी बेईमानी की हो किसी को दुखी किया हो तो आपको पूर्वज नहीं दिखाई देंगे। सुनार की बहुत इज्जत थी, लेकिन सुनार पापी था बेईमान था और वह अपने से कमजोर लोगों पर अत्याचार करता था। सुनार ने अपने चेहरे पर रुमाल रखा लेकिन उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया, सुनार ने फिर से रुमाल रखा फिर उसे कुछ नहीं दिखाई दिया उसे कोई पूर्वज नहीं दिखाई दीये । पंचायत पूछती है तुम तुम्हारे पूर्वज दिखाए दिए, सोनार सोचने लगता है अगर नहीं कहूंगा तो सबको पता चल जाएगा में बईमान अत्याचारी हु, सुनार ने कहा कि, हां हां मेरे पूर्वज दिख रहे हैं, अरे मेरी दादी जी हैं, मेरे दादाजी हैं, देखो सभी लोग हैं वाह वाह वाह वाह, आज बेटा नवीन तुम्हारी वजह से मुझे मेरे पूर्वज दिखाई दिए । सुनार नवीन को 1000 रुपए देता है और वहां से चला जाता है । श्यामलाल बोलता है, देखा पंच जी कितना चतुर लड़का है किस तरह से सोनार को बेवकूफ बनाया, पंचायत बोलती है कि, वह छोटे से बालक से बेवकूफ बन गया यह उसकी गलती, तुम्हारी सरत पूरी हुई, अब तो तुमे मिठाई की भरपाई भी नहीं मिलेगी, श्यामलला बोलता है, मुझे मंजूर है, मेरी सरत पूरी हुइ ।

Nice story
ReplyDeletethank you
Delete